ज्योतिष

कालसर्प योग – कष्ट ही नहीं उन्नति भी देता हैं

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री 8178677715, 9811598848

राहु और केतु को इस नभ मंडल के दो बिंदुओं की संज्ञा दी गई है। दूसरे शब्दों में राहु और केतु की धुरी पर ही संपूर्ण नभ मंडल भ्रमण कर रहा है। यदि जन्मांक में राहु और केतु को बिंदु मानकर राहु से केतु तक या फिर केतु से राहु तक एक सीधी रेखा खींचने से सारे ग्रह इस रेखा के किसी भी एक ओर आ जाएं तो इस ग्रह स्थिति को कालसर्प योग माना गया है। वर्तमान में कालसर्प योग के संदर्भ के विषय में यह मान्यताएं प्रचलित है कि कालसर्प योग एक अत्यंत संकटजनक, कलह कारक, अनिष्टकारी, कष्टकर और दुखदायी योग है, फिर भी यह एक अत्यंत कल्याणकारी, यश, कीर्ति, श्री संपन्नता, समृद्धि और प्रसिद्धि दायक योग भी है। काल चक्र की गति के अनुसार जीवन में उत्थान-पतन या फिर उतार-चढ़ाव के माध्यम से परिवर्तन प्रकृति का नियम है। यह सत्य है कि कालसर्प योग से ग्रसित जातक का जीवन संघर्ष से भरा रहता है, फिर भी जातक यदि अपने संघर्षों से हार नहीं मानता है तो वह इतिहास के पन्नों पर अपना नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित करता है।

अपनी मेहनत और संघर्ष के फलस्वरुप ऐसा व्यक्ति आकाश की ऊंचाईयों को छूता है। इसके विपरीत संघर्ष से हार मान लेने वाला व्यक्ति निराशा और असफलता के गहन अंधकार में डूब जाता है। इस आलेख के माध्यम से हम यह बताने का प्रयास कर रहे है कि जनमानस में जो एक आम धारणा बनी हुई है कि कालसर्प योग व्यक्ति को कष्ट देने वाला एवं परेशानियों में डालने वाला ही होता है लेकिन सर्वथा ऐसा नहीं है। कालसर्प योग वाले व्यक्तियों के जीवन में सांप सीढ़ी की तरह उतार-चढ़ाव तो आते  हैं परंतु संघर्षों के बाद वे निश्चित तौर पर सफलता की सीढ़ियां भी चढ़ते जाते हैं। प्रस्तुत आलेख में  कालसर्प योग के दोनों पक्षों को सोदाहरण विस्तार दिया गया है। कुंडली के 12 भाव और 12 लग्नों के अनुसार कालसर्प योग कुल 144 प्रकार से निर्मित हो सकता है। जब सभी सातों ग्रह राहु से केतु के मध्य हों तो पूर्ण कालसर्प योग और जब कोई एक ग्रह इनकी पकड़ से बाहर हो तो आंशिक कालसर्प योग बनाता है। लग्न से द्वादश तक विभिन्न भावों में राहु की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, कालसर्प योग को 12 विभिन्न नामों से संबोधित किया जाता है।

उदाहरण 1

स्वतंत्र भारत की कुंडली में अनंत नामक कालसर्प योग बन रहा है। इस कुंडली में राहु प्रथम शरीर तथा मस्तिष्क भाव में स्थित होकर पंचम संतान भाव, सप्तम व्यापार व्यवसाय-उद्योग तथा पति-पत्नी अथवा विपरीत लिंग भाव और नवम धर्म भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। फलतः भारत को राजनीतिक दलीय समस्याओं से जूझना पड़ा रहा है। अधिकाधिक जनसंख्या वृद्धि, व्यापारिक, व्यावसायिक अथवा औद्योगिक घोटाले तथा बलात्कार और धार्मिक उन्माद सुरसा के मुंह के समान  फैलते ही जा रहे हैं। इस प्रकार भारत को निरंतर संघर्ष करना पड़ रहा है।

उदाहरण 2

कालसर्प योग ने जिन्हें जीवन में संघर्ष तो दिया परन्तु साथ ही सफलता भी दी। ऐसा ही एक उदाहरण राजेश पायलट जी के जीवन का है। स्वर्गीय राजेश पाइलट का जन्म एक गरीब घर में हुआ। जीवन में संघर्ष करते हुए उन्होंने वायुसेना की प्रतियोगिता परीक्षा उत्तीर्ण की और पाइलट जैसा उच्च कोटि का पद ग्रहण किया, जिसके लिए त्वरित और ठोस निर्णय लेने की क्षमता नितांत आवश्यक थी। निर्बल मानसिक शक्ति का व्यक्ति कभी भी ऐसे पद हेतु उपयुक्त नहीं होता। इनकी कुंडली में वृषभ राशिस्थ काल सर्प उच्च मानसिक स्तर और परिपक्वता का द्योतक है। जीवन में कुछ नया कर दिखाने की अभिलाषा, उमंग और उत्साह का ही परिणाम है कि उन्होंने राजनीति में उतर कर केंद्रीय मंत्री का पद भी प्राप्त किया और उन्हें लोकप्रियता भी मिली। लेकिन अष्टम का केतु दुर्घटना द्वारा असमय मौत का कारण बना।

