कठुआ: अब्दुल्ला और मुफ्ती पर बरसे PM, बोले-कश्मीर को नोचा- निचोड़ा…विदाई जरूरी

कठुआ। कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए को खत्म करने के चुनावी वादे को लेकर बीजेपी पर लगातार हमलावर पीडीपी और नैशनल कॉन्फ्रेंस पर पीएम मोदी ने रविवार को कठुआ की चुनावी रैली में बड़ा पलटवार किया। मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की तीन-तीन पीढ़ियों को इन दो परिवारों ने तबाह कर नोचा और निचोड़ा है।

उन्होंने वोटरों से दोनों दलों को जम्मू-कश्मीर से उखाड़ फेंकने की अपील की। मोदी ने इस दौरान कांग्रेस को भी निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि वह पाक परस्त अलगाववादियों को लेकर नरम है। पीएम ने दावा किया कि इस बार 2014 से बड़ी लहर है और बीजेपी को कांग्रेस से तीन गुनी ज्यादा सीटें मिलेंगी।

कठुआ रैली में मोदी खासतौर पर मुफ्ती और अब्दुल्ला परिवार पर काफी आक्रामक नजर आए। नैशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी को निशाने पर लेते हुए पीएम ने कहा, ‘मुफ्ती और अब्दुल्ला परिवार से मैं कहना चाहता हूं… यह मोदी है, य ना डरता है, ना झुकता है और ना ही बिकता है।

इस दौरान पीएम ने लोगों से कहा कि सूबे की बेहतरी के लिए इन दोनों परिवारों की विदाई जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘ये दो परिवार पूरे कुनबे को मैदान में उतार दें, चाचा, मामा, भाई, भतीजा, भांजा, साला… जितनी गालियां मोदी को देनी हैं, दे दो। पर, इस देश के टुकड़े नहीं कर पाओगे।’

​कमजोर नहीं, यह है भारत के चुनाव आयोग की ताकत

चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन से लेकर देश में चुनाव करवाने तक की जिम्मेदारी भारत के चुनाव आयोग की है। चुनाव आयोग ही राजनीतिक दलों को मान्यता देता है और उनको चुनाव चिह्न प्रदान करता है। मतदाता सूची भी भारत का चुनाव आयोग ही तैयार करवाता है।

आयोग की संरचना

चुनाव आयोग में तीन सदस्य होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा दो और चुनाव आयुक्त होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 साल या 65 वर्ष की उम्र, दोनों में से जो पहले हो, की आयु तक होता है। अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल 6 साल या 62 वर्ष की उम्र, दोनों से जो पहले हो, तक होता है।

ताकत

भारत का चुनाव आयोग एक संवैधानिक और स्वायत्त संस्था है, जिस तरह भारत का सर्वोच्च न्यायालय है। सरकार इसके कामकाज में दखल नहीं दे सकती है या किसी तरह इसके कामकाज को प्रभावित नहीं कर सकती है। मुख्य चुनाव आयुक्त का दर्जा देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के बराबर होता है। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त को आसानी से नहीं हटाया जा सकता है। उनको महाभियोग की प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है।

​कमजोर नहीं, यह है भारत के चुनाव आयोग की ताकत

चुनाव आयोग सरकार को भी निर्देश जारी कर सकता है। चुनाव संबंधित नियमों का उल्लंघन करने पर चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों और उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करता है कि सत्ताधारी पार्टी सरकारी ताकतों का दुरुपयोग नहीं करे। चुनाव आयोग की ताकत इस बात से भी समझ सकते हैं कि चुनाव के दौरान हर सरकारी कर्मचारी चुनाव आयोग के अधीन काम करता है न कि सरकार के अधीन।

​कमजोर नहीं, यह है भारत के चुनाव आयोग की ताकत

देश के 10वें मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन.शेषन ने यह दिखाया था कि अगर चुनाव आयोग खुद पर आ जाए तो क्या कर सकता है। जब वह देश के मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे, उस समय चुनाव में बूथ कैप्चरिंग, मतदाताओं के बीच पैसे और चीज बांटकर उनको लुभाना, सत्ता का दुरुपयोग, ये सारी चीजें आम बात बन गई थीं।

