मध्यप्रदेशराज्य

‘कड़कनाथ हब’ हीरानार को लग सकती है रायल्टी की नजर

झाबुआ को जीआई टैग मिलने के बाद मध्यप्रदेश मांग सकता है रायल्टी, बस्तर हो रहा बंपर उत्पादन

रायपुर: बस्तर में आदिवासी परिवार के लिए आर्थिक आधार बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो रहे कडकनाथ की मूल प्रजाति का जीआई टैग झाबुआ को बाद अब अगर कडकनाथ के उत्पादन में बस्तर के किसानों को मध्यप्रदेश को रायल्टी चुकानी होगी तो उसके आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है।

हालांकि जिला प्रशासन ने साफ कहा है कि वह झाबुआ के मिले जीआई नबंर पर दावा आपत्ति नहीं करेगा। मूल प्रजाति झाबुआ की ही है। उनका जीआई टैग के लिए आवेदन 2012 से था। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने नवंबर 2017 में आवेदन किया था। कडकनाथ का संरक्षण और उत्पादन अधिक करने से जीआई टैग की मांग की गई थी। जिला प्रशासन ने यह भी कहा है कि जीआई नंबर पर दावा आपत्ति की जा सकती है लेकिन वे नहीं करेंगे। बता दें कि जीआई नबंर के लिए 90 दिन के भीतर दावा करना होता है।

हैदराबाद में है भारी डिमांड

बता दें कि दंतेवाड़ा में कडकनाथ का उत्पादन बढ़ता ही जा रहा है। हैदराबाद में भी कडकनाथ की भारी डिमांड है। इन मुर्गी पालकों को कडकनाथ मुर्गी का रेट 500 से 700 रुपए मिल रहा है। इस कारोबार में अब दंतेवाड़ा की आदिवासी महिलाएं भी जुड़ चुकी हैं। गीदम ब्लॉक का हीरानार ने कडकनाथ हब के नाम से अपनी पहचान बना चुका है। आदिवासी महिलाओं के स्व सहायता समूह उत्पादन करने में लगे हुए हैं। किसान अलग से अपना उत्पादन कर रहे हैं। वहीं झाबुआ में मुर्गी पालकों के पास इतना उत्पादन नहीं है। लेकिन अगर रॉयल्टी क्लेम देने की मांग सामने आई तो बस्तर के किसानों के सामने परेशानी बढ़ जाएगी।

जारी रहेगा कडकनाथ प्रजाति का संरक्षण और सवंर्धन काम

कलेक्टर सौरभ कुमार कहना है कि झाबुआ ने 2012 में जीआई टैग के लिए आवेदन किया था। झाबुआ को जीआई नंबर मिल चुका है, इस पर कोई आपत्ति नहीं है। दंतेवाड़ा में इस कडकनाथ प्रजाति का संरक्षण और सवंर्धन काम किया जा रहा है जो जारी रहेगा। यदि रॉयल्टी मांगी तो आगे तय किया जाएगा कि क्या करना है।

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