खीर भवानी मेला : कश्मीर में माता रगन्या के दर्शनों को उमड़ी भीड़

श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की सरकार गिरने और राज्यपाल शासन लगने की खबरों के बीच कश्मीरी पंडितों का सालाना त्योहार खीर भवानी उत्सव आज हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। बड़ी संख्या में राज्य के बाहर रहने वाले कश्मीरी पंडितों के लिए यह सालाना त्योहार, महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।

यही वजह है कि दूर-दराज के राज्यों में रहने वाले कश्मीरी पंडित एक-दो दिन पहले से ही खीर भवानी मेले को लेकर जम्मू पहुंचने लगे थे। बुधवार की सुबह तक हजारों की संख्या में आए कश्मीरी पंडित गांदरबल जिले के माता खीर भवानी मंदिर में पहुंच चुके थे। खीर भवानी त्योहार के अवसर पर जम्मू-कश्मीर के तुल्मुल्ला शहर में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित माता रगन्या की आराधना करते हैं।

कश्मीर पर केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त विशेष प्रतिनिधि दिनेशवर शर्मा ने भी खीर भवानी मंदिर में हाजिर दी। इस दौरान उन्होने मंदिर में प्राथना की और श्रद्धालुओं के साथ साथ जिला प्रशासन से बातचीत की। वहीं. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जी.ए. मीर ने भी मंदिर का दौरा किया।

श्रीलंका से कश्मीर आई थीं देवी रगन्या : मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के माता खीर भवानी मंदिर में बुधवार को वार्षिक त्योहार में भाग लेने बड़ी संख्या में प्रवासी कश्मीरी पंडित पहुंचे। तुल्मुल्ला शहर में लगने वाले खीर भवानी मेले में इस साल कम संख्या में कश्मीरी पंडितों के पहुंचने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन बड़ी संख्या में पंडितों का पहुंचना माता रगन्या के प्रति उनकी आस्था को दर्शाता है। कश्मीरी पंडित बुधवार को दिल्ली और जम्मू से यहां आना शुरू हो गए थे। उनमें से कुछ लोग अपने निजी वाहनों का प्रयोग कर मेले में पहुंचे और मंदिर में शांति व खुशहाली के लिए प्रार्थना की। कश्मीर घाटी में स्थित खीर भवानी मंदिर हिंदू देवी रगन्या को समर्पित है। मान्यता है कि माता रगन्या रावण शासन के दौरान श्रीलंका से कश्मीर आई थीं।

श्रद्धालुओं का स्वागत करते दिखे मुसलमान : जम्मू-कश्मीर में एक तरफ जहां आतंकवाद और सियासी सांप्रदायिकता की खबरें आए दिन मीडिया की सुर्खियां बनती रहती हैं। वहीं आज माता खीर भवानी के सालाना त्योहार में इससे इतर, सामाजिक समरसता का नजारा देखने को मिला। तुल्मुल्ला में जहां, माता रगन्या का मंदिर है, वहां पर कश्मीरी पंडितों के स्वागत सत्कार के लिए बड़ी संख्या में मुसलमान मौजूद दिखे। बाहर से आए कश्मीरी पंडितों के लिए इन मुस्लिमों में किसी तरह की कोई कटुता नहीं थी। अलबत्ता माता रगन्या मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को कुछ स्थानीय मुस्लिम निवासी शुभकामनाएं दे रहे थे। इस मौके पर प्रशासनिक व्यवस्था भी चुस्त-दुरुस्त थी। प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा और आवास के लिए पर्याप्त व्यवस्था की है?

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