जज-बाबुओं के खिलाफ जांच होगी मुश्किल ,वसुंधरा सरकार लाएगी नया बिल

वसुंधरा राजे सरकार एक ऐसा बिल लाने जा रही है, जिससे जज, मजिस्ट्रेट और पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ जांच करना कठिन हो जाएगा.
बिल के पहले सरकार 7 सितंबर को ऑर्डिनेंस भी जारी कर चुकी है. नए कानून में पूर्व जजों और एक्स पब्लिक सर्वेट को भी शामिल किया गया है.
ऑर्डिनेंस के मुताबिक, जज, मजिस्ट्रेट और पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ उनकी ड्यूटी के दौरान किए गए किसी भी काम के लिए जांच का आदेश या एफआईआर नहीं हो सकती. इसके लिए पहले

सरकार से परमीशन लेनी होगी.
अगर सरकार 180 दिन तक कोई फैसला नहीं देती, तब कोर्ट या कोई दूसरी एजेंसी जांच का आदेश दे सकती है.
कांग्रेस का कहना है कि किसी भी आरोपी के लिए सबूतों से छेड़छाड़ के लिए 180 दिन का वक्त पर्याप्त होता है.
मीडिया पर भी लगाई लगाम

द क्रिमिनल लॉ (राजस्थान अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस 7 सितंबर 2017 को लागू हुआ था. कानून में जांच का आदेश होने तक मीडिया की रिपोर्टिंग पर भी बैन है. ऑर्डिनेंस के जरिए कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर 1973 (CrPC) में बदलाव किया गया है. इससे आईपीसी के सेक्शन 228 बी में भी बदलाव किया है.
नए नियम के मुताबिक, अगर कोई शख्‍स किसी जज, मजिस्ट्रेट या पब्लिक सर्वेंट की आइडेंटिटी जाहिर करता है, तो उसे दो साल तक की सजा हो सकती है. इसमें जुर्माने का प्रावधान भी है. मतलब मीडिया तब तक रिपोर्टिंग नहीं कर सकता, जब तक सरकार परमीशन न दे.
गृहमंत्री बोले- नए बदलावों के बारे में नहीं पता

गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि उन्हें बदलावों की जानकारी नहीं है. वहीं सीनियर कैबिनेट मिनिस्टर राजेंद्र राठौड़ ने इस कदम को अधिकारियों के खिलाफ कानून के गलत इस्तेमाल को रोकने वाला बताया.
बीजेपी के बड़े नेता घनश्याम तिवारी ने वसुंधरा राजे सरकार के नए कदम को अंसवैधानिक करार दिया.
आम आदमी पार्टी नेता आशुतोष ने ट्विटर पर लिखा, ‘यह बीजेपी की घबराहट का संकेत है, जब पार्टियां इस तरह की हरकतें शुरू कर देती हैं, तो यकीन मानिए कि वह हार रही होती हैं. विनाश काले विपरीत बुद्धि’

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