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कैट ने WhatsApp और Facebook के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका…!

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने आज वाट्सऐप (WhatsApp) और फेसबुक (Facebook) को उसकी नई गोपनीयता नीति को ख़ारिज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है.

नई दिल्ली: कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने आज वाट्सऐप (WhatsApp) और फेसबुक (Facebook) को उसकी नई गोपनीयता नीति को ख़ारिज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है. कैट ने अपनी याचिका में कहा है कि वाट्सऐप की प्रस्तावित निजता नीति भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिकों के विभिन्न मौलिक अधिकारों पर अतिक्रमण कर रहा है. कैट ने कहा कि वाट्सऐप जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों को संचालित करने के लिए केंद्र सरकार को दिशा-निर्देश तैयार करने चाहिए और ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो नागरिकों और व्यवसायों की गोपनीयता की रक्षा करें.

इस याचिका में विशेष रूप से यूरोपीय संघ के देशों और भारत में WhatsApp की गोपनीयता नीति में पूरी तरह अंतर का हवाला दिया गया है. याचिका में कहा गया, भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा का इस तरह की बड़ी तकनीकी कंपनियों द्वारा दुरुपयोग कैसे किया जा सकता है. यह याचिका एडवोकेट अबीर रॉय द्वारा तैयार की गई है, जिसे आज एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड विवेक नारायण शर्मा द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर किया है.

CAIT ने धोखे से डेटा इकट्ठा करने का लगाया आरोप

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि WhatsApp ने ‘माई वे या हाई वे ’ के दृष्टिकोण को अपनाया है, जो मनमाना, अनुचित, असंवैधानिक है और इसे भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में स्वीकार नहीं किया जा सकता है. व्हाट्सएप व्यक्तिगत उपयोगकर्ता के डेटा को धोखे से इकट्ठा कर रहा है. भारत में अपने लॉन्च के समय, वाट्सऐप ने उपयोगकर्ताओं को डेटा और मजबूत गोपनीयता सिद्धांतों को साझा न करने के वादे के आधार पर आकर्षित किया.

2014 में भी किए थे बदलाव

2014 में ही फेसबुक द्वारा वाट्सऐप के अधिग्रहण के बाद, जब उपयोगकर्ताओं ने अपने डेटा की गोपनीयता पर संदेह करना शुरू कर दिया था. क्योंकि उन्हें भय था कि उनके व्यक्तिगत डेटा को फेसबुक के साथ साझा किया जाएगा. उस समय वाट्सऐप ने वादा किया कि अधिग्रहण के बाद गोपनीयता नीति में कुछ भी नहीं बदलेगा. हालांकि, अगस्त 2016 में, वाट्सऐप अपने वादे से पीछे हट गया और एक नई गोपनीयता नीति पेश की जिसमें उसने अपने उपयोगकर्ताओं के अधिकारों से गंभीर रूप से समझौता किया और उपयोगकर्ताओं के गोपनीयता अधिकारों को पूरी तरह से कमजोर कर दिया.

नई गोपनीयता नीति के तहत, इसने वाणिज्यिक विज्ञापन और मार्केटिंग के लिए फेसबुक और इसकी सभी समूह कंपनियों के साथ व्यक्तिगत डेटा साझा किया. तब से कंपनी अपनी नीतियों में बदलाव कर रही है, ताकि सूचनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला को इकट्ठा और संसाधित किया जा सके, और तीसरे पक्ष को डाटा दिया जा सके.

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