नियमों को ताक पर रखकर चल रहा काम, पेनाल्टी के बावजूद नहीं हुआ कोई असर

पेड़ों की अवैध कटाई पर वन विभाग ने लगाई थी पेनाल्टी

लोरमी :

लोरमी जिले में कुछ दिनों पहले वन विभाग के अधिकारियों द्वारा संबंधित ठेकेदार पर पेड़ पौधे नुकसान को लेकर मामले में खानापूर्ति करते हुए दो लाख से ऊपर की पेनाल्टी भी की गई थी.

जिसके बावजूद वनांचल क्षेत्र में खुड़िया से औरापानी तक 19 किलोमीटर तक 15 करोड़ 47 लाख की लागत से बन रहे सड़क निर्माण में ठेकेदार द्वारा वन विभाग के सभी नियमों को ताक में रखते हुए दिनरात खुलेआम कार्य किया जा रहा है.

लेकिन सभी नियम कानूनों को ताक पर रखकर इस सड़क का निर्माण कार्य हो रहा है. इसका सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिस वजह से ठेकेदार खुलेआम जंगल में किसी भी जगह को खोद रहे है. वहीं अधिकारियों का मामले में पल्ला झाड़ते हुए जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं.

दरअसल इस सड़क निर्माण में निर्माण एजेंसी द्वारा वन भूमि से उत्खनन कर मिट्टी का उपयोग कर रहा है. करोड़ों रुपए की राशि से बन रही इस सड़क निर्माण के दौरान ठेकेदार द्वारा पोकलैंड मशीन के माध्यम से जंगल क्षेत्र में कई जगह अवैध रूप से मिट्टी का उत्खनन भी किया जा रहा है. इस उत्खनन के दौरान कई छोटे पेड़ों को भी क्षति हो रही है.

ग्रामीणों के सामने रोजगार की समस्या

वहीं लापरवाही का आलम तो यह है एकतरफ यहां प्रतिबंधित वन क्षेत्र में मशीन से कार्य कराया जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ आसपास के गांव में रहने वाले लोग रोजगार के लिए इधर उधर भटक रहे हैं. गांवों में पलायन की स्थिति निर्मित हो रही है वहीं गांव में करोड़ों रुपए का निर्माण कार्य होने के बावजूद ग्रामीणों के सामने रोजगार की समस्या बनी हुई हैं.

जंगल की कर रहे खुलेआम खुदाई

जंगल में किसी भी स्थान को बेख़ौफ खुलेआम खोदा जा रहा है. वहीं इस ओर सम्बंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा किसी तरह कोई कार्रवाई ठेकेदार के विरुद्ध नहीं की जा रही है. जिसके चलते ठेकेदार के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं.

एक कार्रवाई के बाद पल्ला झाड़ रहे अधिकारी

वहीं इस पूरे मामले में लोरमी वन परिक्षेत्र के एसडीओ मदन सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा पूर्व में भी लापरवाही बरतने के आरोप में संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध जेसीबी जब्ती की कार्रवाई करते हुए लगभग 2 लाख रुपए से ऊपर की पेनाल्टी की गई थी.

लेकिन अभी वर्तमान में की जाने वाली मनमर्जी काम को लेकर बात की गई तो उन्होंने साफ तौर में जानकारी नहीं होने की बात कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया और जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कहने लगे.

बहरहाल अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में ठेकेदार के विरुद्ध वन विभाग के अधिकारी किस तरह कार्रवाई करते हैं. या फिर यह सिलसिला यूं ही बदस्तूर जारी र

हेगा.

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