कादर खान के बारे में संपूर्ण जानकारी संक्षिप्त में

फेमस एक्टर होने के साथ-साथ कॉमेडियन, स्क्रिप्ट और डाइलोग राइटर भी थे

90 के दशक से अब तक के लोग कादर खान को न जाने यह संभव ही नहीं जिन्होंने पहले नेगेटिव रोल का लोगो का दिल जीता फिर कॉमेडी कर, कॉमेडी में तो उन्होंने एक नई पहचान दी. गोविंदा, शक्ति कपूर के साथ तो एक से बढ़कर एक फिल्मे दी जो आज भी लोग कई बार देखते है. वो एक फेमस एक्टर होने के साथ-साथ कॉमेडियन, स्क्रिप्ट और डाइलोग राइटर भी थे.

कादर खान के बारे में संपूर्ण जानकारी संक्षिप्त में

नाम कादर खान
जन्म दिन 22 अक्टूबर 1935
जन्म स्थान काबूल, अफगानिस्तान
मृत्यु दिनांक 31 दिसम्बर 2018
मृत्यु स्थान कनाडा
नागरकिता भारत और कनाडा की
माता इकबाल बेगम
पिता अब्दुल रहमान
भाई 3 भाई हैं जिनके नाम शामसउर रहमान, फज़ल रहमान, हबीब उर रहमान थे.
बेटे सरफराज और
शिक्षा इस्माइल युसूफ कॉलेज से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन प की.
विशेषता वो उन चंद अभिनेताओं में आते हैं जिनकी जोड़ी किसी अभिनेत्री के साथ नहीं बल्कि अन्य हास्य अभिनेताओं के साथ ज्यादा पसंद की गई हो. उनकी जोड़ी गोविंदा, शक्ति कपूर, असरानी और अरुणा ईरानी के साथ बहुत जमी. गोविंदा के साथ उनकी केमिस्ट्री को तो बहुत ही ज्यादा पसंद किया गया, उन दोनों का कॉमिक सेन्स और टाइमिंग का उस समय कोई और कम्पेरिजन नहीं था.
पेशा बहुत सी फिल्मों में सपोर्टिंग रोल में काम किया हैं. इसके अलावा डाइलोग और स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर भी काम किया.
मुख्य अभिनीत फ़िल्में किल दिल, इन योर आर्म्स, मिस्टर मनी, डोंट वरी, उमर, कोई मेरे दिल में हैं, लकी: नो टाइम फॉर लव, सुनो ससुरजी, बस्ती, डाइल100, धडकन, कुंवारा, बिल्ला नम्बर 786, अनारी नंबर 1, आंटी नंबर1, जुदाई, सपूत, याराना, वीर, दीडॉन, आग, साजन का घर, खुद्दार, दिल हैं बेताब, अंगार, बोल राधा बोल, दो मतवाले, नसीब, अदालत, बैराग, दाग
फ़िल्मों में लेखन उन्होंने शराबी, कुली, लावारिस, मुक्कदर का सिकन्दर और अमर-अकबर-एन्थोनी के डाइलोग लिखे थे. अग्निपथ और नसीब के स्क्रीन-प्ले लिखे.
विवाद अनुपम खेर को पद्म-श्री मिलने पर अपनी राय रखी
अवार्ड्स बाप नम्बरी बेटा 10 नम्बरी के लिए बेस्ट फिल्मफेयर कॉमेडियन का अवार्ड और अंगार में बेस्ट डाइलोग के लिए फिल्मफेयर अवार्ड

कादर खान जन्म और परिवार

कादर खान का जन्म 11 दिसम्बर 1937 को अफगानिस्तान के काबूल में हुआ था. कादर खान मूलत: पास्थून के काकर जनजाति के थे.अब्दुल रहमान और इकबाल बेगम के 4 पुत्रों में से एक कादर खान थे, जबकि उनके अन्य तीन भाइयों के नाम शामसउर रहमान, फज़ल रहमान, हबीब उर रहमान थे. वास्तव में 1 साल की उम्र में कादर खान परिवार के साथ मुम्बई आ गये थे और यहाँ वो झुग्गी-झोपड़ियों में रहने लगे.

