उत्तर प्रदेश

हैलट अस्पताल में ढोंगी बाबाओं और तांत्रिकों से निपटेगी डॉक्टर सेना

कानपुर देहात के अकबरपुर से रेबीज पीड़ित सोनू (35) को इलाज के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संक्रामक रोग अस्पताल लाया गया था। इलाज शुरू होता, उससे पहले ही पानी वाला बाबा नाम से जाना जाने वाला एक तांत्रिक ने परिवार को झांसे में ले लिया। दावा किया कि पांच दिन में बीमारी ठीक कर देगा। इस पर परिजनों से 10 हजार रुपये में सौदा तय हो गया। घर वाले सोनू को लेकर अस्पताल से चले गए।

यही नहीं करीब तीन महीने पहले बुन्देलखण्ड के बांदा से सांप के काटने से बेहोश हुए राकेश नाम के युवक को इलाज के लिए हैलट अस्पताल लाया गया था। रात में पहुंचे उसके परिजनों को तांत्रिकों ने अपने झांसे में ले लिया। बहकावे में अाए परिजन जैसे राकेश को अस्पताल से ले गए उसकी मौत हो गई। इसी प्रकार एचअाईवी संक्रमण के शिकार मरीज इन तांत्रिकों अौर ढोंगी बाबाअों के फेर में अासानी से फंस रहे हैं। आए दिन अाने वाले एेसे मामलों को लेकर जीएसवीएम प्रशासन की नींद उड़ गई है।

मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में एेसे सर्वाधिक मामले हैलट अस्पताल में सामने अाए हैं। अब इन ढोंगी बाबाओं और कथित तांत्रिकों से मरीजों को बचाने के लिए हैलट अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टर सेना का गठन किया है। डॉक्टरों की इस सेना में मेडिकल सुप्रिंटेंडेंट स्तर के एक चिकित्सा अधिकारी, मैटर्न, स्टाफ नर्स, वार्ड के पैरामेडिकल स्टाफ और सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं। अस्पताल परिसर में तांत्रिकों के संबंध में सूचना मिलते ही यह सेना तत्काल कार्रवाई करेगी। आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया जाएगा।

इसलिए उठाना पड़ा कदम
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध सभी अस्पतालों में ढोंगी बाबाओं और तांत्रिकों की सक्रियता से चिकित्सा और प्रशासनिक अधिकारी हलकान हैं। रोज मरीज लामा (डॉक्टर की सलाह के बगैर चले जाना) हो रहे हैं। विभागाध्यक्षों की गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर इन्हें साथ ले जाने में दलालों, तांत्रिकों की अहम भूमिका सामने आई है। अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक प्रो. आरसी गुप्ता कहते हैं कि संवेदनशील वार्डों में कड़ी निगरानी हो रही है। किसी भी मरीज को डॉक्टर की सलाह के बगैर दूसरे अस्पताल या अन्य जगहों पर नहीं जाने दिया जाएगा। अस्पताल में तांत्रिकों को देखते ही पुलिस को सूचित किए जाने की हिदायत वार्डों में दी गई है। आम लोगों से भी इस तरह की जागरूकता की अपेक्षा है। जो लोग बगैर डॉक्टरों को सूचना दिए या रेफर या डिस्चार्ज के मरीज ले जाते हैं, उनकी रिपोर्ट पुलिस को दी जा रही।

इमरजेंसी से वार्ड तक फैले
हैलट अस्पताल के एक सीनियर प्रोफेसर का कहना है कि इमरजेंसी से वार्ड तक किसी न किसी वेष में तांत्रिक अपना जाल बिछाए हैं। वे ऐसे मरीजों को फंसाते हैं जो बेहद लाचार हैं या उनका इलाज संभव नहीं है। तांत्रिक उन्हें दो-तीन दिन भरमाते हैं। पूरी तरह आश्वस्त कर देते हैं कि बीमारी का इलाज नहीं है या यहां मरीज ठीक नहीं हो पाएगा। प्रोफेसर के मुताबिक इनकी सबसे अधिक सक्रियता संक्रामक रोग अस्पताल में रैबीज पीड़ित मरीजों के तीमारदारों के साथ दिखी है। ये उन्हें तंत्रमंत्र के चक्कर में फांस कर जमकर पैसा वसूलते हैं। इसके अलावा सांप काटने वाले मरीज, एचआईवी और ऐसे मरीज जो दिमागी बुखार से पीड़ित होकर अर्द्धबेहोशी या बेहोशी की हालत में आते हैं, उन्हें भी फंसा लेते हैं। अब टास्क फोर्स ऐसे मरीजों पर कड़ी निगाह रखेगा। उनकी मॉनीटरिंग होगी।

अस्पताल ने बढ़ाई सतर्कता
बाल रोग विभाग के बाहर दो गार्डों की ड्यूटी लगाई गई है। वह डिस्चार्ज स्लिप के बिना बच्चे को बाहर नहीं जाने देते हैं। पैथोलॉजी-रेडियोलॉजी जांच के लिए यहां तक कि ब्लड बैंक तक जूनियर डॉक्टर साथ जाते हैं। एंटी स्नेक वेनम की खरीदारी कर ली गई है। मरीज को बाहर से लाने की जरूरत नहीं है। किसी को सांप ने काटा है, तो उसे आईसीयू में ही भर्ती किया जा रहा है।

हैलट अस्पताल का हाल

03 विभाग मेडिसिन, बाल रोग व आईडीएच में सक्रिय हैं तांत्रिक
50-60 मरीज इन तीनों विभाग में भर्ती होते हैं प्रतिदिन
10-12 मरीज प्रतिदिन गायब हो रहे हैं इन विभागों से

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कानपुर देहात
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