जानिए उम्र के हिसाब से कैसी होनी चाहिए आपकी डाइट

संतुलन का एक महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ्य भी है. अपने व्यवहार में, मैंने महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक में असमानता देखी है क्योंकि वे स्वयं इसके लिए प्रयास नहीं करती हैं. जब परिवार की बात आती है, तो हम बहुत खास होती हैं लेकिन इस पूरी कड़ी में खुद को सबसे अंतिम पायदान पर रखती हैं.

एक स्लोगन है, एक लड़की को शिक्षित करने से आप एक परिवार को शिक्षित करते हैं. इसी तरह, एक स्वस्थ लड़की एक स्वस्थ परिवार का रूप लेती है. इसलिए अपना काम करते हुए हम कुछ आवश्यक पोषक तत्वों और उम्र के अनुसार स्वास्थ्य पर पड़ने वाले उनके प्रभावों को साझा कर रहे हैं.

बचपन और किशोरावस्था में प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन पर जोर दें
यह वो साल हैं, जब हम अपने स्वास्थ्य की नींव रख रहे होते हैं. ऐसे में ये स्वस्थ खाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण वर्ष हैं. बढ़ने के दौरान पर्याप्त ऊर्जा और अच्छे स्वास्थ्य के लिए भोजन में साबुत अनाज, ताजे फल और सब्जियों को शामिल करना आवश्यक है. इस उम्र में अच्छा भोजन करने से जीवन में बाद के सालों में पुरानी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. इस स्तर पर तीन महत्वपूर्ण पोषक तत्व हैं:

प्रोटीनः हमारे शरीर के बिल्डिंग ब्लॉक्स, ये हर जीवित कोशिका में मौजूद होते हैं. इनकी जरूरत को पूरा करने के और तेजी से विकास के लिए पर्याप्त मात्रा में अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोटीन की आवश्यकता होती है. जानवरों से मिलने वाले मांस, मछली, चिकन, दूध, अंडा जैसे प्रोडक्ट प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं. अनाज के साथ दालों और फलियों को जब खाया जाता है, तो ये शाकाहारियों के लिए गुणवत्ता वाले प्रोटीन प्रदान करते हैं.

कैल्शियम: इस उम्र में हड्डियों के समग्र विकास का असर जीवन में बाद के साल में हड्डी के स्वास्थ्य पर पड़ेगा. कैल्शियम का सबसे अच्छा स्रोत दूध है. दूध से कैल्शियम की जैव उपलब्धता अच्छी है और दूध से बने उत्पाद जैसे दही, पनीर, चीज़ खाने में स्वादिष्ट होते हैं. इन्हें कई रूपों में प्रयोग किया जा सकता है.

आयरन: ये हेल्दी ब्लड सेल्स के विकास के लिए आवश्यक है. लड़कियों में जब पीरियड की शुरुआत होती है, तो यह पोषक तत्व विशेष महत्व रखता है. पीरियड का मतलब है कि शरीर में हर महीने खून की कमी. भारत में एनीमिया गलत खान-पान के कारण संपन्न परिवारों में भी देखा गया है. हरी पत्तेदार सब्जियां, ऑर्गन मीट, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ और दालें आयरन के अच्छे स्रोत हैं.
मां बनने की उम्र में

अगर आप प्रेगनेंट हैं या इसकी प्लानिंग कर रही हैं, तो इस सलाह का पालन करें. वयस्क महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और कुछ आवश्यक चीजों को बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में बड़े पैमाने पर पोषक तत्व लेने की आवश्यकता होती है. खासकर अगर वे एक परिवार को बढ़ाने की योजना बना रही हैं.

फोलिक एसिड: यह एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है, जो जन्म दोषों की रोकथाम के लिए आवश्यक है. ऐसे दोष बच्चे के लिए घातक हो सकते हैं. इसकी मानक मात्रा 500 µg / दिन है.
हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे चौलाई, पालक और पुदीना, दालें, बंगाल चना, काला चना, हरा चना और लाल चना भी अच्छी मात्रा में फोलिक एसिड प्रदान करते हैं.