कादर खान ने अजरा खान से शादी की और उनके परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे शाहनवाज और सरफराज भी हैं. जिनमें से शाहनवाज़ ने 2 फिल्मों मिलेंगे-मिलेंगे और वादा में निर्देशक सतीश कौशिक को असिस्ट किया हैं . इसके अलावा उन्होंने राज कँवर की फिल्म हमको तुमसे प्यार हैं में राज कंवर को असिस्ट किया था.

कादर खान की व्यस्तता और बच्चों की परवरिश के सन्दर्भ में सरफराज ने एक बार मीडिया को बताया था, कि जब वो छोटे थे तब वो अपने पिता के साथ सेट पर नही जाते थे. क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे पढाई को बीच में छोडकर फिल्मों में आए, वो हमेशा पहले पढाई अच्छे से खत्म करने को प्रेरित करते थे, उनका इस मामले में अनुशासन इतना सख्त था कि हमें फिल्मी मैगजीन पढने से भी रोका जाता था.

सरफराज़ ने कहा कि वो हमेशा से एक्टिंग करना चाहते थे, जब मैं छोटा था तब मैं टेलीविज़न देखता था, मैं अपने पिता को टीवी पर देखता था और रोमांचित महसूस करता था. मेरे पिता तब सप्ताह में 5 दिन काम करते थे या फिर महीने भर के शेड्यूल के लिए बाहर जाते थे, ऐसे में हमारी माँ हमारा ध्यान रखती थी.

इस कारण मैं ये नहीं कह सकता कि मेरे पिता एक फेमस एक्टर और काम में व्यस्त होने के कारण हमारा ध्यान नहीं रख पाते थे, सच तो ये हैं कि वो जब भी हमें जरूरत होती हमेशा हमारे पास होते थे, वो यदि 5 मिनट भी हमारे साथ बिताते तो उनका वो समय क्वालिटी टाइम ही होता था.

भारत में होने पर कादर खान अब भी मुंबई में ही रहते हैं लेकिन उन्हें भारत के साथ ही कनाडा के भी नागरिकता हासिल हैं.

कादर खान शिक्षा

कादर खान ने मुम्बई की म्यूनिसिपल स्कूल से अपनी प्रारम्भिक शिक्षा ली हैं, कादर खान पढ़ाई में मेधावी छात्र थे. इसी कारण उन्होंने आगे चलकर इस्माइल युसूफ कॉलेज (जो कि मुम्बई युनिवर्सिटी से एफिलिएटेड थी) से अपनी इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरी की.

उसके बाद कादर खान ने 1970 से लेकर 1975 तक मुम्बई यूनिवर्सिटी में पढ़ाया भी था. उन्होंने एमएच’ साबू सिद्दीक कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, बईकुला के सिविल इंजिनियर विभाग में बतौर प्रोफेसर के तौर पर पढाया था.

कादर खान के करियर की शुरुआत

कॉलेज के वार्षिकोत्सव के फंक्शन में कादर खान ने प्ले में हिस्सा लिया था, जिसकी सबने बहुत प्रशंसा की. अभिनेता दिलीप कुमार को जब इस प्ले के बारे में पता चला तो उन्होंने भी इसे देखने की इच्छा जताई, इसके लिए विशेष इंतजाम किये गये और कादर खान ने उनके लिए ही प्ले में अभिनय भी किया.

प्ले को देखकर दिलीप कुमार कादर खान से ना केवल प्रभावित हुए बल्कि उन्होंने खान को अपनी अगली 2 फिल्मों के लिए साइन भी कर लिया, जिनके नाम “सगीना महतो” और “बैराग” थे. उस समय फिल्म इंडस्ट्री में कादर खान जैसे नए व्यक्ति के लिए ये बहुत सम्मान और गर्व की बात थी.

