“जन्म पत्रिका से जानें कैसा मिलेगा वर”

आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) छतरपुर मध्यप्रदेश,किसी भी प्रकार की समस्या समाधान के लिए सम्पर्क कर सकते हो,सम्पर्क सूत्र:- 9131366453

प्रत्येक कन्या के मन में उसके भावी पति की तस्वीर कुछ इस तरह की होती है कि उसका पति सुंदर, आकर्षक, हृष्ट-पुष्ट, उत्तम चरित्र वाला, पढ़ा-लिखा, डॉक्टर, इंजीनियर या उद्योगपति होगा लेकिन वधू की पत्रिका द्वारा जाना जा सकता है कि उसका वर सपनों का राजा होगा या फिर लड़ाकू, कामुक या शराबी। कन्या की जन्म कुंडली में सप्तम स्थान उसके पति का होता है। यदि पत्रिका सही है तो उसके पति के संबंध में जाना जा सकता है।

यहां पर कुछ महत्वपूर्ण सूत्र देकर कुछ भावी पति के बारे में बताया जा रहा है लेकिन इन्हीं सूत्रों को ब्रह्म वाक्य नहीं माना जा सकता क्योंकि पुरुष की यानी वर की जन्म कुंडली को भी महत्व देना चाहिए। जन्म कुंडली का सप्तम भाव भावी पति के बारे में दर्शाता है। वहीं नवांश कुंडली भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है और नवांश प्रत्येक तीन मिनट में बदलती रहती है।

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– सप्तम भाव में शुक्र स्वराशि वृषभ का हुआ तो पति अति सुन्दर होगा। सुन्दर से तात्पर्य गोरा नहीं, बल्कि नाक-नक्श उत्तम व चेहरा आकर्षक होगा। वृषभ का शुक्र कामुक भी बनाता है अतः वह कामुक भी होगा।

– सप्तम भाव में तुला का शुक्र हुआ तो वह वर कामुक न होकर सरल स्वभाव वाला सुन्दर आकर्षक व्यक्तित्व का व नपी-तुली बात करने वाला अपनी पत्नी से अत्यधिक प्रेम करने वाला होगा। कलाकार, संगीतप्रेमी, सौन्दर्य प्रिय, इंजीनियर या डॉक्टर भी हो सकता है।

– सप्तम भाव में कन्या की कुंडली में मीन राशि का शुक्र हुआ तो वह उच्च का होगा अतः उसका भावी जीवनसाथी काफी पैसे वाला होगा तथा भाग्यवान होकर धनी होगा।

– सप्तम भाव में यदि नीच राशि का शुक्र होता है तो उसका भावी पति अर्थहीन व स्त्री के धन का प्रयोग करने वाला होगा।

– सप्तम भाव में सूर्य सिंह दिशा में हो या नवांश में सिंह राशि हो तो वह कामुक होगा एवं दाम्पत्य जीवन सुखद कम ही रहेगा।

– सप्तम भाव में मेष का मंगल हुआ तो उसका पति पुलिस, सैनिक या संगठनकर्ता होगा, उसका स्वभाव उग्र भी हो सकता है एवं कामुक भी रहेगा।

– सप्तम भाव में वृश्चिक राशि का मंगल हुआ तो वह तुनकमिजाज होगा, कुछ व्यसनी भी हो सकता है या लड़ाकू प्रवृत्ति का भी हो सकता है। उसका चरित्र संदेहास्पद भी हो सकता है।

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– सप्तम भाव में मंगल उच्च राशि का हुआ तो वह अत्यंत प्रभावशाली, महत्वाकांक्षी, उच्चपदस्थ अधिकारी या डॉक्टर, सेना या पुलिस विभाग में भी हो सकता है।

– सप्तम भाव में कर्क का चंद्रमा हुआ तो वह भावुक, सहनशील, स्नेही स्वभाव वाला, मधुरभाषी, पत्नी से अधिक प्रेम करने वाला, गौरवर्ण का सुन्दर होगा।