विटामिन बी 12: यह एक हेल्दी नर्वस सिस्टम और मेगालोब्लास्टिक एनीमिया को रोकने के लिए आवश्यक है. यह डीएनए सिंथेसिस में भी शामिल है. एक वयस्क महिला के लिए 1 μg / दिन और गर्भवती महिलाओं के लिए 1.2 μg / दिन निर्धारित किया गया है. बी 12 केवल एनिमल फूड में उपलब्ध है. इसलिए लिवर, मीट, अंडे अच्छे स्रोत हैं. दूध इस विटामिन का एक औसत स्रोत है. शाकाहारियों को विशेष रूप से प्रेग्नेंसी के दौरान सप्लीमेंट की आवश्यकता हो सकती है. वयस्क इसके लिए फोर्टिफाइड प्रोडक्ट चुन सकते हैं.

ओमेगा -3: ये हमारे शरीर में नहीं बनते हैं, लेकिन कोशिका झिल्ली, हार्मोन, शिशुओं में दिखने वाले प्रारंभिक विकास के लिए आवश्यक माने जाते हैं. ठंडे पानी की मछलियां ओमेगा 3s का सबसे अच्छा स्रोत हैं. शाकाहारी लोग वनस्पति तेल, अखरोट, अलसी और पत्तेदार सब्जियों खा सकते हैं. कुछ साबुत अनाज जैसे बाजरा में भी ओमेगा 3 होता है.

कैल्शियम: कैल्शियम सभी उम्र की महिलाओं के लिए आवश्यक है. वयस्क महिलाओं को 600mg / दिन कैल्शियम की आवश्यकता होती है, जबकि गर्भवती महिलाओं को 1200mg / दिन कैल्शियम की आवश्यकता होती है. दूध और दूध से बने उत्पाद, रागी, बंगाल चना (साबुत), राजमा, चौलाई, ब्रोकली, बादाम और सूरजमुखी के बीज कैल्शियम के कुछ अच्छे स्रोत हैं.

आयरन: बच्चे को जन्म देने की उम्र में महिलाओं के लिए आयरन एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है. एक वयस्क महिला को 21mg / दिन आयरन की आवश्यकता होती है, जबकि गर्भवती महिला को लगभग 35mg / दिन की आयरन की आवश्यकता होती है. प्रेग्नेंसी के दौरान खून की मात्रा में तेजी से वृद्धि का मतलब है कि बहुत सारे रॉ मैटिरियल की जरूरत है. इस स्टेज में एनीमिया के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिसमें मातृ मृत्यु दर और कम वजन वाले शिशु शामिल हैं. चौलाई, फूलगोभी के पत्ते और मूली के पत्ते विशेष रूप से आयरन से भरपूर होते हैं. विटामिन सी आयरन के अवशोषण में मदद करता है.

द गोल्डन ईयर

मैं कहना चाहूंगी कि ये जिंदगी के सबसे बेहतर वर्ष हैं, लेकिन इसी दौरान मेनोपॉज भी आता है. इसलिए आपकी उम्र के अनुसार आयरन कम और दूसरे पोषक तत्व बहुत आवश्यक हो जाते हैं.

हमारी हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम इस समय सबसे जरूरी है. इसलिए लगभग 600mg / दिन कैल्शियम लें, लेकिन यह भी सुनिश्चित करें कि आप पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी भी लें.

तरल पदार्थ महत्वपूर्ण हैं, लेकिन आपको इस समय अधिक हाइड्रेटेड रहने की आवश्यकता है. 35ml / kg शरीर के वजन का सामान्य नियम है, जिसका पालन करना चाहिए.

उम्र के साथ कैलोरी की आवश्यकता कम होती है. हार्मोनल बदलाव के साथ वजन बढ़ना एक वास्तविकता है. शुगर वाले फूड प्रोडक्ट्स एक्स्ट्रा खाने से बचने के अलावा रोजाना एक्सरसाइज करना आवश्यक है.

पेट को ठीक रखने और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से सुरक्षा के लिए फाइबर बहुत जरूरी हैं. ऐसे में साबुत अनाज, फलियां, साबुत फल और बहुत सारी सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है.
इसलिए लेडीज अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, हेल्थ चेकअप करवाएं, रेगुलर एक्सरसाइज करें और कल का इंतजार न करें.

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