PM किसान सम्मान निधि के हितग्राही कृषकों को संस्थागत ऋण हेतु जारी होगें KCC

मनीष शर्मा:
मुंगेली: कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने यहां बताया कि जिले के छोटे एवं सीमांत कृषकों को प्रत्यक्ष आय संबंधी सहायता दिये जाने हेतु 1 दिसंबर 2018 से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत जिले के 60950 का पंजीयन किया जा चुका है।

इसी तारतम्य में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजनांतर्गत लाभांवित किसानों को रियायत संस्थागत ऋण की सुविधा देेने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत बैकों द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि अंतर्गत लाभांवित कृषक जो किसान कैडिट कार्ड से वंचित है। अभियान चलाकर उन्हे संस्थागत ऋण हेतु के.सी.सी. जारी करने के निर्देश दिए।

इस संबंध मे कृषि विभाग उपसंचालक डी.के. ब्यौहार ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत लाभांवित किसान जिन्हें किसान क्रेडिट कार्ड (के.सी.सी.) जारी नही हुए है उन किसानों को संस्था गत ऋण की सुविधा प्रदान करने हेतु उन्हेे (के.सी.सी.) जारी किये जाएगें । इस हेतु उन्होने कृषि विभाग के मैदानी अमले को ही सक्रिय भागीदारी सुनिचित करने निर्देश दिए गए है।

उन्होने बताया कि जिनका किसान क्रेडिट कार्ड नही बना है। कृषि ऋण लेने के लिए वे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के दस्तावेज का उपयोग कर सकेगें । ऋण लेने वाले किसानों के लिए बैक द्वारा किसी प्रकार का शुल्क नही लिया जाएगा तथा बैको द्वारा 14 दिन के भीतर पूर्ण आवेदन प्राप्त होने पर उन्हे के.सी.सी जारी किए जाएगें। ताकि योजना के अंतर्गत पंजीकृत किसानों को असानी से कृषि ऋण प्राप्त हो सकें ।

उन्होने कहा है ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकरी अपने क्षे़त्र के किसानों से जीवंत संपर्क बनाकर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में पंजीकृत किसानों का किसान क्रडिट कार्ड बनाने में सहयोग करेगें। साथ ही ऐसे भूमिस्वामी कृषक अथवा वन अधिकार पट्टा धाराक किसानों का प्रधानमत्री किसान सम्मान निधि पंजीयन नही हुआ है, उनका पंजीयन सत्यापन पश्चात संबंधित हल्का पटवारी से समन्वय बनाकर करायेंगे।

उन्होने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पात्र कृषकों की शत् प्रतिशत प्रविष्टि की जाती है तो वह कृषकों को एक आय सुनिश्चित करते हुए पूरक आय प्रदान करेगा तथा समस्त हितग्राही कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से सहायता दी जाती है तो कृषकों को कृषि पद्धतियों के आधुनिकीकरण के लिए सक्षम बनायेगी एवं उनके लिए सम्मानजनक जीवन यापन करने का मार्ग प्रशस्त करेगी ।

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