छत्तीसगढ़

किसान सुरेश सिंह मराबी कर्ज नोटिस से परेशान होकर की आत्महत्या : अमित जोगी

दस्तावेज के साथ सिलसिले वार जारी किए सबूत

रायपुर। मरवाही में किसान की आत्म हत्या पर अमित जोगी ने कहा कि किसान की ऋण वसूली के लिए शासकीय दबाव के कारण आत्मदाह की है। अमित जोगी ने पत्रकारवार्ता में सिलसिलेवार जानकारी देते हुए कहा कि मरवाही क्षेत्र के ग्राम पिपरिया के आदिवासी किसान सुरेश सिंह मराबी पिता स्व. निरंजन सिंह मराबी ने किसान क्रेडिट कार्ड से 1 लाख 40 हजार रुपए का ऋण लिया था। किसान को क्रेडिट कार्ड के इस कर्ज को ब्याज सहित 1 लाख 50 हजार 6 सौ 6 रुपये (1,50,606/-) रुपये एवं खाद बीज के कर्ज को ब्याज सहित पटाने के लिए 28,621/- रुपये सहित कुल 1,79,227/- रुपये के वसूली का नोटिस भेजकर उसे प्रताड़ित किया गया ।

उन्होंने कहा कि मरवाही सूखा प्रभावित क्षेत्र है। सरकार की गाइडलाइन्स है कि सूखा प्रभावित क्षेत्र में किसान धान बेचकर लिंकिंग से ऋण नहीं पटा रहा है तो नोटिस जारी करके उसे ऋण पटाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। मरवाही सूखा प्रभावित क्षेत्र है और इस क्षेत्र का यह किसान भी सूखे से प्रभावित है, इस बात का सबूत यह है कि इस किसान को लगभग 13 हजार रूपए का सूखा राहत का चेक मिला है।

अमित जोगी ने कहा कि मरवाही के सूखा प्रभावित क्षेत्र होने में एक गौर करने वाली बात और है कि आदिम जाति सेवा सहकारी समिति लरकेनी के धान खरीदी केंद्र में जहां यह किसान धान बेचता था वहां इस वर्ष धान खरीदी सिर्फ 900 क्विंटल हुई है जबकि पिछले वर्षों में अल्प वर्षा के समय भी औसतन 25000 से 30000 क्विंटल की खरीदी होती थी। सहकारी समिति लरकेनी में हुई धान खरीदी पूरे मरवाही विधानसभा के सभी धान खरीदी केंद्रों में इस वर्ष सबसे कम थी।

नोटिस मिलने के बाद किसान भारी तनाव में आ गया और 07 जून 2018 की दोपहर को लगभग 12 बजे उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया।

आत्महत्या के अगले दिन 8 जून 2018 को मरवाही विधायक अमित जोगी ने इस विषय पर मुख्य सचिव को पत्र भेजा जिसमें सूखा प्रभावित मरवाही क्षेत्र में कर्ज में डूबे किसान श्री सुरेश सिंह मराबी को वसूली का नोटिस भेजकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए मजबूर करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही, मृतक किसान के आश्रितों को 25 लाख रुपए का मुआवजा राशि, एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने एवं मृतक के चारों लड़कियों की पढ़ाई व शादी की जिम्मेदारी शासन द्वारा लेने तथा सभी किसानों का कर्ज माफ करने ज्ञापन दिया गया, साथ ही जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने पेण्ड्रा में धरना प्रदर्शन चक्काजाम किया। जिसके बाद आनन फानन में सरकार ने जांच समिति बनाई और इस समिति ने झूठी रिपोर्ट सौंप दी कि किसान पर कोई भी कर्ज बाकी नहीं था।

किसान ने 07 जून को आत्महत्या किया और उसकी मृत्यु के एक दिन बाद यानि 08 जून 2018 को ही सरकार ने किसान के खाते में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के 1 लाख 79 हजार 5 सौ 47 रूपए (फ२. 1,79,547/-) जमा कर दिए, जबकि 24 मार्च 2018 तक किसान के खाते में मात्र 3,643 रुपए ही थे।

विधायक ने बताया कि किसान की ऋण पुस्तिका में भी ऋण चढ़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि एक अन्य महत्वपूर्ण पहलु यह है कि मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी की सूखा प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा के अंतर्गत 150 दिनों का रोजगार दिया जाएगा। जबकि किसान और उसकी पत्नी को सिर्फ 4 -4 दिन (कुल 8 दिन) का रोजगार मिला। यह राज्य और केंद्र सरकार की बड़ी चूक है।

मरवाही विधायक ने कहा कि किसान पर ऋण पटाने का दबाव बनाकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने एवं आत्महत्या के लिए विवश करने के आरोप में मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। मरवाही विधायक अमित जोगी के नेतृत्व में पीड़ित किसान परिवार के साथ इसकी मांग की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की सरकार बनते ही हम किसानों का कर्जमाफी करेंगे। पत्रकारवार्ता में किसान विभाग के अध्यक्ष द्वारिका साहू, मीडिया अध्यक्ष इकबाल अहमद रिजवी, प्रमुख प्रवक्ता सुब्रत डे, नितिन भंसाली, संजीव अग्रवाल, भगवानू नायक भी उपस्थित थे।

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