– सप्तम भाव में उच्च का चंद्रमा हुआ तो वह अत्यंत सुंदर, अनेक स्त्री मित्रों वाला, सौंदर्यप्रेमी, कामुक भी होगा।

– सप्तम भाव में मकर या कुंभ का शनि हो तो उसका पति उसकी उम्र से अधिक होगा।

– सप्तम भाव में शुक्र-चंद्र की युति हुई तो वह अत्यंत मनोविनोदी, सुंदर और अपनी पत्नी से अत्यधिक प्रेम करने वाला होगा।

– सप्तम भाव में बुध मिथुन राशि का हुआ तो उसका पति व्यापारिक या बैंककर्मी, लेखक, पत्रकार या विद्वान होगा।

– सप्तम भाव में उच्च का बुध हुआ तो उसका पति सुन्दर होने के साथ-साथ उच्च व्यापारी या बौद्धिक गुणों से भरपूर, उच्च पदस्थ अधिकारी भी हो सकता है।

– सप्तम भाव में धनु राशि का गुरु हुआ तो उसका भावी पति विद्वान, सुन्दर, गोल चेहरे वाला, प्रोफेसर या न्यायविद, अधिवक्ता या राजपत्रित अधिकारी, पत्नी से प्रेम करने वाला सद्चरित्र व ईमानदार होगा।

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– सप्तम भाव में बुध-शनि की युति हो और उस पर मंगल की दृष्टि हो एवं उसे कोई भी शुभ ग्रह न देखता हो ना ही शुभ ग्रहों से मध्यस्थ हो तो उसका पति नपुंसक होता है।

– सप्तम भाव में उच्च का राहू या केतु हो तो उसका पति आधुनिक विचारों वाला व दार्शनिक भी हो सकता है।

– सप्तम भाव में चर राशि हो एवं चर ग्रह हो या चर ग्रहों से दृष्टिपात हो तो उसका पति सदैव बाहर रहने वाला होता है।

– सप्तम भाव पर नीच दृष्टि किसी भी ग्रह की पड़ रही हो तो उसका पति मध्यम स्तर वाला होगा।

– सप्तम भाव में सूर्य-चंद्र की युति हो तो उसका पति सदैव भ्रमणशील व परेशान रहकर गृहस्थ जीवन में बाधक होगा।

– सप्तम भाव पर गुरु-चंद्र की युति हो तो उसका पति विद्वान, गुणवान, चरित्रवान, सुन्दर, यशस्वी, मधुरभाषी, ईमानदार, उच्च पदस्थ अधिकारी, डॉक्टर या प्रोफेसर या न्यायाधीश भी हो सकता है।

– सप्तम भाव में मंगल-चंद्र की युति हो तो उसका पति सुंदर या उद्यमी हो सकता है। वहीं स्वभाव में मिला-जुला रुख रहेगा व भावुक भी होगा।

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– सप्तम भाव में मंगल-चंद्र-शुक्र की युति वाली कन्या का पति अत्यंत सेक्सी स्वभाव वाला व चरित्र का कमजोर भी हो सकता है। गुरु की दृष्टि पड़ने पर चरित्रहीन नहीं होगा।

– शनि-चंद्र की युति सप्तम भाव में होने से उसका वर इंजीनियर या अस्थिरोग का या दाँतों का डॉक्टर भी हो सकता है।

– गुरु या राहू की युति वाली कन्या का पति गुप्त विधाओं का जानकार लेकिन चिन्ताग्रस्त चरित्र वाला रहेगा।

– यदि कन्या के जन्म लग्न में नीच का गुरु व चंद्रमा हो तो उसका पति गुणी व सुन्दर होगा।

– यदि कन्या की जन्म कुंडली में शनि की उच्च दृष्टि सप्तम भाव पर पड़ रही हो तो उसका पति प्रशासनिक अधिकारी या शासकीय सर्विस में उच्च पदस्थ या लोहे का व्यापारी या ट्रेवल्स एजेंसी का मालिक होगा।

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