कादर खान का फिल्मी करियर

कादर का फिल्मों में अभिनय का करियर 1973 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने दाग फिल्म में काम किया था.

1981 में कादर खान ने नसीब फिल्म में काम किया था, जिसमें उनके साथ अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, ऋषि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा थे.

फिर 1982 में कादर खान ने वापिस अमिताभ के साथ ही एक और फिल्म सत्ते पे सत्ता भी की, जिसमें उनके साथ शक्ति कपूर और हेमा मालिनी भी थी. इसके बाद अगले साल 1983 में खान ने 4 फिल्मों में काम किया, जिनके नाम मव्वाली, जस्टिस चौधरी, जानी दोस्त और हिम्मतवाला थी, इनमे से 3 फ़िल्में जहाँ जीतेन्द्र और श्रीदेवी की थी, वहीँ एक फिल्म जानी दोस्त में धर्मेन्द्र और परवीन बाबी थी.

1984 में बड़े पर्दे पर कादर खान अभिनीत फिल्मों की संख्या और बढ़ गयी. अब उन्होंने नया कदम, अंदर-बाहर, कैदी, अकल्मन्द, मकसद, तोहफा और इन्कलाब जैसी फिल्मों में काम किया. 1985 में कादर खान ने मासटरजी, सरफरोश, बलिदान, मेरा जवाब और पत्थर दिल में काम किया.

1986 में कादर खान की इंसाफ की आवाज़, दोस्ती दुश्मनी, घर-संसार, धर्म अधिकारी, सुहागन, आग और शोला जैसी फिल्मे आई, जबकि 1987 में उनकी हिम्मत और मेहनत, हिफाजत, वतन के रखवाले, सिन्दूर, खुदगर्ज, औलाद, मजाल, प्यार करके देखो, जवाब हम देंगे और अपने-अपने आई.

फिर 1988 में इन्तेकाम, बीवी हो तो ऐसी, साज़िश, वक्त की आवाज़, घर-घर की कहानी, शेरनी, कब तक चुप रहूंगी, कसम, मुलजिम, दरिया दिल, प्यार मोहब्बत, सोने पे सुहागा थी. फिर 1989 में चालबाज़, कानून अपना-अपना, काला बाज़ार जैसी करनी वैसी भरनी, बिल्लो बादशाह, गैर कानूनी, वर्दी, हम भी इंसान हैं/ आदि फिल्मों में काम किया.

1990 में इन्होंने अपमान की आग, जवानी जिंदाबाद, मुक्कदर का बादशाह, घर हो तो ऐसा, किशन-कन्हैया, शानदार, बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी आदि फिल्मों में काम किया. 1991 में इनकी यारा दिलदार, साजन, इन्द्रजीत, क़र्ज़ चुकाना हैं, खून का क़र्ज़, हम, प्यार का देवता, मर दिल तेरे लिए आदि फिल्मे आई.

1992 में इन्होंने अंगार, बोल राधा बोल, सूर्यवंशी, दौलत की जंग, कसक, नागिन और लूटेरे जबकि 1993 में शतरंज, तेरी पायल मेरे गीत, धनवान, औलाद के दुश्मन, दिल तेरा आशिक, रंग, गुरुदेव, दिल है बेताब, ज़ख्मों का हिसाब, कायदा कानों, आशिक आवारा, आँखें और दिल ही तो हैं जैसी फिल्मे की.

1994 में मिस्टर आज़ाद, घर की इज्ज़त, मैं खिलाडी तू अनाडी, आग, इना मीना डीका, आतिश, पहला पहला प्यार, साजन का घर, अंदाज, खुद्दार, राजा बाबु आदि फिल्मे की. 1995 में हलचल, कुली नम्बर 1 ताक़त, तकदीरवाला, अनोखा अंदाज़, दी डॉन, मैदान-ए-जंग, सुरक्षा, वर्तमान, ओह डार्लिंग! यह हैं इंडिया नाम की फिल्मों में काम किया.

