छत्तीसगढ़

आश्रमों में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव, दुसरी तरफ रामवनपथ गमन के नाम से सड़क किनारे सजाए जा रहे हैं हजारों बांस के टोकरीयाँ

राजशेखर नायर

नगरी।राम भगवान के 14 बरस के वनवास काल को यादगार बनाने जिले के 56 किलोमीटर को रामवन पथ गमन बनाकर 14000 पौधे सड़क किनारे बांस की टोकरीओं से धेरकर लगाया गया है ।

14 बरस की वनवास काल में राम भगवान जिन आश्रमों में रुके उनमें से कई आश्रमों में अब तक पेयजल तक की सुविधा नहीं है।

दूर-दूर से श्रद्धालु आश्रमों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं , ऊंची पहाड़ी चढ़ाई,चढ़ने के बाद जब आश्रम में पहुंचते हैं तो उन्हें प्यास बुझाने के लिए पानी तक नसीब नहीं होता ।
आश्रमों की मूलभूत सुविधाओं को पहले प्राथमिकता ना देकर सड़क किनारे बांस की टोकरी सजा कर रामवनपथ गमन के नाम पर 14 बरस के वनवास काल को यादगार बनाया जा रहा है ।
नगरी के मुकुंदपुर स्थित अगस्त ऋषि आश्रम का हाल भी कुछ ऐसा ही है ।

पर्यटन विभाग की अनदेखी के चलते ग्रामवासी चंदा इक्ठा कर पर्वत शिखर पर मंदिर का निर्माण कार्य कर रहे हैं ,पर पानी की कमी उनके निर्माण कार्य की राह में बाधा बनी हुई है।
ग्राम वासियों और श्रद्धालुओं की दृढ़ इच्छा शक्ति मंदिर निर्माण कार्य को निरंतर गति प्रदान कर रही हैं।

ग्रामवासी शासन प्रशासन व जनप्रतिनिधियों पर अनदेखी और उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं।

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