जानें कितनी ताकतवर होती है सुरक्षा परिषद, जिसका अध्यक्ष बना भारत

भारत इस अगस्त महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष बना है. उसने ये जिम्मेदारी संभाल भी ली है. भारत फिलहाल दो साल के लिए सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है. परिषद में केवल 05 स्थायी सदस्य हैं, जो अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, रूस और फ़्रांस हैं. इसके अलावा दो साल के लिए 10 अस्थायी सदस्य बनाए जाते हैं, लेकिन उनके पास स्थायी सदस्यों की तरह वीटो का पॉवर नहीं होता
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता हर महीने बदलती है. यह अंग्रेज़ी के अल्फ़ाबेटिकल ऑर्डर में होता है. इसी के चलते फ़्रांस के बाद भारत की बारी आई है. भारत एक जनवरी, 2021 को सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बना था. भारत की सदस्यता 31 दिसंबर, 2022 को ख़त्म होगी. इस पूरे कार्यकाल में भारत के पास दो बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता आएगी.

वैसे भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की दावेदारी करता रहा है. भारत के अलावा दुनिया के तमाम अन्य देश भी संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार के साथ सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.

सवाल – क्या है सुरक्षा परिषद की जिम्मेदारी?
– संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में किसी भी बदलाव को मंज़ूरी देने की ज़िम्मेदारी है.

सवाल – वैसे कैसे चुने जाते हैं अस्थायी सदस्य भी?
– संयुक्त राष्ट्र संघ में सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुना जाना भी असरदार स्थिति होती है. इसमें सदस्य देश बहुमत के साथ जिस 10 देशों को इस भूमिका के लिए हर दो साल पर चुनते हैं, वो परिषद में अस्थायी सदस्यता हासिल कर लेता है.

भारत का सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य पर चुनाव करीब एक साल पहले जबरदस्त वोटों के साथ हुआ था. उसे तब 192 में 184 वोट मिले हैं. इससे दो बातें साफ हैं कि अंतरराष्ट्रीय तौर पर भारत को दुनियाभर के देशों का बड़ा समर्थन हासिल है. दूसरा मतलब ये है कि विश्व बिरादरी में भारत का एक खास स्थान है, दुनिया के देश उसके प्रति विश्वास रखते हैं. भारत पहली बार 1950 में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में चुना गया था.

सवाल – भारत इससे पहले कितनी बार चुना गया है?
– भारत, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) का आठवीं बार अस्थाई सदस्य चुना गया है. 09 साल बाद भारत को ये स्थिति फिर हासिल हुई है. इससे पहले, भारत को 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और हाल ही में 2011-2012 में सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्य के रूप में चुना जा चुका है.

सवाल – क्या अस्थायी सदस्य अपने मामलों को ज्यादा असरदार तरीके से उठा पाते हैं?
– अस्थायी सदस्य अपने मामलों को कहीं ज्यादा असरदार तरीके से उठा सकते हैं. तमाम मुद्दों पर वोटिंग प्रक्रिया जब केवल सुरक्षा परिषद में होती है तो अस्थाई सदस्य देशों की भूमिका भी अहम होती है. उन्हें चुनने का उदेश्य भी सुरक्षा परिषद में क्षेत्रीय संतुलन क़ायम करना है. कई देश तो सालों से वोट पाने के लिए मशक्कत करते रहते हैं.

सवाल – गैर स्थायी देश किस तरह चुने जाते हैं?
– इसमें अफ्रीकी और एशियाई देशों के लिए 5; पूर्वी यूरोपीय देशों के लिए 1; लैटिन अमेरिकी और कैरेबियन देशों के लिए 2; और पश्चिमी यूरोपीय और अन्य देशों के लिए 2 सीटें तय हैं. इसमें कोई देश तभी चुना जाता है जबकि उसे दो तिहाई बहुमत से जीत मिले.

सवाल – सुरक्षा परिषद के स्थायी देश कौन हैं?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाँच देशों – अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन को स्थाई सदस्यता प्राप्त है. इन देशों की सदस्यता दूसरे विश्व युद्ध के बाद के शक्ति संतुलन को प्रदर्शित करती है, जब सुरक्षा परिषद का गठन किया गया था.

सवाल – क्या स्थायी सदस्यों की बढ़ाने की मांग भी सुरक्षा परिषद के लिए होती रही है?
– सुरक्षा परिषद की 1946 में हुई पहली बैठक के बाद से यद्यपि स्थाई सदस्यों की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है लेकिन स्थायी सदस्यों की संख्या बढा़ने की मांग लगातार जोर पकड़ती रही है. भारत, जर्मनी, जापान और ब्राज़ील तथा अफ़्रीकी संघ के देश परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए प्रयास कर रहे हैं. इनमें भारत, जर्मनी, जापान और ब्राज़ील ने अपनी दावेदारी के लिए समर्थन जुटाने के वास्ते जी-4 नामक संगठन बनाया है.

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