जानिए क्या है श्री अनुरागी धाम, जहां पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

अंकित मिंज

बिलासपुर।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ भवन पहुंचे। मुख्यमंत्री सोमवार को दोपहर में मुंगेली स्थित अनुरागी धाम मोतिमपुर में समाधि मंदिर निर्माण का शिलान्यास करने के बाद बिलासपुर पहुंचे हैं। इस समय वे कार्यकर्ताओं से भेंट करने के साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों से भेंट की। इन संगठनों ने अपनी-अपनी समस्याएं बतायीं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से वे बिलासपुर रेलवे स्टेशन पहुंचेेंगे और शिव नाथ एक्सप्रेस से रायपुर के लिए रवाना होंगे।

हर साल की तरह इस बार भी यहां आसपास के सैकडों गांव से रामायण मण्डलियां आकर पाठ कर रही है, श्रद्धालुओं ने रामायण मण्डलियों को आवास एवं भोजन के सुविधा उपलबध करायी है। 7 दिनों से प्रतिदिन मानस मर्मज्ञ विभूतियों के द्वारा प्रवचन जारी है।

शाम 7 से रात 9 बजे तक भजन गायकों के द्वारा भजनों का कार्यक्रम भी चल रहा है इस पावन कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से साधु संतो का आगमन होता है। भगवान श्रीराम के चरित्र को सुनने एवं भजनों का आंनद लेने हजारों की संख्या में भक्त उपस्पित हो रहे है, नवर्धा रामायण के समापन दिवस 7 जनवरी को दोपहर से शाम तक आसपास के सैकड़ो गांवों से और दूर दराज से आये अनुरागी बाबा के भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।

6 जनवरी की शाम को अनुरागी धाम में विशाल कलश यात्रा निकाली गई जिसमें कन्याओं द्वारा शिवनाथ नदी के संगम स्थल से जल भरकर भगवान राम के स्थापना स्थल तक लाया गया।

समापन अवसर 7 जनवरी को प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल,परिवहन मंत्री मो. अकबर सहि कई राजनीतिक हस्तियां पहुंची। इनके हाथों दोपहर 3 अनुरागी धमा मोतिमपुर में समाधि मंदिर निर्माण का शिलान्यास किया गया। समापन समारोह की तैयारी में संरक्षक नरेश चन्द्र कदेसिया अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव सचिव मनोज श्रीवास्तव के अलावा गुरू अनुरागी जी के तमाम अनुयायी लगे हुए थे। इस दौरान बिलासपुर, मुंगेली सहित आसपास के जनप्रतिनिधि, अधिकारी, ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद उपस्थित रहे।

श्री अनुरागीधाम मोतिमपुर सरगांव- श्री अनुरागी धाम स्वामी श्री अनुरागी जी का समाधि स्थल है। जो ग्राम मोतिमपुर में शिवनाथ नदी के किनारे स्थित है। श्री अनुरागी धाम बिलासपुर से लगभग 35 किमी दूरी पर स्थित है। श्री अनुरागी धाम आस्था का केन्द्र एंव जागृत स्थल है। स्वामी अनुरागी जी के समाधि स्थल में प्रतिदिन सायंकाल 6 बजे पूजन आरती होती है एवं प्रत्येक गुरूवार एंव रविवार को फूलों से समाधि की विशेष सज्जा की जाती है। गुरूवार एंव रविवार के दिन समाधि स्थल में लोगों का बहुत आना-जाना रहता है। श्री अनुरागी बाबा की समाधि में कामना करने से लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

अनुरागी धाम में प्रायः हर तरह की सुविधाएं हैं जिनका रख-रखाव एवं संचालन श्री अनुरागीधाम समिति जो (पंजीकृत संस्था) है द्वारा किया जाता है।

