रेलवे स्टेशन में लगी कोटा स्टोन की टाइल्स कई जगह टूटी

अंकित मिंज

बिलासपुर।

देश का सबसे बड़ा कमाऊ पूत जोन व जोन का प्रमुख स्टेशन बिलासपुर अधिकारियों की उपेक्षा के चलते बदहाल है। यहां सुविधा भी जरुरत के हिसाब से अधिकारी तय करते हैं। बिलासपुर स्टेशन को अगर देखा जाए तो प्लेटफॉर्म नं.1 में लगी टाइल्स व चैकर जगह जगह से टूटे हुए है।

सीमेंट भर कर इसका जगह-जगह मरम्मत की गयी हैए तो वहीं प्लेटफॉर्म नं. 6 की चैकर तो इस तरह डैमेज है कि अगर कोई यात्री ट्रेन चढ़े और संतुलन बिगड़ा तो वह पटरी पर गिरेगा। रेलवे प्रशासन टूटी टाइल्स की मरम्मत के लिए आउट सोर्सिंग का इंतजार कर रहा हैं।

एसईसीआर जोन की कुल कमाई में 20 हजार करोड़ की आय में अगर बिलासपुर मंडल की बात की जाए तो लगभग 15 सौै करोड़ की आय देता है। जोन का सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन बिलासपुर की आय भी लगभग 5 सौ करोड़ के उपर ही है। बावजूद इसके रेलवे बोर्ड की उपेक्षा कहे या अधिकारियों की स्टेशन का विकास तो हुआ लेकिन वह केवल इस कारण की यहां यात्रियों की संख्या अन्य स्टेशनों की अपेक्षा ज्यादा है।

लेकिन रायपुर से अगर तुलना की जाए तो बिलासपुर स्टेशन का विकास कही भी नहीं ठहरता। इसकी वजह यह है कि स्टेशन में आज भी पुरानी पद्धति के आधार पर ही विकास कार्य किए जा रहे हैं। स्केलेटर व लिफ्ट की सुविधा तो है लेकिन प्लेटफॉर्म की टाईल्स कई जगहों से टूटी- फूटी या फिर उबड़ खाबड़ दिखाई देती है।

जीएम व डीआरएम समय-समय पर स्टेशन का निरीक्षण भी करते है लेकिन उन्हें न तो टूटी हुआ स्टोन दिखाई देता है और न ही जगह जगह बैठते टाइल्स। हाल ही में प्लेटफॉर्म नं. 1 में गेट नं. तीन के सामने थोडी सी जगह बैठ गई थी तो रेलवे ने उसे कांक्रीट से भर कर मरम्मत कर दी थी।

इस समस्या को लेकर जब अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि रेलवे बोर्ड के अब स्टेशनों को आउट सोर्सिंग के माध्यम से बनाने पर जोर दे रहा है। बिलासपुर में आउटसोर्सिंग के माध्यम से सौंदर्यीकरण की बात चल रही है। स्पानंसर मिल जाए तो कार्य शुरु हो सकता है।

हबीब गंज का कायाकल्प आउटसोर्सिंग से

आउटसोर्सिंग से स्टेशनों के कायाकल्प का प्रत्यक्ष उदाहरण मध्यप्रदेश का हबीब गंज रेलवे स्टेशन है यहां जो भी कार्य हुए है। आउटसोङ्क्षर्सग के माध्यम से हुए हैं। इसी तर्ज पर ही अन्य रेलवे स्टेशनों के कायाकल्प की योजना पर रेलवे बोर्ड कार्य कर रहा है।

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