केरल का हदिया मामला : शादी की जांच नहीं कर सकती NIA

कोर्ट ने कहा कि शादियों को आपराधिक साजिश, आपराधिक पहलु और आपराधिक कार्रवाई से बाहर रखा जाना चाहिए नहीं तो ये कानून में गलत उदाहरण होगा.

नई दिल्ली: केरल की हदिया के धर्मपरिवर्तन कर शादी के विवाद मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि एनआईए हदिया की शादी की जांच नहीं कर सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि NIA मामले की जांच तो जारी रख सकती है लेकिन वो हदिया की शादी को लेकर जांच नहीं कर सकती. कोर्ट ने कहा कि शादियों को आपराधिक साजिश, आपराधिक पहलु और आपराधिक कार्रवाई से बाहर रखा जाना चाहिए नहीं तो ये कानून में गलत उदाहरण होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो कोई बच्ची नहीं है, 24 साल की है. ऐसे में शादी सही है या नहीं ये कोई और नहीं बल्कि लड़की या लड़का ही कह सकता है. क्या कोर्ट ये सुनवाई कर सकता है कि इंसान अच्छा है या नहीं.

कोर्ट ने कहा कि हदिया के मामले में सिर्फ ये देख सकता है कि हाईकोर्ट ने शादी को शून्य करार दिया वो सही है या नहीं. हदिया ने कोर्ट में कहा था कि उसने शादी की है और वो पिता के पास नहीं जाना चाहती.

वहीं, NIA की ओर से कहा गया कि इस मामले में उसकी जांच पुख्ता हुई है और इस तरह कोर्ट ये नहीं कह सकता कि ये जांच बेमतलब है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही जांच की जा रही है.

इस मामले की अगली सुनवाई 22 फरवरी को होगी. उल्लेखनीय है कि केरल के हदिया मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है.

पिछली सुनवाई में धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम युवक से शादी करने वाली 24 वर्षीया अखिला उर्फ हदिया ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि उसे अपनी आजादी चाहिए और वह अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती है. साथ ही उसने पति के साथ रहने की इच्छा जताई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने अखिला को तमिलनाडु के सेलम स्थित होम्योपैथ कॉलेज को पुन:दाखिला देने का निर्देश दे दिया था.

इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने हदिया और शफीन जहां की शादी को निरस्त करते हुए हदिया को पिता की कस्टडी में दे दिया था. सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि शादी को रद्द करने का हाईकोर्ट का फैसला सही है या नहीं.

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