बृहस्पति की दशा से है पीडित,तो करें ये उपाय

केसर, हल्दी, दाल, चना, सोना व पीतल दान देना चाहिए शिक्षण संस्थान व निर्धन छात्रों को यथा शक्ति दान देना चाहिए

बृहस्पति को सभी ग्रहों में सबसे शुभ ग्रह माना जाता है। जिस राशि में गुरू की कृपा होगी। उस राशि के जातकों को पुण्य लाभ की प्राप्ति होगी,लेकिन जब गुरू की दशा कमजोर होगी तो जातकों को इसका अशुभ फल प्राप्त होगी।

वहीं अगर आप बृहस्पति की दशा से पीडित है,और आप पर बृहस्पति की दशा का अनुकुल प्रभआव पड़ रहा है,तो पीताम्बरा विष्णु का पूजन, बृहस्पति व्रत का अनुष्ठान करें।

द्वादश भाव में बृहस्पति स्थित होने पर जातक अपने पिता और दादा के जीवन काल में सुखी रहता है तथा उनकी मृत्यु के पश्चात जातक को अनेको कष्टों का सामना करना पड़ता है। अतः जातक को सोना व हल्दी अवश्य धारण करना चाहिए।

बृहस्पति के अनुकुल प्रभाव से बचने के उपाय

केसर, हल्दी, दाल, चना, सोना व पीतल दान देना चाहिए शिक्षण संस्थान व निर्धन छात्रों को यथा शक्ति दान देना चाहिए व पीपल के वृक्ष की नियमित सेवा करनी चाहिए।

केसर, हल्दी, दाल, चना, सोना व पीतल दान देना चाहिए। मन्दिर के पुजारी को यथा शक्ति कपड़ों का दान करना चाहिए।

अपने गुरूओं का सम्मान अवश्य करना चाहिए निरंतर आठ गुरूवार तक कच्चे सूत को हल्दी में रंगकर पीपल के पेड़ में बॉधने से गुरू मजबूत होता है। अपने गुरूओं का सम्मान अवश्य करना चाहिए।

हल्दी व केसर का तिलक लगाने से भी गुरू ग्रह की शुभता प्राप्त होती है। स्त्री को उसके पति सामथ्र्यनुसार 2 सोने के टूकड़े दें और इन टुकड़ों में से एक टुकड़ा पानी में बहायें और दूसरा अपने पास रखें।

शुभ फल के लिए करें ये उपाय अगर अष्टम भाव में गुरू बैठकर कष्टकारी साबित हो रहा है तो पीले रंग की वस्तु या चने की दाल, गुड आदि दान करने से शुभ फल मिलता है। द्वादश भाव में बैठा गुरू धन देगा किन्तु सन्तान दुष्ट निकलेगी।

ऐसे में हमेशा केसर का तिलक लगाना चाहिए, पीपल के वृक्ष को जल देना चाहिए, साधु-सन्तों की सेवा करें, नाक हमेशा साफ रखें। ये उपाय करने से सन्तान भी सही राह पर चलेगी एवं व्यापार में प्रगति होगी।

यदि आपकी कुण्डली में गुरू कहीं भी बैठकर अधिक कष्ट दे रहा है तो भांगरमूल की जड़ को शुद्ध करके ताबीज में भरकर गले में पहनें एवं गुरूवार के दिन पानी में नागरमोथा डालकर स्नान करें।

Back to top button