कमलनाथ जी की कुर्सी रहेगी या जाएगी, कुंडली बताएगी

इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे के नाम बुलाया जाता था कमलनाथ

एक समय था कि कमलनाथ जी को इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे के नाम से सम्बोधित किया जाता था। कमलनाथ जी वहीं नेता है जो अभी तक सबसे अधिक बार लोकसभा तक पहुंच है। आज उनकी स्थिति कष्टमय बनी हुई है। भोपाल के मुख्यमंत्री कमलनाथ जी आजकल पेशोपेश में है। जब से उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का पदभार संभाला है। एक के बाद एक समस्याएं उनके सामने आती जा रही है।

उनके विधायकों को खरीदने की कोशिशें

खबरों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी के नेता उनकी कुर्सी गिराने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है। यहां तक की उनके विधायकों को खरीदने की कोशिशें भी की जा रही है। एक ओर कमलनाथ जी ने भाजपा नेताओं पर अपने विधायको को धन और पद का लालच देकर, उनकी सरकार गिराने का आरोप लगाया है।

फ्लोर टेस्ट की चुनौती

दूसरी ओर भाजपा सरकार कमलनाथ जी को फ्लोर टेस्ट की चुनौती दे रही है। इस स्थिति में कमलनाथ जी पर विधानसभा में विश्वास सिद्ध करने का दबाव डाला जा रहा है। भाजपा पार्टी के अनुसार कमलनाथ जी के विधायक अपनी पार्टी से अलग होना चाहते है और पार्टी भी छोड़ना चाहते है।

ऐसे में सरकार के पास आवश्यक बहुमत नहीं है। कमलनाथ जी ने जब से पदभार संभाला है, उसी दिन से भाजपा सरकार उनकी कुर्सी के पीछे पड़ी है। यहां बता देना सही रहेगा कि विधानसभा में कांग्रेस इस राज्य में 15 साल बाद वापसी की थी। आज कमलनाथ जी के लिए यह स्थिति क्यों उत्पन्न हुई? और क्या कमलनाथ जी इस मुसीबत की घड़ी से बाहर आ पायेंगे? आईये इसका विश्लेषण आज हम उनकी कुंड्ली से करने जा रहे हैं-

कमलनाथ जी की कुंडली मीन लग्न और कन्या राशि

कमलनाथ जी की कुंडली मीन लग्न और कन्या राशि की है। इनकी कुंडली के पराक्रम भाव में राहु, पंचम भाव में शनि है, सप्तम में चंद्र है। अष्टम भाव में गुरु, वॄश्चिक राशि नवम भाव में शुक्र, मंगल, सूर्य, बुध और केतु स्थित है। इस समय इनकी शनि महादशा में गुरु अंतर्द्शा प्रभावी है।

महादशानाथ शनि इनके मनोकामनापूर्ति भाव अर्थात एकादश भाव के स्वामी है। और पंचम भाव से सप्तम दॄष्टि से अपने भाव को बल प्रदान कर रहे हैं। अंतर्दशानाथ गुरु दशमेश है, सत्ता भाव के स्वामी है और इनका अष्टम भाव में स्थित होना, इनके कार्यकाल में बार बार बाधाएं और दिक्कतें दे रहा है।

पंचमस्थ शनि का एकादश भाव, द्वितीय भाव और दशम से दशम (सप्तम) भाव को देखना इन्हें इस पद तक लेकर आया। वर्तमान गोचर में शनि इनके कर्म भाव पर गोचर कर रहे हैं और केतु के साथ वक्री अवस्था में है। गुरु भी वक्री अवस्था में वृश्चिक राशि पर गोचरस्थ है।

गुरु का गोचर इनके स्वास्थ्य में कमी और तनाव को दर्शा रहा है। शनि का गोचर इनके कुर्सी, पद और स्थिति में अस्थिरता दे रहा है। चतुर्थ भाव अर्थात पद भाव पर राहु-मंगल एक साथ गोचर कर रहे हैं। यह गोचर ग्रह स्थिति इनकी परेशानी बढ़ा रही हैं परन्तु दशमेश का अंतर और गुरु का लग्न भाव को देखना इनकी कुर्सी को जाने नहीं देगा।

इसलिए स्थिति कुछ समय के लिए खराब होकर यथावत ठीक हो जाएगी। 5 नवम्बर 2019 से गुरु धनु राशि में वापसी करेंगे और शनि से युति करेंगे। यह समय कुछ तनाव का रहेगा। 30 मार्च 2020 को गुरु और शनि का मकर राशि में एक साथ गोचर होना, इनके लिए सुखद और उन्नतिकारक रहेगा।

आचार्य रेखा कल्पदेव, ज्योतिष सलाहकार : 8178677715
Gmail : rekhakalpdev@gmail.com

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