यौन उत्पीड़न के खिलाफ JNUTA और JNUSU की संसद तक ‘पद यात्रा’ आज

यौन उत्पीड़न मामले के अलावा अलावा भी जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कई मुद्दों पर प्रशासन के साथ शिक्षकों और स्टूडेंट के मतभेद चल रहे हैं. छात्रों और शिक्षकों द्वारा शुक्रवार को जेएनयू से संसद तक के लिए 'पद यात्रा' निकाली जाएगी.

यौन उत्पीड़न मामले के अलावा अलावा भी जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कई मुद्दों पर प्रशासन के साथ शिक्षकों और स्टूडेंट के मतभेद चल रहे हैं. छात्रों और शिक्षकों द्वारा शुक्रवार को जेएनयू से संसद तक के लिए ‘पद यात्रा’ निकाली जाएगी. इस मार्च की जानकारी जेएनयू स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष गीता ने दी.

आपको बता दें कि यौन उत्पीड़न मामले के अलावा भी जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कई मुद्दों पर प्रशासन के साथ शिक्षकों और स्टूडेंट के मतभेद चल रहे हैं.

75 फ़ीसदी अटेंडेंस के अलावा यूजीसी के कई फैसलों का विरोध हो रहा है, जिसमें हाल में ही 2 उच्च शिक्षण संस्थानों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान करने के फैसला भी शामिल है. इसी वजह से जेएनयू स्टूडेंट यूनियन और टीचर्स असोसिएशन इन मुद्दों पर संसद तक मार्च करने जा रहा है.

गीता ने अपने ट्वीट में सभी छात्रों और शिक्षकों से अपील कि वे शि‍क्षा को बचाने लिए इस ऐतिहासिक मार्च में शामिल हों. गीता ने अपील की कि जेएनयू और देश को खराब हालत में जाने से बचाने के लिए इस मार्च में शामिल हों. गीता ने साथ में एक पोस्टर भी शेयर किया है कि यह मार्च देशभर के विश्वविद्यालयों में हो रही नाइंसाफी के को बंद करने के लिए है.

संसद तक मार्च 2 बजे जेएनयू नॉर्थ गेट से निकलेगा. आपको बता दें कि 18 मार्च से जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन भूख हड़ताल और सत्याग्रह कर रहा है.

टीचर्स एसोसिएशन की प्रेसीडेंट सोनाझरिया मिन्ज़ के अनुसार कई सारे मुद्दे हैं जिसके लिए यह मार्च निकाला जा रहा है. इसमें 75 फ़ीसदी अटेंडेंस की खिलाफत करने की वजह से 7 चेयरपर्सन को हटाने के नोटिफिकेशन को वापस लेने की मांग शामिल है.

सोनाझरिया मिन्ज़ के अनुसार अन्य मांगों में एग्जक्यूटिव काउंसिल के उस फैसले को वापस लेना भी शामिल है, जिसमें शिक्षकों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए कमेटी बनानेकी बात कही गई है. जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन के सचिव सुधीर कुमार ने भी इन मार्च में शामिल होने के लिए दूसरे टीचर्स असोसिएशन अपील की है.

अटॉनमी का भी किया विरोध

सोनाझरिया मिन्ज़ को के अनुसार ऑटोनमी का फैसला और मुश्किलें बढ़ाएगा और जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन इस फैसले का पुरजोर विरोध करती है. ऑटोनमी के नाम पर निजीकरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके साथ ही सरकार उच्च शिक्षा को आसान बनाने की अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है. मिन्ज़ के अनुसार ऐसे में उनके पास आंदोलन करने के अलावा को चारा नहीं रह गया है.

इनको मिली स्वायत्तता

आपको बता दें कि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने देश के 62 उच्च शिक्षण संस्थानों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान की है, इन संस्थानों में कई यूनिवर्सिटी शामिल है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा यूजीसी ने पांच केंद्रीय और 21 राज्य विश्वविद्यालयों सहित 62 उच्च शैक्षणिक संस्थाओं को पूर्ण स्वायत्तता दी है. बता दें कि जिन संस्थाओं को पूर्ण स्वायत्तता दी गई है, वे अपनी दाखिला प्रक्रिया, फीस की संरचना और पाठ्यक्रम तय करने के लिए स्वतंत्र होंगे.

इन लिस्ट में उन संस्थानों का नाम शामिल किया गया है, जिसे NAAC स्कोर में 3.26 अधिक अंक हासिल हुए हैं. इसमें सबसे ज्यादा स्कोर 3.77 अंक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को मिला है. स्वायत्ता मिलने के बाद यह सभी संस्थान बगैर यूजीसी की अनुमति के ही नए कोर्स और विभाग चालू कर सकेंगे.

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