जोगी कांग्रेस का सवाल: रामविचार ने चुनाव आयोग से क्यों छुपाई अपनी पत्नी के करोडों की टर्नओवर वाली कंपनी की जानकारी…?

प्रवक्ताओं ने मामले का खुलासा करते हुए राज्यसभा सांसद को बर्खास्त करने की मांग की

रायपुर:भाजपा के राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम पर चुनाव आयोग के समक्ष पेश किये गए शपथ पत्र पर जानकारी छुपाने का आरोप लगा है.जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) के प्रवक्ताओं ने मामले का खुलासा करते हुए कहा कि चुनावी शपथ पत्र में रामविचार ने अपनी पत्नी श्रीमती पुष्पा देवी नेताम के संबंधित कॉलम में उनकी करोड़ों की टर्नओवर वाली कम्पनी में शेयरहोल्डर होने की जानकारी को छुपाया है .

जबकि कोलकाता की जिस कंपनी में उनका शेयर है वो भी फर्जी है .पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजीव अग्रवाल ने मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर क्यों राज्यसभा सांसद ने चुनाव आयोग को गलत जानकारी दी.शपथ पत्र में सूचना छुपाना अपराध की श्रेणी में आता है .

पार्टी निर्वाचन आयोग से मांग करती है कि शीघ्र रामविचार नेताम राज्यसभा पद से बर्खास्त कर उन पर अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाये . .उन्होंने कहा कि जोगी कांग्रेस इस मामले की शिकायत निर्वाचन आयोग ,ईडी से करेगी .यदि इसके बाद भी कार्यवाही नहीं की गई तो पार्टी हाईकोर्ट की शरण में जाएगी.उन्होंने कहा कि 3 जून 2016 को राज्यसभा सांसद ने चुनावी शपथ पत्र में उन्होंने ने अपनी पत्नी के कम्पनी का डिटेल नहीं दिया ,वे जून में ही सांसद बने ,इस दौरान भी उनकी पत्नी कोलकाता की गरिमा एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में डायरेक्टर थी .हालांकि इसके बाद 1 अगस्त 2017 को उनकी पत्नी ने उक्त कंपनी की डायरेक्टरशिप से अपना इस्तीफा दिया .

वे राम विचार नेताम के सांसद बनने से पहले 13 जून 2015 से लेकर 01 अगस्त 2017 तक उनकी पत्नी श्रीमती पुष्पा देवी नेताम इस कंपनी में डायरेक्टर रही लेकिन अपने चुनावी शपथ पत्र में उन्होंने इस जानकारी को छुपाया, जो कि निर्वाचन अपराध की श्रेणी में आता है लेकिन सवाल यह उठता है कि क्यों चुनाव आयोग में राज्यसभा सांसद ने जानकारी नही दी. पार्टी ने 6 सवालो के जवाब भी मांगे है .चुनावी शपथ पत्र जो फॉर्म 26 में कहा जाता है उसमें केंद्रीय चुनाव आयोग के द्वारा जारी गाइडलाइन्स और नियमों के मुताबिक फॉर्म 26 में शपथ पत्र में किसी भी प्रकार की असत्य घोषणा करने या सूचना छुपाने पर धारा 125 क के प्रावधान लागू होंगे.

इस धारा के अधीन फॉर्म 26 ( शपथ पत्र ) में किसी भी प्रकार की असत्य सूचना प्रस्तुत करना या सूचना छुपाने एक निर्वाचन अपराध है जिसमें छह महीने तक की कैद का दंडनीय प्रावधान है.इस पूरे मामले में एक व्यक्ति भगवान दास की खास भूमिका है। जो नेताम जी का पार्टनर कहा जा सकता है. इस व्यक्ति के कंपनी में जुड़ने के बाद से कंपनी का टर्नओवर तेजी से बढ़ा है जो 8 करोड़ से ज्यादा पहुँच गया. पुष्पा देवी नेताम के साथ भगवान दास भी उनकी इस कंपनी में डायरेक्टर है . भगवान दास नेताम की दूसरी कंपनी मा कुदरगढ़ी बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड में भी डायरेक्टर हैं .

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