उदाहरण 3

धीरू भाई अंबानी की जन्म कुंडली में तृतीय भाव से नवम भाव तक बना वासुकि कालसर्प योग विद्यमान है तदनुसार राहु तृतीय पराक्रम भाव में स्थित होकर सप्तम साथी भाव, नवम भाग्य भाव और एकादश लाभ भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। राहु के पराक्रम स्थान में होने के कारण वे पूरी जिंदगी संघर्ष करते रहे। परन्तु अंतत: धन, यश और सफलता की प्राप्ति हुई।

उदाहरण 4

शेयर व्यापारी हर्षद मेहता को समूचा भारतवर्ष जानता है। चतुर्थ भाव में राहु एवं दशम भाव स्थित केतु के मध्य जहां सभी ग्रह कालसर्प योग बना रहे हैं, वहीं द्वादश भावस्थ शुक्र भिक्षुक को भी राजा बनाता है। लाभेश जहां स्वगृही है वहीं व्ययेश सूर्य भी लाभस्थ है। पराक्रमेश मंगल उच्चाभिलाषी है तथा  व्यापारेश-सुखेश गुरु केंद्र में है और दशमेश बुध युक्त है। बुध-गुरु-सूर्य-चंद्र पर मंगल की दृष्टि है। वहीं पंचमेश शनि अपनी उच्च राशि में धन कारक गुरु से दृष्ट है। अतः भरपूर लक्ष्मी योग है। किंतु भारत के अर्थ तंत्र को हिला देने वाले एवं छोटी उम्र में अल्प अवधि में धन का अंबार लगा देने वाले हर्षद मेहता कालसर्प योग के कारण स्वयं षड्यंत्र में फंस गए।

उदाहरण 5

सर दोराब जी टाटा की जन्म कुंडली में भी कालसर्प योग विद्यमान है। तदनुसार राहु पंचम विद्या, बुद्धि और विवेक भाव में स्थित होकर नवम सत्य, धर्म, त्याग और निष्ठा भाव, एकादश लाभ भाव और प्रथम शारीरिक संरचना भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। यहां यह विशेष द्रष्टव्य है कि अशुभ ग्रह भी त्रिकोण में स्थित होने से शुभ फल प्रदान करते हैं। प्रस्तुत कुंडली में राहु पंचम त्रिकोण भाव में स्थित है। फलतः टाटा समूह के संस्थापक सर दोराब जी टाटा भारत के अग्रणी औद्योगिक साम्राज्य के प्रमुख कीर्ति स्तंभ रहे।

उदाहरण 6

सम्राट अकबर की जन्म कुंडली में प्रथम से सप्तम भाव तक तक्षक कालसर्प योग विद्यमान है। तदनुसार राहु सप्तम उत्तराधिकारी भाव में स्थित होकर एकादश लाभ भाव, प्रथम शरीर भाव और तृतीय पराक्रम भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। यद्यपि वे अपने परिजनों तथा परिवारजनों की ओर से उद्विग्न रहते थे। पुत्र सलीम (जहांगीर) और राजपूत पत्नी जोधाबाई से उनके मत। भेद सर्वविदित हैं फिर भी वे चक्रवर्ती सम्राट अकबर महान की उपाधि से विभूषित हुए।

उदाहरण 7

प्रसिद्ध अभिनेत्री स्मिता पाटिल की जन्म कुंडली में द्वितीय से अष्टम भाव तक कर्कोटक काल सर्प योग विद्यमान है। तदनुसार राहु अष्टम मृत्यु भाव में स्थित होकर द्वादश व्यय भाव, द्वितीय कुटुंब भाव और चतुर्थ भौतिक सुख भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। फलतः स्मिता पाटिल को सैकड़ों उपलब्धियों के सितारों के संसार में स्थापित भी हुईं, किंतु उन्हें शारीरिक सुख, कौटंुबिक तथा पारिवारिक सुख, दाम्पत्य सुख, या भौतिक सुख किसी भी स्थिति में नहीं मिल पाया। इतना ही नहीं उनकी मृत्यु भी असमय हुई। वह अल्पायु में अचानक चल बसीं।

 

