सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लापरवाही, ईलाज के दौरान जुड़वा शिशुओं की मौत

कटघोरा पुलिस के द्वारा की जा रही छानबीन

कटघोरा :

कटघोरा थाना छेत्र अंतर्गत ग्राम पटपरा के बंधन सिंह गोड़ के परिवार के साथ एक ऐसी हृदय विदारक घटना घटी जिसको सुनकर हर किसी का दिल पसीज जाएगा। जहाँ एक ओर इस युग मे भगवान के बाद डॉक्टरों को दूसरा दर्जा दिया गया है।

वहीं इसके ठीक विपरीत डाक्टरों की घोर लापरवाही से एवम गलत तरीके से ईलाज करने से दो नवजात शिशुओं की मौत से पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। आखिर नवजात शिशुओं की मौत का जिम्मेदार कौन?

पटपरा निवासी बंधन दास की पत्नी रागनी को शुक्रवार शाम 7. 30 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो उसके परिजनों ने कटघोरा समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डिलीवरी कराने 102 महतारी एक्सप्रेस में कॉल किये लेकिन जवाब में उनको 102 नही होने की सूचना मिली आपको एक घंटे इंतजार करना पड़ेगा।

इस बीच लगभग आधे घण्टे पश्चात उनकी पत्नि की डिलीवरी घर मे ही हो गई। जिन्होंने दो जुड़वा नवजात शिशुओं को जन्म दिया। उसके बाद परिवार के लोग स्वयं अन्य वाहन किराया करके रात्रि 11 बजे अस्पताल पहुँचे। इस बीच अस्पताल में कोई डॉक्टर नही होने से ईलाज में लापरवाही हुई।

शनिवार शाम 5 बजे दोनों नवजात शिशुओं की मौत हो गई। इस बीच रागनी के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया और बोला कि अगर हमको समय पर 102 को मदद मिल जाती तो बच्चो को बचाया जा सकता था।

अस्पताल की लापरवाही के कारण ही बच्चों की मृत्यु हुई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि हॉस्पिटल के सिस्टर रेफर करने के नाम पर उनसे 5 हजार रुपये की मांग की गई।

अस्पताल प्रबंधन का कारनामा यहीं समाप्त नही होता। जब इस विषय मे उनके परिजनों ने और बताया कि रागनी को जबरन छुट्टी देकर जब एम्बुलेंस के माध्यम से सुतर्रा बाजार के पास छोड़ दिया गया जबकि उनका घर सुतर्रा से कुछ किलोमीटर और दूर था।

आधे रास्ते मे ही एम्बुलेंस छोड़कर वापस आ गया। उसके बाद उनके परिजनों ने डग्गा किराये पर किया और फिर घर पहुचे। जबकि रागनी को ईलाज की सख्त आवश्यकता थी।

इस प्रकार अस्पताल की लापरवाही को देखकर परिजनों ने 102 एम्बुलेंस और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कटघोरा थाने में की शिकायत। अब पुलिस कर रही जांच।

हॉस्पिटल प्रबंधन के द्वारा एक तो ईलाज में भारी लापवाही बरती गई साथ ही अवैध रूप से पैसे की मांग करके अपने ही पेशे को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है” ऐसे में क्या उनकी मानवीय संवेदना मर चुकी थी।

इस लोमहर्षक घटना ने फिर से हॉस्पिटल प्रबंधन की कलई खुलकर सामने आई है। ऐसे चिकित्सा संस्थान को lso सर्टिफिकेट से सम्मानित करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान प्रदाय कर 5 लाख रुपये के प्रथम पुरस्कार के रूप में नगद राशि दी जाती है। तो क्या ऐसे में ये हॉस्पिटल इस लायक है जो दो नवजात शिशुओं के ईलाज का सौदा महज 5 हजार में करता हो।

कटघोरा से अरविंद शर्मा और नवीन गोयल की रिपोर्ट

Tags
Back to top button