ग्वालियर-चंबल संभाग में कमलनाथ, दिग्विजय से ज्योतिरादित्य लड़ेंगे राजनीतिक वर्चस्व की जंग

अब इन सीटों का उपचुनाव पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और भाजपा के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए नाक का सवाल बन गया है।

230 सदस्यों की मध्यप्रदेश विधानसभा में करीब 27 सीटों पर उपचुनाव होना है। एक सीट को छोड़ दें तो 26 सीट पर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव जीते थे। जिनमें से 22 पार्टी के बागी नेता ज्योतिरादित्य के साथ भाजपाई हो गए। अब इन सीटों का उपचुनाव पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और भाजपा के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए नाक का सवाल बन गया है। पिछले चार विधानसभा चुनावों के बाद यह पहला अवसर है जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास राज्य की कमान है और चुनाव के महारथी ज्योतिरादित्य सिंधिया है। केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर सिंधिया के साथ चुनाव में सफलता की बड़ी जिम्मेदारी उठा रहे हैं और राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी अभी पिक्चर से गायब हैं।

कांग्रेस ने ग्वालियर में बनाया है वार रूम
ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 सीटों पर उपचुनाव होना है। यह क्षेत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया के दबदबे वाला है। ग्वालियर घराने के महाराज ज्योतिरादित्य को राजनीति का गद्दार बताने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की देखरेख में ग्वालियर में ही कांग्रेस ने वॉर रूम बनाया है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता केके मिश्रा अपनी टीम के साथ वहां सक्रिय हैं। कांग्रेस का वॉर रूम हर रोज सिंधिया को निशाने पर ले रहा है। कांग्रेस की पूर्व महापौर विभा पटेल ने भी सिंधिया के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह काफी सक्रिय हैं।

कमलनाथ खुद रख रहे हैं बारीक नजर

सिंधिया से मिले जख्म को कमलनाथ उपचुनाव में भाजपा को पटखनी देकर भरना चाहते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी उन्हें छूट दे रखी है। लिहाजा कमलनाथ ने 27 सीटों पर प्रत्याशियों को लेकर अलग-अलग सर्वे कराया है। सर्वे के आधार पर वह प्रत्याशी के चयन, मुद्दे, नारे, प्रचार के तौर-तरीकों को लेकर काफी सक्रिय हैं। 12 सितंबर को वह ग्वालियर में पहली बार ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ मोर्चा खोलने जा रहे हैं। कमलनाथ का मुख्य फोकस ज्योतिरादित्य को धोखेबाज बताने पर ही केंन्द्रित है।

कमलनाथ बनाम ज्योतिरादित्य की चल रही है हवा

उपचुनावों की हवा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा और कांग्रेस पीछे चली गई है। ग्वालियर के विजय मिश्रा कहते हैं कि फ्रंट पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ बनाम ज्योतिरादित्य चल रहा है। किशोर सिंह का कहना है कि कांग्रेस के नेता भी यहीं चाहते थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी यही कोशिश थी। ताकि ग्वालियर-चंबल संभाग में उनका दबदबा बना रहे। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर काफी सक्रिय हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला ज्योतिरादित्य बनाम कमलनाथ के नाम पर ही होने की उम्मीद है। इसके लिए कांग्रेस पार्टी क्षेत्र में जातीय समीकरणों को साधने में भी लगी है।

चिंता मत कीजिए, शिवराज की सरकार राज करेगी

मध्यप्रदेश के एक कबीना मंत्री का कहना है कि चिंता मत कीजिए। उपचुनावों में 27 में से 25 सीटें भाजपा जरूर जीतेगी। सूत्र का कहना है कि कांग्रेस कमलनाथ सरकार की नाकामियों को छिपाने के लिए दुष्प्रचार कर रही है। भाजपा जमीन पर लोगों से संपर्क कर रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का काम राज्य की जनता ने पिछले डेढ़ दशक से देखा है। सूत्र का कहना है कि ज्योतिरादित्य के भाजपा में आने के बाद से अब तक 76 हजार कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा की सदस्यता ली है। कुछ तो बात होगी तभी कांग्रेस के 22 विधायकों के बाद भी उसके कुछ विधायक सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए हैं। इसलिए अभी चुनाव की तारीख थोड़ा नजदीक आने दीजिए।

बागी बिगाड़ेंगे खेल

चुनावी राजनीति में भीतरघात सारा खेल बदलकर रख देती है। कांग्रेस के रणनीतिकारों को उपचुनावों में इस स्थिति के पैदा होने की प्रबल संभावना दिखाई दे रही है। उन्हें लग रहा है कि सिंधिया कैंप के प्रत्याशियों को टिकट मिलने के बाद विरोधी खेमा काफी सहायक होगा। क्योंकि भाजपा के पुराने नेताओं, कार्यकर्ताओं को महाराज की सेना हजम नहीं हो रही है। वहीं भाजपा के रणनीतिकारों का कहना है कि जो भाजपा में शामिल हुआ, वह पार्टी का नेता है। हम सब एक हैं। इसलिए कांग्रेस को इस तरह का भ्रम नहीं पालना चाहिए।

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