जानिए हिन्दू क्यों जन्माष्ठमी मनाते है और कैसे अलग अलग राज्यों में मनाया जाता है

भगवान श्री कृष्ण के न केवल भारत में बल्कि देश के बाहर भी बहुत भक्त हैं. इसलिए कृष्णाष्टमी दुनिया भर में बड़े पैमाने पर मनाया जाता हैं

जन्माष्टमी भगवान कृष्णा के जन्मदिन को मनाने के लिए मनाई जाती हैं. जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा करते हैं.

कृष्णा भगवान के आठवें वें अवतार थे. श्रवण कृष्ण के जन्म में कृष्णा पक्ष का यह आठवाँ दिन था जब भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था. इसलिए इसी दिन हिंदू कैलेंडर के अनुसार जन्माष्टमी भी मनाया जाता हैं. भगवान कृष्ण हिंदुओं के पसंदीदा देवता माने जाते है. भगवान श्री कृष्ण के न केवल भारत में बल्कि देश के बाहर भी बहुत भक्त हैं. इसलिए कृष्णाष्टमी दुनिया भर में बड़े पैमाने पर मनाया जाता हैं.

भगवान कृष्ण के भक्त उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारते हैं. भगवान कृष्ण के कुल 108 नाम है जैसे बाल गोपाल, कान्हा, मोहन, गोविंदा, केशव, श्याम, वासुदेव, कृष्णा, देवकीनंदन, देवेश और कई अन्य.

इस दिन कान्हा के सभी पहलुओं की भक्तों द्वारा पूजा की जाती हैं. भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का सबसे शक्तिशाली अवतार माना जाता है. उन्होनें धरती पर से राक्षसों के साम्राज्य को खत्म करने के लिए जन्म लिया था. भगवान कृष्ण देवकी और वासुदेव का आठवाँ बच्चा था.

इस दिन लोग जन्माष्टमी कि पूर्व संध्या पर उपवास करते है जिसे सप्तमी कहा जाता है. कृष्ण भक्त रात भर जागते रहते है और भगवान कृष्ण का सम्मान करने के लिए गाने गाते हैं. मध्यरात्रि 12 बजे, दूध से मूर्ति को नहलाते है और सुंदर कपड़े, गहने पहनाते है फिर पूजा के लिए पालना में रखा जाता हैं. देवताओं को मिठाई भेंट की जाती है और फिर भक्तों के बीच बांटी जाती हैं.

भगवान् कृष्ण के भक्त कृष्ण भजनों के साथ नृत्य करते हैं साथ ही वे कृष्ण झांकी का एक अति उत्कृष्ट प्रदर्शन आयोजित करते है जो रस लीला को एक विशाल तरीके से दर्शाता हैं. जन्माष्टमी की सबसे लोकप्रिय गतिविधि दही हांड़ी का रिवाज हैं. इस परंपरा को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है.

जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त: कृष्ण जन्माष्टमी पूजा का शुभ समय रात्रि 11:57 से 12:43 बजे तक रहेगा.

जन्माष्टमी पर पकवान: बाल गोपाल मक्खन, दही और दूध से बनी चीजों को खाना पसंद करते थे इसलिए बाल गोपाल का स्वागत करने के लिए विभिन्न मीठे व्यंजन बनाये जाते है. इन पकवानों को उन्हें भोग के रूप में प्रस्तुत किया जाता हैं. उसके बाद परिवार द्वारा प्रसाद के रूप में खाया जाता हैं. इन पकवानों को बाल गोपाल या गोविंदा के पसंदीदा माना जाता हैं.

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