मध्यप्रदेश

Kirana Market : श्रीलंका पर प्रतिबंध से घटी हल्दी की मांग, भाव पर भी पड़ा असर

शंकर ने बताया कि साल 2019 के दौरान केवल इरोड जिले में 10 लाख बोरी (एक बोरी में 75 किलो) हल्दी का उत्पादन हुआ था।

इंदौर। तमिलनाडु के किसानों के लिए हल्दी सुनहरी फसल है, लेकिन भाव में भारी गिरावट की वजह से राज्य के प्रमुख उत्पादक इरोड में इसकी खेती की लोकप्रियता कम होती जा रही है। हल्दी कारोबारी और इरोड हल्दी व्यापारी एवं गोडाउन ओनर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट आरकेवी रविशंकर ने कहा, ‘इस साल की शुरुआत में हल्दी (फिंगर टर्मरिक) 7,200 रुपये और रूट टर्मरिक 6,500 रुपये प्रति क्विंटल बिकी थी। आज की तारीख में दोनों किस्मों की हल्दी के भाव में 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ गई है, जिससे किसान निराशा हैं।’ भाव घटने का साफ असर देखा जा रहा है। रविशंकर ने बताया कि साल 2019 के दौरान केवल इरोड जिले में 10 लाख बोरी (एक बोरी में 75 किलो) हल्दी का उत्पादन हुआ था। 2020 में इस फसल का रकबा घटा और उत्पादन कम होकर 8 लाख बोरी रह गई।

हल्दी व्यापारियों का कहना है कि इस साल कीमतों में भारी गिरावट की दो प्रमुख वजहें रहीं। मांग कमजोर पड़ गई और कमजोर क्वालिटी का माल बाजार में आ रहा है। बदली हुई परिस्थितियों में इरोड के कई कारोबारियों ने आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र से हल्दी खरीदना शुरू कर दिया क्योंकि वहां कम कीमतों पर माल उपलब्ध है। इस बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरे राज्यों से हल्दी मंगवाने पर दो प्रतिशत ढुलाई खर्च के बावजूद व्यापारी पांच प्रतिशत लागत बचाने में कामयाब हो रहे हैं। इरोड की हल्दी में 2.5-3 प्रतिशत कर्क्यूमिन होती है और इसका रंग भी अच्छा होता है। अब व्यापारियों को महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों में भी समान गुणवत्ता की हल्दी मिल रही है।

प्रभावित हुआ निर्यात

रविशंकर स्वीकार करते हैं कि खास तौर पर गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं की वजह से इस वर्ष इरोड जिले से हल्दी का निर्यात तकरीबन 20 प्रतिशत घटा है। उन्होंने कहा, ‘हल्दी पैदा करने वाले कई देशों में तीन प्रतिशत से ज्यादा कर्क्यूमिन वाली सुनहरे रंग की हल्दी की खेती हो रही है।’ प्रतिबंध के कारण पिछले छह महीनों से श्रीलंका को हल्दी का निर्यात नहीं हुआ है। इसके चलते 60 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।

कीमतों पर स्टॉक का भी असर

रविशंकर ने बताया कि कोविड-19 महामारी की वजह से हल्दी की बिक्री 30-40 प्रतिशत घट गई है। नतीजतन वर्ष 2021 में इसका कैरी ओवर स्टॉक 50-60 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो चालू साल की आवक से ज्यादा है। इसके कारण भी भाव नीचे आए हैं।

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