जूदेव की कमी खलेगी, कांग्रेस को जीत की तलाश

सीतापुर विधानसभा क्षेत्र जशपुर विधानसभा क्षेत्र

अमरजीत की जीत रहेगी बरकरार

या बदलेगा भाजपा का चेहरा  

जशपुर में भाजपा का गढ़ ढहाने

कांग्रेस के सामने होगी चुनौती

अमरजीत भगत

रामशरण भगत सरगुजा जिले की अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीतापुर विधानसभा क्षेत्र आजादी के बाद से ही कांग्रेस का गढ़ रही है। अविभाजित मध्यप्रदेश में यहां से कांग्रेस की सुखीराम लंबे समय तक जीत हासिल करते रहे। वर्तमान में यहां से कांग्रेस के अमरजीत भगत लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए हैं। वहीं जशपुर विधानसभा में भाजपा का ही कब्जा रहा है। अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित जशपुर विधानसभा क्षेत्र में जशपुर राजघराना का सीधा प्रभाव रहा है। यही वजह है कि यहां से भाजपा को जीत मिलती रही।

रायपुर: अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीतापुर विधानसभा सीट पर साल 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पुराने चेहरे को बदलते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अजीत जोगी अपने करीबी अमरजीत भगत को कांग्रेस उम्मीदवार बनवाने में कामयाब रहे। पिछले तीन विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस के अमरजीत सिंह लगातार जीत कर विधानसभा में पहुंचते रहे। 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अमरजीत भगत ने भाजपा के राजाराम भगत को सीधे मुकाबले में 5102 मतों से हराया। कांग्रेस के अमरजीत भगत को 35369 मत मिले वहीं भाजपा के राजाराम भगत को 30267 मतों से संतोष करना पड़ा।

साल 2008 के चुनाव में कांग्रेस ने दोबारा अमरजीत भगत को अपना प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल कर अपना किला बचाए रखा। हालांकि इस चुनाव ने भाजपा ने उम्मीदवार में बदलाव करते हुए पूर्व मंत्री गणेश राम भगत को अपना उम्मीदवार बनाया, लेकिन भाजपा कांग्रेस के गढ़ में सेध नहीं लगा पाई। कांग्रेस के अमरजीत भगत ने सीधे मुकाबले में भाजपा के गणेश राम भगत को 1722 मतों से हराया। कांग्रेस के अमरजीत भगत को 36301 व भाजपा के गणेशराम भगत को 34579 मतों से संतोष करना पड़ा।

2013 विधानसभा चुनाव में भी सीतापुर विधानसभा सीट तीसरी बार जीत हासिल की। कांग्रेस ने तीसरी बार अमरजीत भगत को मैदान में उतारा वहीं भाजपा ने चेहरा बदल कर उनके पुराने प्रतिद्धंदी राजाराम भगत को अपना उम्मीवार बनाया। इस चुनाव में सीधे मुकाबले में कांग्रेस के अमरजीत भगत ने भाजपा के राजाराम भगत को 17909 मतों से हराया।

बता दें मिशनरी के प्रभाव वाले सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को आजादी के बाद से अब तक केवल तीन बार जीत हासिल करने का मौका मिला। वहीं एक बार निदर्लीय प्रत्याशी प्रो गोपाल राम ने जीत हासिल की थी। इस बार कांग्रेस किसे उम्मीवार बनाएगी ये भविष्य के गर्त में हैं मगर भाजपा के लिए सीतापुर विधानसभा में जीत हासिल करना आसान नहीं होगा।

भाजपा का गढ़ रहा है जशपुर

जशपुर जिले की पांचों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के विधायक काबिज है। जिले वनवासी कल्याण आश्रम व आॅपरेशन घर वपासी के जरिए आदिवासी समाज में गहरी पैठ रखने वाले जशपुर राजघराना यहां भाजपा का प्रमुख चेहरा है। यही वजह है कि जशपुर में भाजपा की चुनौती से निपटना कांग्रेस के लिए आसान नजर नहीं आ रहा है।

साल 2003 के विधानसभा चुनाव में इस विधानसभा सीट से भाजपा के रामशरण भगत जीत हासिल कर विधानसभा में पहुंचे थे। उन्होंने सीधे मुकाबले में कांग्रेस के विक्रम भगत को 9563 मतों से हराया। भाजपा के रामशरण भगत को 45295 मत मिले वहीं कांग्रेस के विक्रम भगत को 35732 मतों से संतोष करना पड़ा।

2008 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने चेहरा बदलते हुए यहां से जागेश्वर भगत को अपना उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में भाजपा दोबारा जीत हासिल करने में सफल रही। वहीं कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बदलते हुए विनय कुमार भगत को मौका दिया। मगर भाजपा के गढ़ में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इस सीट पर भाजपा के जागेश्वर भगत ने सीधे मुकाबले में कांग्रेस के विनय कुमार भगत को 15770 मतों से हराया। भाजपा के जागेश्वर भगत को 64553 मत मिले वहीं कांग्रेस के विनय कुमार भगत को 48783 मतों से संतोष करना पड़ा।

2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने पूर्व विधायक राजशरण भगत को अपना उम्मीदवार बनाया वहीं कांगे्रस ने बदलाव करते हुए सरहुल राम भगत को अपना उम्मीवार बनाया। इस चुनाव में भाजपा को लगातार तीसरी बार जीत हासिल हुई और रामशरण भगत जीत कर विधानसभा में पहुंचने में कामयाब रहे। उन्होंने कांग्रेस के सरहुल भगत को सीधे मुकाबले में 34349 मतों से हराया। भाजपा के राजशरण भगत को 79419 मत मिले वहीं कांग्रेस के सरहुल राम भगत को 45070 मतों से संतोष करना पड़ा।

इस बार जोगी कांग्रेस भी मैदान में है। वहीं भाजपा के चेहरा रहे जशपुर राजघराना के कुमार दिलीप सिंह जूदेव की कमी भाजपा को खलेगी। हालांकि जशपुर विधानसभा सीट के अलावा जिले की दीगर सीटों पर राजपरिवार का सीधा प्रभाव है पर दिलीप सिंह जूदेव की कमी की वजह से मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एवं पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी जशपुर जिले की सुरक्षित सीटों से जीत का रास्ता तलाशने में पूरा जोर लगा रही है। वहीं भाजपा को अभी भी जशपुर राजघराने के करिश्मेें पर पूरा भरोसा है। इस बार इस सीट से भाजपा का चेहरा कौन होगा इस पर सस्पेंस बना हुआ है वहीं कांग्रेस भी जीत सकने वाले चेहरे की तलाश में मशक्कत करती नजर आ रही है।

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