आखिरकार खुल गया पुरुलिया के ‘भुतहा स्टेशन’ का राज

यह स्टेशन जिले के किनारे अयोध्या हिल के पास स्थित है

आखिरकार खुल गया पुरुलिया के ‘भुतहा स्टेशन’ का राज

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का बेगुनकोदार रेलवे स्टेशन, जिसके बारे में लोगों का कहना है कि यह स्टेशन भुतहा है। इस मिथक को तोड़ने की कोशिश में बुद्धिजीवियों की एक टीम ने स्टेशन पर रात गुजारी। हालांकि, इस दौरान स्थानीय लोगों ने टीम के सदस्यों को डराने की कोशिश भी की।

यह स्टेशन जिले के किनारे अयोध्या हिल के पास स्थित है। बेगुनकोदोर स्टेशन के बारे में ऐसी अफवाह है कि यहां पिछले तकरीबन 40 साल से भूतों का डेरा है। यहां अक्सर यात्री घबरा जाते हैं और ऐसा मानते हैं कि उन्हें लगने वाली चोट आत्माओं के साथ हाथपाई के वक्त लगती है। गुरुवार रात पश्चिम बंग बिज्ञान मंच (पीबीबीएम) के 10 सदस्य जिला प्रशासन, पुलिस और रेलवे कर्मचारियों की मदद से स्टेशन पर ही ठहरे लेकिन उन्हें भुतहा जैसा कुछ भी नहीं दिखा।

‘भुतहा’ होने से जुड़ी हैं ये कहानियां
पीबीबीएम के जिला अध्यक्ष नयन मुखर्जी ने बताया, ‘भूतों से जुड़ी हुई कई कहानियां स्टेशन के इर्द-गिर्द घूमती हैं। एक तो कहानी यह भी है कि स्टेशन मास्टर और उनकी पत्नी ने खुद को आग लगा ली थी, जिसके बाद उनकी आत्माएं यहीं भटकती हैं। बेगुनकोदोर स्टेशन से जुड़ी एक कहानी यह भी है कि पास में ही एक महिला ने फांसी लगा ली थी। हमें कुछ लोगों ने डरावनी आवाजों के जरिए डराने की कोशिश की, इसके अलावा हमें कोई भी दिक्कत नहीं हुई।’

घोस्ट टूर के नाम पर आने लगे लोग
माना जाता है कि 1969 में शुरू हुई एक अफवाह के बाद इस जगह से रेलवे आवागमन बंद कर दिया गया क्योंकि कोई भी रेल कर्मचारी वहां जाने के लिए तैयार नहीं होता है। पिछले कुछ वर्षों से कुछ लोगों ने ज्यादा पैसे कमाने के लिए कोलकाता और अन्य जगहों के लोगों को घोस्ट टूर के रूप में बेगुनकोदोर स्टेशन पर लाना शुरू कर दिया।

ऐसे की पड़ताल
लगभग 10 लोगों की एक टीम रात 11 बजे स्टेशन पहुंची। इसके बाद वह सबसे पहले एक पुराने कुएं के पास रुके। इस दौरान उन्हें पानी में कुछ नजर आया। जब उन्होंने टॉर्च की रोशनी से देखा तो वह पानी वाला सांप था। इसके बाद टीम छोटे स्टेशन की इमारत के दूसरे छोर पर पहुंची, जहां पर ‘छत्तीम’ पेड़ है। वहां पर भी उन्हें कुछ खास नहीं मिला, जिससे कुछ भी भुतहा जैसा लगे।

डिजिटल कम्पास का भी किया गया प्रयोग
पीबीबीएम सदस्यों ने दो अंतिम छोर पर डिजिटल कम्पास भी लगाए ताकि किसी भी चुम्बकीय व्यवधान का पता किया जा सके लेकिन ऐसा कुछ पहचान में नहीं आया। दो डिजिटल कैमरों का उपयोग किया गया कि कोई तस्वीर वगैरह पहचानी जा सके लेकिन इसके जरिए भी कुछ सामने नहीं आया। हालांकि, इसी दौरान टीम को स्टेशन की इमारत के पीछे से अजीबो-गरीब आवाजें सुनाई देने लगीं। जिसमें कुछ इंसानों की थीं और कुछ जानवरों की आवाजें भी शामिल थीं।

लोगों ने की डराने की कोशिश
पीबीबीएम के सदस्य सोमनात पर्ता ने बताया, ‘हमने यह तलाशने की कोशिश की कि आखिर यह आवाजें कहां से आ रही हैं। टॉर्च की रोशनी से झाड़ियों के बीच में देखने पर हमने उन्हें पकड़ लिया। हमें दो लोग भागते हुए नजर आए।’

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