करवा चौथ: सुहागिनें अपने पति के लिए रखती है व्रत, जाने पूरी विधि

शादीशुदा महिलाओं का बड़ा त्योहार

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में करवा चौथ बहुत बड़ा त्योहार है, खासकर शादीशुदा महिलाओं के लिए। इस दिन सभी सुहागिने अपने पति के लिए करवा चौथ का व्रत करती हैं। घरों में पकवान बनते हैं।

शादीशुदा महिलाओं का बड़ा त्योहार होता है। इस दिन सभी महिलाएं अपने पति की लंबी की उम्र के लिए पूरे दिन भूखी-प्यासी रहकर व्रत करती हैं। 16 श्रृंगार करती हैं और हाथों में मेहंदी लगाती हैं।

सींक: मां करवा की शक्ति का प्रतीक

करवा चौथ के व्रत की पूजा में कथा सुनते समय और पूजा करते समय सींक जरूर रखें। ये सींक मां करवा की उस शक्ति का प्रतीक हैं, जिसके बल पर उन्होंने यमराज के सहयोगी भगवान चित्रगुप्त के खाते के पन्नों को उड़ा दिया था।

करवा का महत्‍व

माता का नाम करवा था। साथ ही यह करवा उस नदी का प्रतीक है, जिसमें मां करवा के पति का पैर मगरमच्छ ने पकड़ लिया था। आजकल बाजार में पूजा के लिए आपको बेहर खूबसूरत करवे मिल जाते हैं।

करवा माता की तस्वीर

करवा माता की तस्वीर अन्य देवियों की तुलना में बहुत अलग होती है। इनकी तस्वीर में ही भारतीय पुरातन संस्कृति और जीवन की झलक मिलती है। चंद्रमा और सूरज की उपस्थिति उनके महत्व का वर्णन करती है।

दीपक के बिना पूजा नहीं होती पूरी

हिंदू धर्म में कोई भी पूजा दीपक के बिना पूरी नहीं होती। इसलिए भी दीपक जरूरी है क्योंकि यह हमारे ध्यान को केंद्रित कर एकाग्रता बढ़ाता है। साथ ही इस पूजा में दीपक की लौ, जीवन ज्योति का प्रतीक होती है।

छलनी है पति को देखने को लिए

व्रत की पूजा के बाद महिलाएं छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसका कारण करवा चौथ में सुनाई जानेवाली वीरवती की कथा से जुड़ा है। जैसे, अपनी बहन के प्रेम में वीरवती के भाइयों ने छलनी से चांद का प्रतिविंब बनाया था और उसके पति के जीवन पर संकट आ गया था, वैसे कभी कोई हमें छल न सके।

लोटे का यह है अर्थ

चंद्रदेव को अर्घ्य देने के लिए जरूरी होता है लोटा। पूजा के दौरान लोटे में जल भरकर रखते हैं। यह जल चंद्रमा को हमारे भाव समर्पित करने का एक माध्यम है। वैसे भी हर पूजा में कलश को गणेशजी के रूप में स्‍थापित किया जाता है।

थाली है शुभ

पूजा की सामग्री, दीये, फल और जल से भरा लोटा रखने के लिए जरूरी होती है एक थाली की। इसी में दीपक रखकर मां करवा की आरती उतारते हैं। सच्चे मन से माता से आशीर्वाद मांगें।

रात्रि को जब चन्द्रमा निकल आये, तब चन्द्रमा को अर्घ्य देकर भोजन करें। इस वर्ष यह पर्व बहस्पतिवार 17 अक्टूबर, 2019 ई० को मनाया जाएगा। व्रती महिलाएं अलग-अलग क्षेत्रों में चांद निकलने के समय अनुसार चंद्रमा के दर्शन करके पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगी। दिल्ली में 8 बजकर 20 मिनट पर चंद्रोदय का समय है। -:आचार्य कृष्णदत्त शर्मा

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