1996 में कादर खान ने “साजन चले ससुराल”, छोटे सरकार, रंगबाज, सपूत, माहिर, बंदिश और एक था राजा में काम किया. 1997 में आपने शपथ, भाई, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी, दीवाना मस्ताना, हमेशा, ज़मीर, बनारसी बाबु, सनम, जुदाई, हीरो नम्बर वन, जुड़वाँ की.

फिर 1998 , में नसीब, कुदरत, हीरो हिन्दुस्तानी, बड़े मिया छोटे मिया, जाने जिगर, दुल्हे-राजा, घरवाली-बाहरवाली, हिटलर, आंटी नम्बर 1, मेरे दो अनमोल रतन की जबकि 1999 में जानवर, हिन्दुस्तान की कसम, हसीना मान जायेगी, सिर्फ तुम, राजाजी, अनाडी नम्बर 1 और आ अब लौट चले आदि फिल्में की. जबकि 2000 में तेरा जादू चल गया, धडकन, जोरू का गुलाम, क्रोध, आप जैसा कोई नहीं, कुंवारा जैसी फिल्मों में काम किया.

2001 में कादर खान की सिर्फ एक फिल्म आई जिसका नाम था इत्तेफाक. जबकि 2002 में खान के करियर ने फिर से गति पकड़ी और उन्होंने जीना सिर्फ मेरे लिए, अंखियों से गोली मारे, बधाई हो बधाई, हाँ! मैंने भी प्यार किया है, चलो इश्क लड़ाए, वाह! तेरा क्या कहना नाम की फिल्मे की.

फिर 2003 में फंटूस, परवाना की जबकि 2004 में मुझसे शादी करोगी, सुनो ससुरजी और कौन हैं जो सपनों में आया नाम की फिल्मे की.

2005 में खान ने कोई मेरे दिल में हैं, लकी, खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे में काम किया. जबकि 2006 में उमर, जिज्ञासा, फैमिली में कम किया, और 2007 में जहाँ जाइयेगा हमें पाइयेगा, ओल्ड इज गोल्ड और अंडर ट्रायल में कम किया.

फिर 2008 में एक ही फिल्म आई महबूबा जबकि 2013 में “दीवाना मैं दीवाना आई” 2014 में ऊँगली तो 2015 में हो गया दिमाग का दही, लतीफ़ और इंटरनेशनल हीरो आई जबकि 2016 में अमन के फ़रिश्ते और 2017 में कादर खान की तबियत ख़राब होने के कारण कोई फिल्म नहीं आई.

कादर खान ने 450 से ज्यादा फिल्मों में काम किया हैं और 250 से ज्यादा फिल्मों के लिए डाईलोग लिखे हैं. उन्हें 1974 में रोटी फिल्म के लिए डाइलोग लिखने पर बहुत अच्छा वेतन मिला था.

वो सुपसिद्ध स्टार अमिताभ बच्चन के अलावा फिरोज खान और गोविंदा जैसे बड़े नामों साथ काम करने के लिए प्रसिद्द रहे हैं. उनके कॉमेडी किरदारों को पहचान डेविड धवन की फिल्मों से ही मिली थी.

कादर खान ने कुछ सीरियल भी किये थे जिनमें हँसना मत, मिस्टर धनसुख, हाए! पडोसी… कौन है दोषी?? और 2012 में सब टीवी पर आने वाला मूवर्स एंड शेखर्स में काम किया था. उन्होंने 1981 में एक फिल्म शमा भी प्रोड्यूस की थी.

