काल भैरव अष्टमी 2018: भूल कर भी न करें कालाष्टमी के दिन ये काम

भगवान शिव की क्रोधाग्नि का विग्रह रूप माने जाने वाले कालभैरव का प्राकट्य पर्व मार्गशीर्ष माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी में मनाया जाता हैं। इस दिन मध्याह्न में भगवान शिव के अंश से भैरव की उत्पत्ति हुई थी, जिन्हें शिव का पांचवा अवतार माना गया है।

इनके दो रूप है पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध है तो वहीँ काल भैरव अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक है।

इनकी शक्ति का नाम है ‘भैरवी गिरिजा’ जो अपने उपासकों की अभीष्ट दायिनी हैं।

भैरव की सवारी काला कुत्ता है। कालाष्टमी जयंती के दिन कई ऐसे काम हैं जिन्हें करने से पूजा का पूरा फल नहीं मिलता। काल भैरव जयंती की रात को काल भैरव की अर्चना करनी चहिए।

इस दिन जप, पाठ और हवन आदि करने से मृत्यु तुल्य रोग-कष्ट भी दूर होते हैं। इनका व्रत रख उपासना करने से हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती हैं।

जानते है कालाष्टमी के दिन न करने वाले काम, जिन्हें अगर आपने किया तो जिन्दगी भर आपको दुख झेलना पड़ेगा-

1: काल भैरव जयंती के दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए।

2: अन्न ग्रहण मत करें। ये नियम केवल उनके लिए हैं जो व्रत करेंगे।

3: गन्दगी न करें। घर की साफ-सफाई करें।

4: कुत्ते को मारे नहीं। सम्भव हो तो कुत्ते को भोजन कराएं।

5: नमक न खाएं। नमक की कमी महसूस होने पर सेंधा नमक खा सकते हैं।

6: माता-पिता और गुरु का अपमान न करें।

7: बिना भगवान शिव और माता पार्वती के काल भैरो पूजा नहीं करना चाहिए।

8: रात में सोना नहीं चाहिए। सम्भव हो तो जागरण करें।

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