कमर छठ 2018: जानें पूजा की विधि एवं महत्व

कृष्ण पक्ष षष्ठी को मनाया जाता है हरछठ व्रत

आज भाद्रपद कृष्ण पक्ष छठ को समूचे भारत में कमर छठ का पर्व उत्साह पूर्ण माहौल में मनाया जा रहा। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठपुत्र कार्तिकेय के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

भाद्र मास के कृष्ण पक्ष षष्ठी को हरछठ व्रत मनाया जाता है । इस व्रत को हलषष्ठी, हलछठ , हरछठ व्रत, चंदन छठ , तिनछठी , तिन्नी छठ, ललही छठ , कमर छठ , या खमर छठ भी कहा जाता है। यह व्रत स्त्रियाँ अपने संतान की दीर्घ आयु के लिये करती है। इस दिन हलषष्ठी माता की पूजा की जाती है।

भाद्र मास के कृष्ण पक्ष षष्ठी को भगवान कृष्ण जी के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था। यह व्रत बलराम जी के जन्म के उपलक्ष्य में भी मनाया जाता है। बलराम जी का मुख्य शस्त्र हल है इसलिये इस व्रत को हलषष्ठी कहते हैं।

इस व्रत में हल से जुते हुए अनाज व सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता है। इसलिए महिलाएं इस दिन तालाब में उगे पसही/तिन्नी का चावल/पचहर के चावल खाकर व्रत रखती हैं। इस व्रत में गाय का दूध व दही इस्तेमाल में नहीं लाया जाता है इस दिन महिलाएं भैंस का दूध ,घी व दही इस्तेमाल करती है|

भाद्र कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल षष्ठी या हर छठ व्रत और पूजन किया जाता है। यह व्रत वही स्त्रियाँ करती हैं जिनको पुत्र होता है। जिनको केवल पुत्री होती है, वह यह व्रत नहीं करती। यह व्रत पुत्र के दीर्घायु के लिये किया जाता है।

इस व्रत में हल के द्वारा जोता-बोया अन्न या कोई फल नहीं खाया जाता। क्योंकि इस तिथि को ही हलधर बलराम जी का जन्म हुआ था और बलराम जी का शस्त्र हल है। इस व्रत में गाय का दूध, दही या घी का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

इस व्रत में केवल भैंस के दूध, दही का उपयोग किया जाता है। इस व्रत में महुआ के दातुन से दाँत साफ किया जाता है। शाम के समय पूजा के लिये मालिन हरछ्ट बनाकर लाती है। हरछठ में झरबेरी, कास (कुश) और पलास तीनों की एक-एक डालियाँ एक साथ बँधी होती है।

जमीन को लीपकर वहाँ पर चौक बनाया जाता है। उसके बाद हरछ्ठ को वहीं पर लगा देते हैं । सबसे पहले कच्चे जनेउ का सूत हरछठ को पहनाते हैं।

हलषष्ठी / हरछठ (तिनछठी) व्रत पूजन सामग्री:-

सतनजा (गेहूँ, चना, जुआर, अरहर, धान, मूँग, मक्का), ∗ दूध (भैंस का), ∗ घी (भैंस का), ∗ दही (भैंस का) ∗ मक्खन (भैंस का), ∗ सिंदूर, ∗ जनेउ (कच्चे सूत का), ∗ धूप, ∗ मिट्टी का दीपक, ∗ लाल चंदन, ∗ अक्षत, ∗ नैवेद्य,

∗ भुना हुआ महुआ, ∗ धान का लावा, ∗ भुना हुआ चना, ∗ हरछठ (झरबेरी, कुश (कास) और पलास की डालियों को एक साथ बाँध कर हरछठ बना लें), ∗ महुआ का पत्ता, ∗ कुश, ∗ महुआ का डाल (दातुन के लिये),

∗ तालाब में उगा हुआ चावल (पसही/तिन्नी का चावल/पचहर चावल – तिन्नी का धान तालाब में छींटा जाता है और यूं ही उपज जाता है।), ∗ मिट्टी का बर्तन (जितने पुत्र हों, उतने), ∗ नया कपड़ा, ∗ हल्दी पाउडर

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