स्वामी श्री अनुरागी जी का संक्षिप्त परिचः उत्तर प्रदेश के बांदा जिले ग्राम भवानीपुर के जमीदार परिवार में स्वामी श्री अनुरागी जी का जन्म 2 जनवरी दिन शनिवार सन् 1915 में हुआ था। स्वामी श्री अनुरागी जी के दादा महान धार्मिक, वेदों के ज्ञाता एवं पहुंचे हुए ज्ञानी थे। स्वामी श्री अनुरागी जी जन्म से ही ईश्वर के प्रति समर्पित थे। बचपन से ही उन्हें भजनों एवं शास्त्रों के अध्ययन का लगाव था।

दादाजी के मार्गदर्शन में उन्होंने प्राथमिक शिक्षा के साथ.साथ हिन्दी, संस्कृत, उर्दू, फारसी, अरबी भाषाओं का अच्छी तरह अध्ययन कर लिया था। स्कूल में भी वे पढ़ाई में अव्वल थे। स्वामी अनुरागी जी को कविताओं एवं शेर-ओ-शायरी का बहुत शौक था।

यहां तक कि उनका कोई भी वृतान्त बगैर शेर.ओ.शायरी के पूरा नहीं होता था। स्वामी श्री अनुरागी जी में बचपन से ही अलैकिक प्रतिभा थी। मात्र 11 वर्ष उम्र में 4 वर्ष तक घोर तपस्या की एवं अपनी साधना से परमेश्वर का साक्षात्कार किया। कई तरह कि सिद्धियां प्राप्त की। वे एक पहुंचे संत एवं महायोगी हो चुके थे। इसलिए उन्होंने निश्चय किया।

कि अब मुझे ईश्वर के निर्देशानुसार जन कल्याण के कार्य करना चाहिए। स्वामी अनुरागी जी बनारस आये कुछ समय उन्होंने बनारस के तुलसी मानस मंदिर में प्रवचन करते रहे। इसी दरम्यान बीच-बीच में वे नई दिल्ली, भोपाल, जयपुर एवं मध्यप्रदेश के रामानुजगंज, चिरमिरी, जैतहरी, कटनी, रीवां इत्यादि विभिन्न स्थानों में रहकर लोगो के कष्टों को दूर करते रहे एवं ईश्वर भक्ति की प्रेरणा देते रहे। इसके पश्चात वे कुछ चित्रकुट में बिताएं। चित्रकुट में उन्होंने साधना की एवं हनुमान जी एवं श्रीराम भगवान के दर्शन प्राप्त किए।
स्वामी अनुरागी जी को चारों वेद, 18 पुराण, 6 शास्त्र, रामायण, गीता, महाभारत, बाईबिल, कुरान एंव अन्य धार्मिक शास्त्र कंठस्थ थे। कुछ वर्षो के पश्चात् वे उत्तराखंड में रहे फिर उन्होंने हिमालय प्रदेश, पुरी, कन्याकुमारी, आदि तीर्थ स्थानों का भ्रमण किया।

सन् 1952 से स्वामी जी पूर्ण रूप से लोक कल्याण के लिए समाज के मार्गदर्शन के लिए आध्यात्मिक उत्थान के लिए कार्य करने लगे। वे पूरे देश में भ्रमण करते रहे।

स्वामी अनुरागी जी का पूरा जीवन लोक कल्याण में बीता। स्वामी अनुरागी जी ऐसे संत, सद्गुरू थे जिन्हें ईश्वर का साक्षात्कार हुआ था एवं जिनके पावन निर्मल चरणों में जाने से ही मन निर्मल हो जाता है एवं आध्यात्मिक प्रगति होने लगती है।

उन्होंने हजारों की संख्या में देश के विभिन्न स्थानों से आये हुए भक्तों का उद्धार किया, लोगों के दुःख, दर्द एवं असाध्य रोगों को ठीक किया। वे अक्सर ऐसा कहते थे कि परमेश्वर ने मुझे जिस कार्य के लिए भेजा था वह पूरा हो गया है, अब मै जाना चाहता हॅू। अंतोगत्वा दिनांक 07 जनवरी 2007 को स्वामी अनुरागी जी ग्राम मोतिमपुर शिवनाथ नदी के किनारे समाधिस्थ हुए।

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