कादर खान और लेखन

2015 में फिल्म के प्रमोशनल इवेंट में कादर खान ने खुदके लेखन और अभी के समय में चल रहे लेखन के ट्रेंड बारे में बात की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि “अब तो लेखन में काफी बदलाव आ चुका हैं, और मुझे भी एक लेखक होने के नाते लगता हैं कि अब मुझे भी लेखन का काम वापिस शुरू कर देना चाहिए. मैं जल्द ही अपनी पहले वाली जुबां वापिस लाने की कोशिश करूँगा, मुझे विशवास हैं कि लोग इस जुबां में बात करना जरुर पसंद करेंगे.

कादर खान के “अमर-अकबर-एंथोनी” के डाइलोग को कोई नहीं भूल सकता. उनका शुरू से साहित्य में रुझान रहा था, लेकिन जब उन्होंने प्रोफेशनली लिखना शुरू किया तब उनका टैलेंट सामने आया और सच तो ये था कि फिल्मों में अभिनय करने से बहुत पहले ही उन्होंने लिखना शुरू कर दिया था.

कादर खान ने अपने प्ले “लोकल ट्रेन” के जरिए सम्मानित राष्ट्रीय स्तर के कॉम्पिटिशन में भाग लिया जिसे लेखक और फिल्ममेकर राजिन्द्र सिंह बेदी, नरेन्द्र बेदी और अभिनेता कामिनी कौशल ने जज किया. वो उनसे प्ले के बाद मिले और कादर को फिल्म के लिए लिखने के लिए प्रोत्साहित किया. इस तरह से कादर खान ने 1500 रूपये में नरेंद्र बेदी की फिल्म जवानी-दीवानी के लिए लिखा. ये फिल्म उनके लिए लेखन के क्षेत्र में मिल का पत्थर के जैसे साबित हुई.

फिल्म ना केवल सफल रही बल्कि इसने कादर के लेखन में आगे के रास्ते भी खोल दिए, इसके बाद कादर ने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा. इसके बाद कादर को मनमोहन देसाई ने “रोटी” के लिए डाइलोग लिखने को कहा और इससे पहले उन्हें लेखन के लिए मिले पैसों को लेकर ताना भी मारा. इसके बाद कादर ने कुछ और सफल फ़िल्में धर्म-वीर, अमर-अकबर-एंथोनी, सुहाग, नसीब, गंगा-जमुना-सरस्वती के लिए लिखा.

मुक्कदर का सिकन्दर में भी उन्होंने डाइलोग लिखने का काम किया था. फिल्म इंडस्ट्री और सिनेमा में योगदान के कारण 2013 में कादर खान को साहित्य शिरोमणि अवार्ड से सम्मानित किया गया.

कादरखान और अवार्ड्स

कादर खान के अभिनय और लेखन में इनके कार्य को देखते हुए उन्हें अवार्ड्स की संख्या बहुत कम हैं. 1984 से लेकर 1999 तक वो विभिन्न फिल्मों के लिए 9 बार कॉमेडियन अवार्ड के लिए फिल्मफेयर के लिए नोमिनेट हुए थे.

अमेरिकन फेडरेशन ऑफ़ मुस्लिम फ्रॉम इंडिया (AFMI) ने उनके टेलेंट और भारत में मुस्लिम कम्युनिटी के लिए दिए गये योगदान को पहचाना.

फिल्मफेयर अवार्ड

  • 1982 में कादर खान को “मेरी आवाज़ सुनो”के लिए बेस्ट डाइलोग के लिए फिल्मफेयर अवार्ड मिला था.
  • 1991 में बाप नम्बरी बेटा 10 नम्बरी के लिए बेस्ट फिल्मफेयर कॉमेडियन का अवार्ड मिला था. 1993 में अंगार में बेस्ट डाइलोग के लिए फिल्मफेयर अवार्ड मिला था
  • इसके अलावा वो 1984 में हिम्मतवाला, 1986 में आज का दौर, 1990 में सिक्का, 1992 में हम, 1994 में आँखें, 1995 में मैं खिलाड़ी तू अनादी, 1996 में कुली नम्बरवन, 1997 में साजन चले ससुराल के लिए और 1999 में दुल्हे राज में बेस्ट कॉमेडी के लिए के लिए बेस्ट फिल्म फेयर अवार्ड में नामांकित किया गया.

