राष्ट्रपति चुनाव: कोविंद का कैंपेन आज से, विपक्षी खेमे में कुछ और दलों के नाराज होने की खबर

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद रविवार से अपना चुनाव प्रचार शरू कर रहे हैं। उनके कैंपेन की शुरुआत यूपी की राजधानी लखनऊ से हो रही है जहां वह विधायकों के सामने अपनी बात रखेंगे। एक तरफ एनडीए खेमा इसे लेकर खासा उत्साहित है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए विपक्षी एकजुटता को बचाए रखना मुश्किल हो रहा है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख से कुछ और विपक्षी दल भी खुश नहीं हैं। उधर लालू और नीतीश के बीच शुरू हुई जुबानी जंग भी थमने का नाम नहीं ले रही है।

पवार, ममता और देवेगौड़ा की पहली पसंद नहीं मीरा
विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम से कम उन सभी दलों का वोट हासिल करना है, जिन्होंने मीरा कुमार की उम्मीदवारी का समर्थन किया है। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार के अलावा ममता बनर्जी, शरद पवार और देवेगौड़ा की भी विपक्षी उम्मीदवार के रूप में मीरा कुमार पहली पसंद नहीं थीं। विपक्ष की 26 मई को हुई मीटिंग में ममता ने साफ संकेत दिया था कि विपक्ष का उम्मीदवार गैर-कांग्रेसी होगा। उनकी राय से अधिकतर गैर-कांग्रेसी दल सहमत भी थे। बाद में जब नीतीश कुमार, नवीन पटनायक और बाकी क्षेत्रीय दलों ने भी रामनाथ कोविंद को समर्थन दे दिया, तब ममता ने मीरा कुमार पर अनिच्छा से हामी भर दी। नीतीश ने गोपाल कृष्ण गांधी के नाम का प्रस्ताव दिया था, लेकिन कांग्रेस ने उनके नाम पर ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई।

इसी तरह देवेगौड़ा किसी सिविल सोसायटी से जुड़ी शख्सियत को उम्मीदवार बनाना चाहते थे। शरद पवार महाराष्ट्र से उम्मीदवारी चाहते थे। सूत्रों के अनुसार, मीरा कुमार के नाम पर कांग्रेस की मुहर लगने के बाद 22 जून की मीटिंग से शरद पवार और देवेगौड़ा दोनों खुद को अलग करना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने अंतिम समय में मीटिंग में आने के लिए उन्हें मना लिया। विपक्ष के एक सीनियर नेता ने एनबीटी से कहा कि अब असली चुनौती इन सभी दलों के विधायकों-सांसदों का वोट लेना है। जितने दलों ने मीरा कुमार को समर्थन दिया है, अगर उतने वोट नहीं आए तो इससे विपक्ष को करारा झटका लगेगा।

कांग्रेस करेगी डैमेज कंट्रोल
हालात की गंभीरता को समझते हुए और दूसरे दलों की नाराजगी को भांपते हुए कांग्रेस डैमेज कंट्रोल करना चाहती है। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति चुनाव पर लालू-नीतीश की बढ़ी कटुता को कम करने और शरद पवार, देवेगौड़ा जैसे नेताओं की नारागजी दूर करने के लिए कांग्रेस जल्द ही फिर सबके साथ मीटिंग कर सकती है। यह मीटिंग राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर न होकर किसानों से जुड़े मुद्दों पर हो सकती है। एनसीपी और जेडीयू ने कांग्रेस को किसानों के मुद्दे पर विपक्ष का संयुक्त आंदोलन चलाने को कहा था। लेकिन तब कांग्रेस ने उस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब कांग्रेस उस मुद्दे के बहाने विपक्ष को एक करना चाहती है। जेडीयू नेता के सी त्यागी ने कहा कि अगर कांग्रेस किसानों के मुद्दे पर आंदोलन करती है तो सबसे पहला साथ नीतीश कुमार का मिलेगा।

लालू-नीतीश के बीच जुबानी जंग और तेज

इस बीच राष्ट्रपति चुनाव को लेकर लालू और नीतीश के बीच चल रहे जुबानी तीर थम नहीं रहे। लालू की ओर से अब मोर्चा संभाला है उनके बेटे और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने। नीतीश द्वारा यह कहे जाने पर कि मीरा कुमार की हार निश्चित है, तेजस्वी ने प्रतिक्रिया में कहा, ‘मैदान में कूद नहीं, और हम तय कर लेंगे कि हार गए और जीत गए? जो मैदान में कूदेगा वही न लड़ेगा?’ उन्होंने कहा कि कोई उम्मीदवार हारने की मंशा से चुनावी मैदान में नहीं उतरता। नीतीश को निशाने पर लेते हुए तेजस्वी ने कहा, ‘राष्ट्रपति चुनाव कोई वॉकओवर मैच नहीं है। जीत से ज्यादा विचारधारा जरूरी है। हम शुरू से ही आरएसएस और बीजेपी के खिलाफ लड़ रहे हैं क्योंकि उनकी विचारधारा देश हित के खिलाफ है। हम उन्हें अपना वोट नहीं दे सकते।’

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