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आज भी हर पीढ़ी के फेवरेट एक्टर हैं कादर खान

चरित्र अभिनेता के रूप में कादर खान ने कामयाबी का जो मुकाम हासिल किया वो बहुत कम लोगों को ही नसीब हुआ होगा. कादर खान एक ऐसे अभिनेता हैं, जिनके साथ हर बड़ा अभिनेता काम करना चाहता था. लेकिन वो एक ऐसे लेखक भी थे, जिनके साथ काम करने से हर बड़ा अभिनेता कतराता था.

कादार खान की कलम का कमाल

कहा जाता है कि अभिनेता, निर्माताओं के सामने ये शर्त रखने लगे थे कि अगर फिल्म में अभिनय के साथ संवाद भी कादर खान के होंगे तो बेहतर है, लेकिन वो उनके संवाद किसी और राइटर से लिखवाएं.

कादर खान अपने किरदारों के लिए डायलॉग लिखने में गजब की दूरदर्शिता दिखाते थे, जिसकी वजह से उनका पक्षपात का भी आरोप लगता रहा है.

लेकिन हकीकत ये भी है कि अमिताभ बच्चन के ज्यादातर पॉपुलर डायलॉग कादार खान की कलम का ही कमाल है. लगभग 300 से अधिक हिंदी फिल्मों में हास्य अभिनेता, खलनायक, सहनायक, चरित्र अभिनेता और संवाद लेखक के रूप में अपना योगदान देने वाले कादर खान ने कई तरह से सिनेमा में योगदान दिया है.

दिलीप कुमार लाए थे बॉलीवुड में

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पैदा हुए कादर खान को दिलीप कुमार फिल्मों में लेकर आए. कादर खान ने अपने करियर की शुरुआत बतौर शिक्षक के रुप में शुरु की थी. एक बार कॉलेज के वार्षिकोत्सव में उन्हें अभिनय करने का मौका मिला, जहां मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार भी मौजूद थे.

उनके बेहतरीन अभिनय से दिलीप इतने अत्यंत प्रभावित हुए और अपनी फिल्म ‘सगीना’ में काम करने का प्रस्ताव रखा. यहीं से कादर खान के अभिनय करियर की शुरुआत हुई.

हर छवि में छाए कादर खान

साल 1977 में आई ‘खून पसीना’ और ‘परवरिश’ की कामयाबी के बाद उनकी गाड़ी चल निकली. कादर खान को ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘सुहाग’, ‘अब्दुल्ला’, ‘दो और दो पांच’, ‘लूटमार’, ‘कुर्बानी’, ‘याराना’, ‘बुलंदी’ और ‘नसीब’ जैसी बड़े बजट वाली फिल्मों में काम करने का मौका मिला.

कादर खान ने इन फिल्मों में खलनायक से लेकर हास्य अभिनेता तक की भूमिका निभाते हुए खुद की एक अलग छवि बना ली.

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