कादर खान और विवाद

बॉलीवुड सेलिब्रिटी को मिलने वाले पद्मश्री पर भी कादर खान ने बेबाकी से अपनी राय रखी थी. उन्होंने कहा था “ये अच्छी बात हैं कि मुझे नहीं मिला” उस वर्ष रजनीकांत, अनुपम खेर, प्रियंका चोपड़ा, मधुर भंडारकर, एस.एस राज्मौली और म्मालिनी अवस्थी को पद्म अवार्ड मिला था.

बॉलीवुड के स्थापित अभिनेता कादर खान ने तब कहा था कि चापलूसी एक कारण हो सकता हैं कि उनके साथी कलाकारों को ये सम्मान मिल रहा हैं. इंडस्ट्री में उनके साथी कलाकारों को मिलने वाले पद्म अवार्ड के बारे में बोलते हुए इन्होंने कहा था” ये अच्छा हैं कि उन्होंने मुझे अवार्ड नहीं दिया

मैंने अपनी जिंदगी में कभी किसी की चापलूसी नहीं की, नाहीं कभी करूँगा. यदि वो इस समय ये अवार्ड उन लोगो को दे रहे हैं तो मैं यह अवार्ड्स नहीं चाहता.

कादर खान का विशवास हैं कि “अवार्ड मिलना कोई बड़ी बात नहीं हैं लेकिन ये जरुरी हैं कि इन अवार्ड्स पर दर्शकों का विशवास बना रहे, सच तो ये हैं कि पहले इन अवार्ड्स को देते हुए एक ईमानदारी रखी जाती थी, लेकिन अब इस और ध्यान नहीं दिया जाता.

लोग अब एक दुसरे की कद्र करना भूल गए हैं और बहुत स्वार्थी हो गए हैं. मैं मानता हूँ कि उन लोगों जितना योग्य नहीं हूँ जितना कि अभी पद्म अवार्ड के लिए चुने गए लोग हैं.

हालांकि मैं उन सभी लोगों का शुक्रगुज़ार हूँ जिन्होंने मेरा नाम इस अवार्ड के लिए प्रस्तावित किया. उन्होंने अनुपम खेर के पद्म भूषण अवार्ड के लिए नामांकित होने पर कहा कि उन्होंने अब तक किया ही क्या हैं?? सिवाय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की चापलूसी करने के. मैंने सरकार के फैसले का विरोध नहीं कर रहा लेकिन मैं सिर्फ ये जानना चाहता हूँ कि ऐसी कौनसी बात हैं जो मुझमे नहीं हैं.

खान ने आगे कहा कि दर्शको का प्यार उनके लिए सबसे बड़ा अवार्ड हैं इससे पहले के वर्ष में बहुत से लोग खान के लिए इस अवार्ड की डिमांड कर चुके थे.

खान ने इस बारे में कहा कि यदि मैंने अच्छा काम किया हैं तो सरकार मुझे सम्मानित कर देगी ये लोगों का प्यार हैं जो मेरे लिए डिमांड कर रहे हैं. कादर खान इस अवार्ड से पहले आखिरी बार दिमाग का दही फिल्म में दिखाई दिए थे.

कादर खान और राजनीति

कादर खान ने अभिनेताओं के राजनीति में जाने की बात पर भी अपनी राय रखी थी जिसमें उन्होंने कहा था “मैं राजनीति में गए सभी अभिनेताओं से कहना चाहता हूँ कि वो वापिस लौट आये, क्योंकि राजनीति आपकी मंझिल नहीं हैं और ये पॉलिटिक्स ही आपको खत्म कर रही हैं”.

एक बार कादर खान ने अपनी जिन्दगी के कुछ दिलचस्प पहलुओं को उजागर करते हुए कहा था कि एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने अपने मित्र अमिताभ बच्चन को राजनीति में जाने से मना किया था.

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