उदाहरण 8

श्री राम कथाकार श्री मुरारी बापू की जन्म कुंडली में नवम से तृतीय भाव तक सभी ग्रह होने के कारण कालसर्प योग विद्यमान है। तदनुसार राहु नवम धर्म भाव में स्थित होकर लग्न शरीर, तृतीय पराक्रम और पंचम विद्या, बुद्धि और विवेक भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। फलतः वर्तमान में श्री मुरारी बापू लोकप्रिय एवं अपेक्षाकृत सर्वाधिक व्यस्त श्री राम कथाकार हैं। आज वे गांव-गांव, नगर-नगर और देश-विदेश में लोक कल्याणकारी, मानवतावादी श्री राम का संदेश पहुंचा रहे हैं। इस कारण उन्हें अनेक दैहिक, मानसिक और धार्मिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गृहस्थाश्रमी होते हुए भी उनका संपूर्ण जीवन परमार्थ के लिए ही समर्पित है। यहां यह उल्लेखनीय है कि पापी ग्रह भी त्रिकोण में स्थित होने से पुण्य फल प्रदान करते हैं।

उदाहरण 9

श्रीमती मारग्रेट थैचर ब्रिटेन की प्रथम निर्वाचित महिला प्रधानमंत्री थीं। इनकी जन्म कुंडली में कालसर्प योग होते हुए भी अन्य राज योगों की वजह से वे दो बार लगातार ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनीं। इस जन्म कुंडली में चतुर्थेश और पंचमेश शनि लग्न में है। नवमेश बुध भी लग्न में है। दशम भाव का स्वामी चंद्रमा एकादश भाव में स्थित है तथा उस पर गुरु की दृष्टि है। शश योग भी बन रहा है। दशम भाव में स्थित राहु भी योगकारक शनि की दृष्टि पा रहा है। इस ग्रह स्थिति के कारण वे प्रधानमंत्री बनने में सफल हुईं और कालसर्प योग उनके लिए बाधक नहीं बन सका।

उदाहरण 10

श्री नारायण दत्त तिवारी की जन्म कुंडली में बने रहे कालसर्प योग ने इन्हें जीवन में सामान्य से अधिक उतार चढ़ाव दिए। इनकी कुंडली में राहु एकादश लाभ भाव में स्थित होकर तृतीय पराक्रम भाव, पंचम विद्या, बुद्धि और विवेक भाव और सप्तम सहयोगी भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। फलतः श्री तिवारी के जीवन में निरंतर पद परिवतर्न होते रहें। ये उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री रहे, हटे, विधान सभा में विपक्ष के नेता रहे, हटे, केंद्रीय मंत्री रहे, हटे। इन्हें सदैव राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ता रहा है और रहेगा।

उदाहरण 11

पं जवाहर लाल नेहरू की कुंडली में कालसर्प योग है क्योंकि सभी ग्रह राहु से केतु के मध्य उपस्थित है। सूर्य द्वितीयेश होकर पंचम भाव में क्रूरता दे रहा है। चंद्रमा लग्नेश होकर स्वगृही है पंरतु पापाक्रांत है। स्पष्टतः चंद्र राहु और शनि के मध्य है तथा दशमेश मंगल दशम से षष्ठ है। बुध द्वादश और तृतीय भावों का स्वामी होकर चतुर्थ भाव में लाभेश शुक्र से युति कर रहा है। इस ग्रह स्थिति के कारण उनका संपूर्ण जीवन संघर्षमय रहा तथा उन्हें पुत्र संतान का अभाव रहा। पत्नी का साथ भी लंबे समय तक नहीं रहा, वहीं दामाद की मृत्यु का दुख झेलना पड़ा। अनेक बार जेल गए। चीन के हमले को सहन नहीं कर सके और मृत्यु असमय हुई।

सधन्यवाद सर जी    
ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव
“श्री मां चिंतपूर्णी ज्योतिष संस्थान
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8178677715, 9811598848
 
 ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री
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ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव पिछले 15 वर्षों से सटीक ज्योतिषीय फलादेश और घटना काल निर्धारण करने में महारत रखती है. कई प्रसिद्ध वेबसाईटस के लिए रेखा ज्योतिष परामर्श कार्य कर चुकी हैं। आचार्या रेखा एक बेहतरीन लेखिका भी हैं। इनके लिखे लेख कई बड़ी वेबसाईट, ई पत्रिकाओं और विश्व की सबसे चर्चित ज्योतिषीय पत्रिकाओं  में शोधारित लेख एवं भविष्यकथन के कॉलम नियमित रुप से प्रकाशित होते रहते हैं। जीवन की स्थिति, आय, करियर, नौकरी, प्रेम जीवन, वैवाहिक जीवन, व्यापार, विदेशी यात्रा, ऋण और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, धन, बच्चे, शिक्षा, विवाह, कानूनी विवाद, धार्मिक मान्यताओं और सर्जरी सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं को फलादेश के माध्यम से हल करने में विशेषज्ञता रखती हैं।

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