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पंडितों के बिना कश्मीर अधूरा, हम चाहते हैं वे लौटें : फारुक अब्दुल्ला

पंडितों के बिना कश्मीर अधूरा, हम चाहते हैं वे लौटें : फारुक अब्दुल्ला

श्रीनगर: विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि पंडितों के बगैर कश्मीर अधूरा है और उनकी पार्टी चाहती है कि वे लौटें. हालांकि वह घाटी में उनके लिए अलग होमलैंड बनाने के विचार के खिलाफ हैं. पंद्रह साल के अंतराल के बाद यहां शेरए-कश्मीर क्रिक्रेट स्टेडियम में नेशनल कांफ्रेंस के प्रतिनिधि सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित राज्य का हिस्सा हैं तथा उनकी पार्टी घाटी में उन्हें वापस लाने के लिए कोशिश करेगी.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपको बताऊं कि उन्हें कश्मीर लौटना है, जब तक वे नहीं लौटते कश्मीर अधूरा है. वे इस राज्य का हिस्सा हैं और हम उन्हें वापस लायेंगे. मैं (पंडितों के लिए) यह होमलैंड स्वीकार नहीं करुंगा . उन्हें यहां मुसलमानों के साथ रहना है और मुसलमान उनकी रक्षा करेंगे. ’’इससे पहले पार्टी ने कश्मीरी पंडितों की वापसी समेत विविध मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किये. उन्होंने कहा, ‘‘हमारे कश्मीरी पंडित भाइयों और बहनों का त्रासदपूर्ण बहिर्गमन जम्मू कश्मीर के इतिहास में एक काला अध्याय है और राज्य के हर जागरुक नागरिक के लिए पीड़ा और दर्द का विषय है. उनकी मर्यादापूर्ण वापसी एवं पुनर्वास अधूरा है तथा इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है.’’

बता दें कि रविवार को ही फारुक अब्दुल्ला नेशनल कांफ्रेंस के एक बार फिर से अध्यक्ष निर्वाचित हुए. वह पहली बार वर्ष 1981 में पार्टी अध्यक्ष चुने गए थे और वर्ष 2002 से 2009 के अलावा लगातार इस पद पर बने रहे. वर्ष 2002 में इसी स्टेडियम में हुए ऐसे ही समारोह में फारुक अब्दुल्ला ने अपने बेटे उमर अब्दुल्ला को पार्टी की कमान सौंपी थी जो उस समय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में विदेश राज्यमंत्री थे. उमर अब्दुल्ला ने वर्ष 2009 में राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. जनवरी 2009 में फारुक अब्दुल्ला को फिर से पार्टी अध्यक्ष चुना गया और वह तब से इस पद पर बने हुए हैं.

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