छत्तीसगढ़राज्य

कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर कर चुका है नवाचार, अब केन्द्र सरकार ने देश भर में लागू किया

रायपुर. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर द्वारा स्कूली बच्चों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों में पोषण वाटिका स्थापित करने की नवाचारी पहल अब देश भर के 11 लाख से अधिक स्कूलों में लागू होगी। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और शिक्षा सचिवों को पत्र लिखकर सभी स्कूलों में पोषण वाटिका स्थापित करने के निर्देश दिये हैं। पत्र में पोषण वाटिकाओं की स्थापना हेतु आवश्यक दिशा निर्देश भी जारी किये गये हैं।

पोषण वाटिकाओं के स्थापना हेतु कृषि विज्ञान केन्द्रों, कृषि, उद्यानिकी एवं वन विभागों और कृषि विश्वविद्यालयों से आवश्यक तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए कहा गया है। स्कूलों में पोषण वाटिका स्थापित करने का उददे्श्य विद्यार्थियों को ताजे फलों एवं सब्जियों के रूप में आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण तथा विद्यार्थियों में बागवानी का कौशल विकास करना है। उल्लेखनीय है कि कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर द्वारा वर्ष 2015-16 में जिले के कुछ स्कूलों में प्रायोगिक तौर पर पोषण वाटिका स्थापित करने की पहल की गई थी।

स्कूली बच्चों में कुपोषण दूर करने का माध्यम बनेंगी पोषण वाटिकाएं
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर द्वारा स्कूलों में पोषण वाटिका योजना की शुरूआत वर्ष 2015-16 में कांकेर जिले के 10 स्कूलों से की गई। कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर में विकसित किचन गार्डन से प्रभावित होकर तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती शम्मी आबिदी ने कांकेर जिले के 10 स्कूलों में पोषण वाटिकाएं विकसित करने के लिए प्रत्येक स्कूल को 10 हजार रूपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई।

इन 10 स्कूलों में विकसित पोषण वाटिका की सफलता से प्रभावित होकर वित्तीय वर्ष 2016-17 में कांकेर जिले के 30 अन्य स्कूलों में पोषण वाटिकाएं स्वीकृत की गई। कांकेर जिले में पोषण वाटिकाओं की सफलता से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ के अन्य कई जिलों – दंतेवाड़ा, बलरामपुर, सरगुजा, बिलासपुर, मुंगेली, महासमुंद और रायपुर जिलों में भी पोषण वाटिकाएं विकसित करने की शुरूआत की गई।

स्कूली बच्चों में कुपोषण दूर करने में इस योजना के महत्व को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन के तत्कालीन मुख्य सचिव श्री विवेक ढ़ांड़ ने सभी जिले के कलेक्टरों को पत्र लिखकर स्कूलों में पोषण वाटिकाएं स्थापित करने के निर्देश दिये। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के लगभग 10 हजार स्कूलों में पोषण वाटिकाएं विकसित की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पोषण वाटिका के लिए केवल 300 से 500 वर्गमीटर जमीन की आवश्यकता होती है। इन पोषण वाटिकाओं में मौसमी सब्जियों से साथ ही फलदार पौधे भी उगाये जाते हैं। सब्जियों में पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक, मेथी, चैलाई, लाल भाजी, के साथ-साथ गाजर, मूली, गोभी, टमाटर, भिंडी, बरबट्टी, बैंगन आदि की खेती की जाती है जिससे विद्यार्थियों के मध्यान्ह भोजन के लिए ताजी एवं पौष्टिक सब्जियां स्कूल में ही उत्पादित की जा सकें। इसके अलावा कंदवर्गीय सब्जियां अरबी, जिमिकंद आदि भी लगाई जाती है।

बहुवर्षीय वृक्ष कटहल और मुनगे का रोपण भी किया जाता है। फलों की प्रजातियों में मुख्यतः अमरूद, पपीता, केला, अनार, सीताफल, आंवला, नींबू आदि लगाए गए हैं। फलों एवं सब्जियों के चयन में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि इनसे विद्यार्थियों को आवश्यक पोषक तत्व विटामिन्स, मिनरल्स, एमिनो एसिड्स एवं फाइबर्स् पर्याप्त मात्रा में मिल सकें। सब्जियों को इस क्रम में लगाया जाता है कि सब्जियों का उत्पादन वर्ष भर लगातार होता रहे।

(संजय नैयर)
सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी

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