365 दिन चली थी कुमारस्वामी की पहली राजनीतिक फिल्म

बुधवार को लेंगे कर्नाटन के सीएम पद की शपथ, जानिए पूरा सफर..

बेंगलुरु। कर्नाटक के राजनीतिक रंगमंच का यह सीन बहुत रोचक है और कई उतार चढ़ाव के बाद यहां तक पहुंचा है। इस रंगमंच पर कर्नाटक का अगला सीन कुमारान्ना यानि एचडी कुमारस्वामी पर जाकर ठहर गया।

कर्नाटक में पिछले एक हफ्ते से अधिक से चल रहे इस रंगमंच के रंगकर्मी कोई और नहीं कुमारान्ना ही थे। क्योंकि वह राजनीति के साथ-साथ नाटक और फिल्म की दुनिया के भी मंजे हुए खिलाड़ी हैं। जिसे पता था कि किस सीन में कौन सा डायलॉग बोलना है और उस समय कौन सा कलाकार मंच पर दिखेगा।
ऐसे में अन्ना ने शरुआत कर्नाटक में मतदान से पहले ही खुद को किंगमेकर कह कर कर दी थी।

लेकिन जैसे-जैसे कर्नाटक का नाटक छंटता गया कुमारान्ना ही इसके किंग बनते नजर आए। वैसे तो कुमारस्वामी दूसरी बार सूबे के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं लेकिन राजनीति उनका पहला शौक नहीं था। अन्ना पहले रंगमंच से जुड़े फिर फिल्म से और फिल्म बनाने के उनके शौक ने उन्हें प्रोड्यूसर और डायरेक्टर बना दिया।

कुमारस्वामी की फिल्मी यात्रा : अन्ना फिल्म के डिस्ट्रीब्यूशन और फिल्म निर्माण से पहले हसन जिले में चन्नंबिका थियेटर देखा करते थे। यही नहीं कुमारस्वामी एक एक्जबीटर, डिस्ट्रीब्यूटर और प्रोड्यूसर भी रहे हैं। वह जिंदगी को फिल्म की तरह देखते हैं और पलभर में फिल्मी सीन की तरह जिंदगी के सीन भी बदल देते हैं। कुमारस्वामी को जानने वाले कहते हैं कि उनका पहला प्यार फिल्में हुआ करती थीं। लेकिन वक्त के साथ उनका पहला प्यार दूर होता गया और पिता एचडी देवगौड़ा की राजनीतिक विरासत उनपर इस तरह हावी होती गई कि उसका नतीजा हमारे सामने है।

जिस तरह से आज कर्नाटक की राजनीति में कुमारस्वामी का बोलबाला देखने को मिल रहा है ठीक वैसे ही उन्होंने फिल्मों में भी छाप छोड़ी है। साल 2003 में कुमारस्वामी की प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘चंद्र चकोरी’ इतनी पसंद की गई कि एक साल तक थियेटर से उतरी ही नहीं

राजकुमार के हैं फैन : साइंस में ग्रेजुएट हरदणहल्ली देवगौड़ा कुमारस्वामी यानि एचडी कुमारस्वामी ने बेंगलुरु यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। पढ़ाई खत्म होते होते उन्होंने फिल्मों में बतौर फाइनेंसर काम शुरू किया। कुमारस्वामी ने अपने इंटरव्यू में बताया कि उनके फेवरेट अभिनेता राजकुमार हैं। अन्ना कॉलेज के दिनों से ही राजकुमार की तरह कपड़े पहनते थे और उन्हीं की स्टाइल को कॉपी किया करते थे।

कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री बनने से पहले ही कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की कई उम्मीदे उनसे जुड़ गई हैं। कर्नाटक फिल्म चैंबर के अध्यक्ष सा रा गोविंदु नेकहा कि चूंकि कुमारस्वामी खुद ही एक एग्जबीटर प्रोड्यूसर और डिस्ट्रीब्यूटर रहे हैं तो उन्हें पता है कि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की क्या परेशानियां है और उम्मीद है कि वह हमारी परेशानी को दूर करेंगे। अन्ना के मुख्यमंत्री बनते ही फिल्म उद्योग से जुड़े लोग उनसे मिलने की योजना बना रहे हैं।

राजनीतिक करियर : कुमारस्वामी ने 1996 लोकसभा चुनाव में कनकपुरा सीट से चुनाव जीतकर राजनीति में प्रवेश किया, जबकि 1999 में विधानसभा चुनाव में कुमारस्वामी को हार का मुंह देखना पड़ा। पांच साल बाद 2004 में रामनगर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। कुमारस्वामी को रामनगर से कभी हार का मुंह देखने को नहीं मिला। साल 2004 में कांग्रेस के साथ मिलकर जेडीएस ने सरकार बनाई। लेकिन 2006 में उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़कर बीजेपी से हाथ मिला लिया।

कुमारस्वामी हमेशा टॉप पर रहना चाहते थे वह जल्द से जल्द सीएम बनना चाहते थे और वह सीएम बने भी। बता दें कि उस समय बीजेपी से समझौते के अनुसार जेडीएस और बीजेपी ने 20-20 महीने का सीएम बनाना तय किया। इस समझौते के बाद कुमारस्वामी 4 फरवरी 2006 से 9 अक्टूबर 2007 तक कर्नाटक के सीएम भी रहे। लेकिन इस बार उन्होंने ऐसा कोई समझौता नहीं किया है और उम्मीद की जा रही है कि इसबार रंगमंच का यह रंगकर्मी अपना कार्यकाल पूरा करेगा।

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