ज्योतिष

लता जी बचकर रहें बना हुआ है आयु कष्ट

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव 8178677715, 9811598848

जन्म के साथ ही मृत्यु तय हो जाती है. किसी ने कहा है कि सबको सांसे गिन कर मिली है. धार्मिक और पौराणिक शास्त्रों के अनुसार जब कोई बालक माता के गर्भ में प्रवेश करता है तो उसी के साथ ही उसका भाग्य, जीवन और मृत्यु तय हो जाती है. अनेक गूढ़ रहस्यों का उद्घाटन करते हुए हमारे ग्रंथों ने मृत्यु के रहस्यों से परदा उठाया है.

विधाता के द्वारा आयु, कर्म, धन-संपत्ति, शास्त्रों का ज्ञान और मृत्यु इन सब का निर्धारण माता के गर्भ के समय ही हो जाता है. गर्भावस्था की अवधि में ही बालक की आयु और उम्र दोनों का निर्धारण हो जाता है. जन्म लेने के बाद बालक अपने जीवन में क्या काम करेगा, किस क्षेत्र को अपना करियर बनाएगा, यह माता के गर्भ में ही निश्चित हो जाता है.

जातक को जीवन में मिलने वाली धन संपत्ति की मात्रा भी इसी समय निश्चित हो जाती है. बालक कितना विद्वान, बुद्धिमान और उसका शैक्षिक क्या रहेगा, यह भी उसी समय तय हो जाता है. इन सभी के साथ ही बालक की मृत्यु का दिन भी तय हो जाता है.

आज हमारे समाज, राजनीति, फिल्म जगत और हमारे आसपास ऐसे अनेक लोग है जो आज ७५ प्लस है, और स्वास्थ्य में कमी का सामना कर रहे हैं. कई वर्षों, माह और सप्ताह तक बेडरेस्ट पर रहना किसी अच्छा लगता है.

आज हम इस आलेख में कुछ ऐसे ही व्यक्तियों की बात करने जा रहे हैं, जो दीर्घायु प्राप्त कर चुके है और मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहे हैं, इनका इस लोक से गमन कब तक संभव होगा, आईये इसके लिए इनकी कुंडली देखते हैं-

लता मंगेशकर
२८ सितम्बर, १९२९, इंदौर, मध्यप्रदेश

लता जी की कुंडली मिथुन लग्न और कर्क राशि की है. कुंडली के द्वितीय भाव पर चंद्र, तृतीय भाव में शुक्र, चतुर्थ भाव में बुध एवं सूर्य, पंचम भाव में केतु एवं मंगल, सप्तम भाव में शनि, एकादश भाव में राहु और द्वादश भाव में गुरु है. वर्तमान में इनकी कुंडली में गुरु महादशा में बुध की अंतर्द्शा प्रभावी है. आयु भाव अष्टम पर सप्तमेश गुरु की नवम दृष्टि शुभ आशीर्वाद स्वरुप आ रही है.

तृतीय भाव जो आयु का दूसरा भाव हैं यहां भी एक शुभ ग्रह शुक्र स्थित है. आयु कारक ग्रह नवमेश होकर सप्तम भाव में स्थित है. यह योग आयु वृद्धिकारक है. अगस्त २०१९ से लेकर नवम्बर २०१९ के मध्य की अंतर्द्शा गुरु ग्रह की है, मारकेश गुरु द्वादश भाव में मंगल के नक्षत्र में है और मंगल इस लग्न के लिए रोगेश होते है. इस समय इनके आयु कष्ट बढ़ सकते है.

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