जीसीईएल नि:शुल्क एलईडी बल्ब व स्कूल शुज बांटे

रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार की उजाला योजना व एलईडी बल्ब के फायदे को बताने हेतु जीएमआर छत्तीसगढ़ एनर्जी लिमिटेड जीसीईएल ने लगभग 350 एलईडी बल्बों का निःषुत्क वितरण संयंत्र के पास के 2 गावों में किया एवं आने वाले महिनों में लगभग 600 बल्बों के वितरण की योजना है। इस सोच के पीछे ग्रामीणों में सरकार के उजाला योजना के दूरगामी परिणामों व भविष्य में साधारण बल्बों को पूर्ण रूपेण समाप्त करने के उद्देष्य के क्रियान्वयन हेतु जीसीईएल के संयंत्र प्रमुख व सीओओ रवि शंकर एस के मार्गदर्षन व अध्यक्षता में एक कार्यकंम आयोजित किया गया। जिसके तहत अपने आसपास के ग्रामों के प्रत्येक घरों के महिलाओं को एक-एक एलईडी बल्ब का निःषुल्क वितरण ग्राम भटापारा व गैतरा के प्राथमिक शाला में किया। कार्यक्रम में ग्राम रायखेड़ा के उप सरपंच मिलाप वर्मा, भाटापारा प्राथमिक शाला के हेड मास्टर व्यंकटेष वर्मा, के सांथ – सांथ जीसीईएल के शषांक शार्मा – जीएम, मनीष श्रीवास्तव -जीएम, किषोर राउत – एजीएम, रवि काॅषलिकर – एजीएम, परमेंष्वर वाॅकुदकर – प्रबंधक, अतुल गुप्ता – प्रबंधक, गिरिराज उत्तरवार – प्रबंधक, ननीता खरे – उप प्रबंधक व जीएमआर वरलक्ष्मिफाउंडेषन के सभी सदस्य भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शरूवात माता सरस्वती की पूजा, दीप प्रज्वलित व नारियल फोड़कर की गई। सभी गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत के पष्चात् ननीता खरे व ग्राम गैतरा की मनीषा ने एलईडी बल्ब के विभिन्न फायदों के बारे में महिलाओं व बच्चों को बताया। गौरतलब हैकि कार्यक्रम में महिलाओं को बांटा गया जिससे वे इसकी उपयोगिता को जानकर भविष्य में सभी साधरण बल्बों को एलईडी से बदल सके।
सभा को संबोधित करते हुए सीओओ रवि शंकर ने कहा कि हम अपने आस पास के ग्रामीणों ,बच्चों व महिलाओं के जीवनषैली के उत्थान के लिए हमेषा प्रयासरत रहते हैं। यह बल्ब उसी कड़ी में ग्रामीणों के उत्कृष्ठ जीवनष्ैाली के लिए प्ररित करेगा व सरकार की उजाला योजना को जन-जन तक पहुचाने की मुहिम में मददगार साबित होगा।
कार्यक्रम के दौरान दोनों ग्रामों के प्राथमिक शाला के सभी बच्चों को टाॅम स्कूली जूते भी वितरित किए गए। गौरतलब है,कि जीसीईएल की सामाजिक उत्तरदायित्व की संस्था जीएमआर वरलक्ष्मि फाॅउंडेषन ने सन् 2013 से लेकर अब तक लगभग 3000 जूतों का वितरण संयंत्र के आसपास के प्राथमिक शालाओं में करता आ रहा है। आज भी भारत में सरकरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का परिवार गुणवत्ता वाले जूते नहीं ले पाता और यही वजह है कि अत्यंत दूरी में स्थित स्कूलों में पहुचने के लिए उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अतः गुणवत्ता पूर्ण जूते उपलब्ध कराने पर स्कूलों में उपस्थिति के अवरोधेा को खत्म व माता-पिता को उनके बच्चों को नियमित स्कुल भेजने के लिए प्ररित करता है। यही नहीं जुतों को स्वास्थ्य पदोन्नति हस्तक्षेप की तरह देखा गया है जिसका उद्देष्य पैरों में होने वाली विभिन्न प्रकार की चर्म रोगों से बचाना है। टाॅम स्कूल शुज का वितरण जीएमआर फाउंडेषन स्कुल के बच्चों के स्वास्थ्य व सुरक्षा के जागरूकता अभियान को प्रोत्सहित करता है।
सन् 2006 में अमेरिकी यात्री ब्लेक माॅयकोस्की ने अरजेन्टीना के गांव के बच्चों के मदद के लिए गए थे, वहां उन्होने देखा कि वहां बच्चों के पैरों में जूते नहीं है और उनकी मदद के लिए उन्होने टाॅम की कंपनी की शुरूवात की जिसमें उन्होने हरेेक बिकने वाले एक जोड़ी जूतों के सांथ एक जोड़ी नए जुते निःषुल्क जरूरतमंदों को प्रदान करने का निर्णय लिया और दुनियाभर के लोगों को दृष्टि बहाल करने में मदद की।

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