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पिछले 10 सालों में सबसे सुस्त दीपावली, कारोबार में 40% की गिरावट

नई दिल्ली. दीपावली का त्यौहार आमतौर पर कारोबार और व्यापार जगत के लिए उत्साहवर्धक रहता आया है पर असंगठित क्षेत्र के व्यापारियों के एक प्रमुख का कहना है कि इस साल नोटबंदी तथा जीएसटी के कारण यह तस्वीर बदली हुई थी. संगठन का दावा है कि इस दीपावली बिक्री में पिछले साल की तुलना में 40 प्रतिशत की गिरावट आयी और यह पिछले दस सालों की सबसे सुस्त दीपावली मानी जा रही है. खुदरा कारोबारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने शनिवार (21 अक्टूबर) को जारी बयान में कहा कि देश में सालाना करीब 40 लाख करोड़ रुपये का खुदरा कारोबार होता है. इसमें संगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी महज पांच प्रतिशत है जबकि शेष 95 प्रतिशत योगदान असंगठित क्षेत्र का है.

दीपावली त्यौहार के दस दिन पहले से शुरू होने वाली त्यौहारी बिक्री पिछले सालों में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की रही है. इस साल यह 40 प्रतिशत नीचे गिर गयी और इस दृष्टि से यह ‘पिछले दस सालों की सबसे खराब दीपावली रही.’ कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि बाजारों में उपभोक्ताओं की कम उपस्थिति, सीमित खर्च आदि इस दीपावली कारोबार कम रहने के मुख्य कारण हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी के बाद अस्थिर बाजार तथा माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था की दिक्कतों ने बाजार में संशय का माहौल तैयार किया जिसने उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों की धारणा प्रभावित की.

रेडीमेड कपड़े, उपहार के सामान, रसोई के सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद, एफएमसीजी वस्तुएं, घड़ियां, बैग-ट्रॉली, घर की साज-सज्जा, सुखे मेवे, मिठाइयां, नमकीन, फर्निचर, लाइट-बल्ब आदि चीजें दीपावली के दौरान मुख्य तौर पर खरीदी जाती हैं. कैट ने कहा कि व्यापारियों की उम्मीदें अब विवाह के सीजन पर लगी हुई हैं.

उद्योग एवं वाणिज्य संगठन एसोचैम ने पटाखे छोड़ने से प्रदूषण बढ़ने के मद्देनजर शनिवार (21 अक्टूबर) को कहा कि पर्यावरण की स्वच्छता अकेले उच्चतम न्यायालय की जिम्मेदारी नहीं है. उसने कहा कि यह केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सामाजिक संगठनों और लोगों का साझा उत्तरदायित्व है. एसोचैम ने कहा कि पटाखों की बिक्री पर उच्चतम न्यायालय द्वारा लगाये प्रतिबंध का केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, दिल्ली सरकार और उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा की राज्य सरकारों को पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पालन कराना चाहिए था.

एक सर्वेक्षण के अनुसार, एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध के बाद भी दीपावली की रात राजधानी में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था. यह उस रात सुरक्षित सीमा से पांच गुना अधिक स्तर पर पहुंच गया था. उद्योग संगठन के महासचिव डी एस रावत ने कहा, ‘व्यापारियों तथा उत्पादकों के आर्थिक हित इसमें निहित थे लेकिन पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध के उच्चतम न्यायालय के आदेश का केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, दिल्ली सरकार और उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा की राज्य सरकारों को पालन कराना चाहिए था.

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