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पी चिदंबरम के बेटे पर CBI ने लगाए गंभीर आरोप, कार्ति की बढ़ सकती है मुश्किलें

केन्द्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम ने इस साल मई, जून और जुलाई में अपनी विदेश यात्रा के दौरान उनके खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामले से संबंधित साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की थी. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष जांच एजेन्सी ने कहा कि कार्ति के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी करने की आवश्यकता पडी क्योंकि उनमें साक्ष्य के साथ छेडछाड करने की ‘क्षमता’ थी और उन्होंने अपनी विदेश यात्रा के दौरान ऐसा किया था.

जांच ब्यूरो ने वित्त् मंत्री के रूप में पी चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में आईएनएक्स मीडिया को विदेश से 305 करोड रुपएकी धनराशि प्राप्त करने के लिये विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड की मंजूरी में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में इस साल 15 मई को कार्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी.

अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा, ‘लुक आउट सर्कुलर के दो उद्देश्य थे. पहला , जांच को देखते हुये वह (कार्ति) कहीं कानून से दूर न हो जायें और दूसरा, वह भारत से बाहर साक्ष्य से छेडछाड कर सकते हैं.’ मेहता ने कहा, ‘मैं यह दिखाऊंगा कि वह (कार्ति) साक्ष्य के साथ छेडछाड करने में सक्षम हैं. वह 13 से 18 मई और जून के दूसरे सप्ताह से जुलाई के दूसरे सप्ताह के दौरान विदेश गये और उन्होंने साक्ष्य के साथ छेडछाड की. मैं इसे न्यायोचित ठहराऊंगा.’ उन्होंने कहा कि समकालीन रिकार्ड इस बात को दर्शाता है. ये दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 161 के तहत बयान नहीं है जिन्हें किसी पर दबाव डालकर प्राप्त किया जा सकता है. यह समकालीन सरकारी रिकार्ड है.

मेहता ने सीलबंद लिफाफे में कुछ दस्तावेज पेश करने की न्यायालय से अनुमति मांगी जिसका कार्ति की ओरा से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पुरजोर विरोध किया. सिब्बल ने सीलबंद लिफाफे में चुनिन्दा दस्तावेज रिकार्ड पर पेश करने के जांच ब्यूरो की कवायद के तरीके पर भी सवाल उठाये.

इस बीच, मेहता ने न्यायालय से कहा कि वह इस बारे में निर्देश प्राप्त करेंगे कि क्या मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ से उसके समक्ष लंबित मुख्य मामले का फैसला करने का अनुरोध किया जा सकता है. इसके बाद न्यायालय ने आगे सुनवाई के लिये इस मामले को नौ अक्तूबर के लिये सूचीबद्ध कर दिया.

जांच ब्यूरो ने पिछले महीने ही शीर्ष अदालत से कहा था कि कार्ति को विदेश जाने से रोका गया क्योंकि वह विदेशी बैंकों में अनेक खातों को कथित रूप से बंद कर रहे थे. कार्ति के वकील ने जांच ब्यूरो की इस दलील का पुरजोर विरोध किया था. शीर्ष अदालत कथित भ्रष्टाचार के मामले में कार्ति के खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर पर रोक लगाने के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली जांच ब्यूरो की अपील पर सुनवाई कर रही है.

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