छत्तीसगढ़

कमार दम्पति ने उच्च शिक्षा हासिल कर लिखी विकास की नई इबारत

स्नातकोत्तर की शिक्षा लेकर समाज को जागरूक करने पति-पत्नी कर रहे लगातार प्रयास

– राजशेखर नायर

धमतरी: विशेष पिछड़ी जनजाति कमार से ताल्लुक रखने वाले गजेसिंह ने स्नातकोत्तर तक की उपाधि हासिल कर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई इबारत लिखी है। इतना ही नहीं, अपने समाज के लोगों को नशामुक्त करने व शिक्षा से जोड़ने मजरा-टोला, मोहल्लों में लगातार बैठकें लेकर उन्हें जागरूक करने का सतत् प्रयास कर रहे हैं। यहां तक कि अपने बच्चों को ऊंची तालीम देने उन्हें महानगरों में पढ़ा रहे हैं।

आदिवासी बाहुल्य विकासखण्ड नगरी की ग्राम पंचायत गट्टासिल्ली के निवासी गजेसिंह और उनकी पत्नी उर्मिला मरकाम दोनों हिन्दी विषय में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल पूरी कर ली है। सम्भवतः कमार जनजाति में यह उपाधि धारण करने वाली यह प्रदेश की पहली दम्पति है, जिसने समाज के पारम्परिक कार्यों को छोड़कर अभावग्रस्त जीवन में भी शिक्षा प्राप्त कर अपने पैरों पर खड़ी हुई है। उनके परिश्रम का प्रतिफल रहा कि अविभाजित रायपुर जिले के तत्कालीन कलेक्टर डी.पी. तिवारी ने विशेष भर्ती नियम के तहत गजेसिंह 1996 से सहायक शिक्षक के नियमित पर नियुक्ति प्रदान की। शिक्षक बनने के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए स्नातकोत्तर तक की उपाधि प्राप्त की।

वे अभी नगरी विकासखण्ड के कमार बाहुल्य ग्राम बिरनासिल्ली के प्री मैट्रिक छात्रावास में अधीक्षक के तौर पर सेवारत हैं। नौकरी से पहले उन्होंने जीवनयापन के लिए धमतरी की राइसमिल में दिहाड़ी मजदूर और रायपुर में कुली का भी काम किया। इसी दौरान तरह-तरह के लोगों से मेल-मुलाकात में पता चला कि अच्छा जीवन स्तर और अच्छे संस्कार व सभ्यता सिर्फ शिक्षा से ही हासिल की जा सकती है। तब से पीछे मुड़कर देखे बिना वे आगे बढ़ते गए।

सरकारी नौकरी प्राप्त करने के बाद उन्हें शिक्षित पत्नी की दरकार थी, जो कि उनके समुदाय में मिलना मुमकिन नहीं था। ऐसे में सामाजिक मर्यादाओं को लांघकर गैर कमार समुदाय (गोंडवाना समाज) की शिक्षित युवती उर्मिला से वर्ष 1997 में उन्होंने ब्याह रचाया। उर्मिला भी नगरी के प्री मैट्रिक अनुसूचित जनजाति छात्रावास में अधीक्षक (मूल पदस्थापना शिक्षक एल.बी.) के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन कर रही हैं।

खुद शिक्षित व आत्मनिर्भर होकर अपने समुदाय को प्रेरित व प्रोत्साहित करने के लिए गजेसिंह व उर्मिला छुट्टियों के कमार बाहुल्य मजरा-टोलों में जाकर समुदाय के सदस्यों को लगातार जागरूक करने, शिक्षा का मानव जीवन में महत्व समझाने के साथ-साथ मदिरापान की पारम्परिक बुराई को खत्म करने प्रयासरत हैं। इस शिक्षित दम्पति का सफरनामा यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि अपने बच्चों को भी अच्छी और ऊंची तालीम देने में कोई कोरकसर नहीं छोड़ी। गजेसिंह की बड़ी संतान 19 वर्षीय पुत्र खिमांशु मरकाम कांकेर में बीएससी (कृषि) में प्रथम वर्ष की परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण कर ली है,

वहीं बिटिया कु. तनिशा का हाल ही में रायपुर के शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय में दाखिला कराया है, जहां पर वह हाॅस्टल में रहकर डिग्री की पढ़ाई जारी रखेंगी। उन्होंने बताया कि उनकी पुत्री गणित, भौतिकी व रसायन विषय के साथ कक्षा बारहवीं में 73 प्रतिशत अंक लेकर उत्तीर्ण हुई है और आगे संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा देकर देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनना चाहती हैं। इस प्रकार गजेसिंह ने प्रतिकूल परिस्थितियों में स्वयं शिक्षक होकर न सिर्फ अपने विद्यार्थी, परिवार को, बल्कि अपने समाज के लोगों को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित कर रहे हैं।

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