पत्रकार सुशील पाठक हत्याकांड से जुड़े रिश्वत प्रकरण में आरोपियों को किया बरी

रायपुर।

सीबीआई कोर्ट ने आज से 10 साल पहले हुए पत्रकार सुशील पाठक हत्याकांड से जुड़े रिश्वत प्रकरण में आरोपियों को बरी कर दिया है। इनमें तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डीके राय, कांस्टेबल लक्ष्मी नारायण और पत्रकार तपन गोस्वामी का नाम शामिल है। दरअसल 2010 में सुशील पाठक हत्याकांड में राम बहादुर नागर ने एडिशनल एसपी डीके राय पर 2 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था।

रामबहादुर नागर ने आरोप लगाया था कि पत्रकार तपन गोस्वामी के जरिये सीबीआई के एडिशनल एसपी डीके राय ने केस को प्रभावित करने के एवज में ये रिश्वत मांगी थी। इस कांड में रिश्वत का प्रकरण का मामला सामने आने के बाद सीबीआई पर गंभीर सवाल उठ रहे थे।

सरकंडा के जमीन कारोबारी रामबहादुर नागर को केस से बाहर करने सीबीआई टीम में शामिल एएसआई लक्ष्मीनारायण शर्मा और प्राइवेट जासूस तपन गोस्वामी को रिश्वत के दो लाख रु. के साथ सीबीआई की विजलेंस टीम ने गिरफ्तार किया। इस मामले में एएसपी डीके राय को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि 9 दिसंबर 2010 को बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार सुशील पाठक की हत्या कर दी गयी थी। आरोप था कि टीम में शामिल सीबीआई के सहायक उप निरीक्षक लक्ष्मीनाराण और शहर के पत्रकार एवं निजी जासूस बताने वाला तपन गोस्वामी ने पत्रकार पाठक हत्याकांड के मामले में सरकंडा के ठेकेदार रामबहादुर सिंह को फंसाने की धमकी देकर पिछले दिनों 10 लाख की मांग की थी।

इसकी लिखित शिकायत सीबीआई विजीलेंस भिलाई कार्यालय को की गई थी। रिश्वत की राशि 8 लाख में प्रथम किश्त 2 लाख रूपए जमीन दलाल ने सीबीआई को देने राजी होते हुए सीबीआई भिलाई को इसकी जानकारी दे दी, चूंकि सीबीआइ इंस्पेक्टर द्वारा रिश्वत लेने का मामला था इसलिए इसकी खबर सीबीआई मुख्यालय दिल्ली को दी गई।

दिल्ली और भिलाई से सीबीआई की 10 सदस्यीय टीम ने जरहाभाठा मंदिर चौक स्थित अर्पाटमेंट में आरोपी तपन गोस्वामी के घर में छापा मारा। सीबीआई की विजिलेंस टीम ने तपन गोस्वामी की सफेद रंग की मारूति क्रमांक सी.जी.15 बी. 0810 के अंदर रखे दो लाख रूपए बरामद किए थे।

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