उन्होंने इस सब बुराइयों पर लगाम कसा। देश के चुनाव के इतिहास में पहली बार उन्होंने असरदार ढंग से आचार संहिता को लागू किया। चुनाव के दौरान भुजाबल और धनबल पर लगाम लगाया। जिन उम्मीदवारों ने चुनाव नियमों का उल्लंघन किया उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया और उनको गिरफ्तार करवाया। उन्होंने भ्रष्ट उम्मीदवारों का साथ देने वाले अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की। ऐसे अधिकारियों को उन्होंने निलंबित कर दिया।

​कमजोर नहीं, यह है भारत के चुनाव आयोग की ताकत

कई और मौकों पर भी चुनाव आयोग ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। 1984 में कांग्रेस ने दिग्गज नेता हेमवती नंदन बहुगुणा को हराने के लिए अमिताभ बच्चन को उतारा था। चुनाव आयोग को लगा कि उनकी फिल्में मतदाताओं को प्रभावित कर सकती हैं। इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने दूरदर्शन पर उनकी किसी भी फिल्म के प्रसारण पर रोक लगा दी। सबसे बड़ी यह थी कि उस समय केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार थी लेकिन चुनाव आयोग ने कोई समझौता नहीं किया।

कांग्रेस पर बरसते हुए पीएम ने कहा, कांग्रेस कह रही है कि वह सत्ता में आई तो सेना के अधिकार छीन लेगी। ये जम्मू-कश्मीर से सेना हटाना चाहते हैं। ये सेना का मनोबल तोड़ने की साजिश है। पर, ये इस बात को भूल गए हैं कि इनके और इनकी इस सोच के बीच मोदी दीवार की तरह खड़ा है।

“जम्मू-कश्मीर की तीन-तीन पीढ़ियों को इन दो परिवारों ने तबाह किया है, नोच लिया है, निचोड़ लिया है। जम्मू कश्मीर के उज्ज्वल भविष्य के लिए इन दोनों परिवार को विदाई होनी चाहिए। ये दो परिवार पूरे कुनबे को मैदान में उतार दें, चाचा, मामा, भाई, भतीजा, भांजा, साला… जितनी गालियां मोदी को देनी हैं, दे दो। इस देश के टुकड़े नहीं कर पाओगे।”

‘सर्जिकल स्ट्राइक पर होती है इन्हें बौखलाहाट’

एयर स्ट्राइक का मुद्दा उठाते हुए भी पीएम ने विपक्ष को घेरा। पीएम ने कहा कि जब हम एयर स्ट्राइक या सर्जिकल स्ट्राइक की बात करते हैं तो पूरे देश को गर्व होता है। हमें सेना पर फक्र होता है। पर, इन्हें (विपक्ष) बौखलाहट होती है। आखिर ऐसा क्यों है। आखिर इन्हें चुनाव में कौन समर्थन कर रहा है, जिस कारण इन्हें ये भाषा बोलनी पड़ रही है।

‘कांग्रेस के लिए सेना सिर्फ कमाई का जरिया’

सेना के मुद्दे पर पीएम ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप भी लगाए। पीएम ने दो टूक कहा कि कांग्रेस के लिए सेना का मतलब सिर्फ और सिर्फ कमाई का एक जरिया है। रक्षा सौदों का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि ये सेना का मनोबल तोड़ना चाहते हैं जबकि मेरी सरकार के लिए सेना की ताकत को राष्ट्र की रक्षा में लगाते हैं।
“जम्मू-कश्मीर के वंशवादी परिवार जितनी कोशिश कर लें, मोदी उनके सामने दीवार बनकर खड़ा है। मैं तीन-तीन पीढ़ियों से यहां पर कब्जा जमाकर बैठे अब्दुल्ला परिवार और मुफ्ती परिवार को कहना चाहता हूं कि यह मोदी है, न बिकता है, न डरता है, न झुकता है।”

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