कर्नाटक पुलिस ने 290 करोड़ रुपये से ज्यादा के धोखाधड़ी का किया पर्दाफाश

इन्वेस्टमेंट पर ज्यादा ब्याज का लालच देकर लोगों से मोबाइल ऐप के जरिए की गई ठगी

नई दिल्ली:इन्वेस्टमेंट पर ज्यादा ब्याज का लालच देकर लोगों से मोबाइल ऐप के जरिए ठगी करने के मामले में कर्नाटक पुलिस ने दो चीनी नागरिक समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया है.

पुलिस ने बताया कि शेल कंपनियों के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया. ये मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है. इस मामले का संदिग्ध आरोपी केरल का एक कारोबारी है, जिसके चीनी ‘हवाला’ कारोबारियों से संबंध हैं.

सीआईडी की साइबर क्राइम डिविजन ने बताया कि इस मामले में दो चीनी नागरिक, दो तिब्बती और 5 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है, जो इन शेल कंपनियों में डायरेक्ट के तौर पर काम कर रहे थे. कुछ और आरोपियों की तलाश की जा रही है.

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने ‘Powerbank’ नाम से एक ऐप बनाई थी, जो गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद थी. इस ऐप के जरिए लोगों को इन्वेस्टमेंट पर ज्यादा ब्याज का लालच दिया जाता था.

लोगों ने ज्यादा ब्याज के चक्कर में इस ऐप में इन्वेस्ट करना शुरू किया, लेकिन आरोपियों ने न तो ब्याज दिया और न ही उनकी रकम लौटाई. इस मामले में आईटी एक्ट और आईपीसी की धारा-420 (धोखाधड़ी) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है.

साइबर पुलिस की ओर से एक प्रेस रिलीज जारी कर बताया गया कि केरल के एक कारोबारी अनीस अहमद को इस पूरी जालसाजी का मास्टरमाइंड माना जा रहा है. जांद के दौरान पता चला कि अनीस के चीनी हवाला ऑपरेटरों से करीबी संबध थे.

उसने बुल फिंट टेक्नोलॉजीस, एचएंडएस वेंचर्स और क्लिफोर्ड वेंटर्स नाम से शेल कंपनियां खोलीं और ठगी गई रकम को यहां ट्रांसफर कर दिया. पुलिस के मुताबिक, अनीस ने चीनी महिला से ही शादी की है और उसकी पढ़ाई भी चीन में ही हुई है.

साइबर क्राइम डिविजन का कहना है कि आरोपी ने लोगों से इन्वेस्टमेंट पर ज्यादा रिटर्न का वादा किया था और इसके लिए पॉवर बैंक समेत कई ऐप बनाई गईं. जिस दिन अनीस अहमद ने ज्यादा रिटर्न का वादा किया था, उस दिन इन्वेस्टमेंट में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई.

इसके बाद गूगल प्ले स्टोर और दूसरी वेबसाइट से ऐसे ऐप्स को हटा दिया गया. जांच में पता चला कि इस पूरी धोखाधड़ी में आरोपियों के बैंक अकाउंट में 290 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम आई. हालांकि, इनमें से ज्यादातर रकम क्राइम ब्रांच ने फ्रीज कर ली है.

प्रेस रिलीज में बताया गया है कि भारत में चीनी हैंडलर्स के पास बड़ी संख्या में शेल कंपनियां और बैंक अकाउंट हैं. चीनी नागरिकों की ओर से लालच दिया जाता है, जिसके जाल में कई निर्दोष भारतीय और तिब्बती नागरिक फंस जाते हैं और उनके लिए शेल कंपनियां और बैंक अकाउंट खोल लेते हैं.

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