छत्तीसगढ़

कांग्रेस से जोगी का अध्याय समाप्त : सिंहदेव

उनका खुद का घर बनने से कांग्रेसियों को बढ़ी राहत
अंतागढ़ टेप काण्ड में आवाज प्रमाणित, खुली पोल
पुनिया के नाम पर दांव नहीं हुआ कारगर

अनुराग शुक्ला

जगदलपुर. कांग्रेस में मै की प्रथा चलाने वाले अजीत जोगी का अध्याय अब समाप्त हो चुका है। मै नहीं तो कांग्रेस नहीं और पार्टी के अंदर रहकर पार्टी को नुकसान पहुंचाना जोगी के लिए आत्मघाती हुआ। सब्र के अभाव में जोगी ने जो किया उसे देखकर एआईसीसी ने उनके फैसले को सुरक्षित रखा था, लेकिन उन्होंने अपना खुद का घर (नई पार्टी) बनाकर सभी अटकलों को दूर कर दिया।

उनके ऐसा करने से हमारे जैसे कांग्रेसियों ने राहत की सांस ली है। यह कहना था प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव का शुक्रवार को जब वे पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने दावा किया है कि जोगी को कांग्रेस ने हमेशा ही साबित करने का मौका दिया लेकिन वे खुद तो फेल होते चले गए और पार्टी को भी गर्त में ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दिल्ली ने उनपर विश्वास कर नए राज्य की कमान सौंपी थी। आदिवासी बाह्ूल्य इलाका होने से यह विश्वास था कि वे पार्टी को नई उचाईयों में ले जाएंगे।

लेकिन ऐसा हुआ नहीं और वे 2003 से लेकर 2008 और 2013 में फेल हुए। बावजूद इसके प्रदेश कांग्रेस उनके साथ चलने का प्रयास करती रही। उनके चहेतों को पदों पर बैठाया गया उनके बेटे और पत्नी को भी पूरा सम्मान मिला। इसके बाद भी मै वाली बात सामने आती रही। इसके बाद जब अंतागढ़ टेप काण्ड हुआ तो सभी परत खुल गई। टीएस बाबा ने दावा किया है कि अंतागढ़ टेप काण्ड में जो आवाज है वो अजीत जोगी की है। इसकी रिपोर्ट हैदराबाद की एजेंसी से उनके पास लिखित में है।

कांग्रेस से अलग होने के बाद भी उन्होंने कांग्रेस में घमासान मचाने के लिए पार्टी के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया से अपने संबंधों का हवाला दिया। इस संबंध को एक बार इस तरह से जोड़कर देखा जा रहा था कि जोगी की कांग्रेस में वापसी हो सकती है। प्रदेश प्रभारी ने खुद ही स्पष्ट किया है कि वे जोगी के साथ के बैच के आईएएस नहीं है । वे 1971 के हैं और जोगी 1970 के। इसके बाद सारी बातें तब साफ हो गई जब प्रदेश प्रभारी ने कहा कि जोगी से उनकी एक आद बार मुलाकात संसद में हुई होगी। जोगी को कांग्रेस में लाने या फिर उनसे संबंध की बात को कोरी अफवाह का हवाला दिया गया। ऐसा होने से यह माना जा रहा है कि जोगी का एक और दांव फेल हो गया है।

मातृत्व छांव में लौट रहे हैं

एक सवाल के जवाब में सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस छोड़कर जाने वाले वापिस कांग्रेस में आ रहे हैं, क्योंकि राजनीति खुद के लिए दूसरों के लिए की जाती है। इसके लिए एक प्लेटफार्म की आवश्यकता होती है। व्यक्तिगत प्रभाव के चलते कुछ लोग अवश्य ही अपने नेता के साथ जाते हैं जो स्वाभाविक है लेकिन राजनीति करने वालों को समय के साथ यह समझ में आ जाता है कि उनका स्थान कहां है, ऐसे में कांंग्रेस के मातृत्व छांव में जो लौट रहे हैं उन्हें अपनी गलती का एहसास है।

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