जानें गुरु नानक देव जी के 10 उपदेश

कल मनाया जाएगा प्रकाश पर्व

सिख धर्म के पहले गुरु और संस्थापक गुरु नानक देव का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता हैं। इस दिन को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता हैं।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरुद्वारों और अन्य स्थानों पर कई तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता हैं।

सिख धर्म के अनुयाइयों के अलावा अन्य धर्म के लोग भी इस दिन को बड़े ही धूमधाम से प्रकाश उत्सव और गुरु पर्व के रूप में मनाते हैं।

गुरुनानक देव ने समाज को एकता में बांधने और जाति-पाति को मिटाने के लिए कई उपदेश दिए थे। गुरु पर्व के अवसर पर आइए जानते हैं गुरु नानक देव जी के दिए गए उपदेशों के बारे में।

गुरु नानक देव ने अपना पहला संदेश तब दिया जब वह मात्र 5 साल के थे। भगवान एक हैं वह हर जगह उपस्थित होते हैं। गुरु नानक देव ने ही इक ओंकार का नारा दिया था और कहा था सबका पिता वही हैं इसलिए सभी से प्रेम करना चाहिए।

-हमेशा लोभ का त्याग करना चाहिए और मेहनत कर सही तरीको से धन कामना चाहिए।

-जरूरतमंदो की सहायता करने में हमें कभी भी पीछे नहीं हटना चाहिेए। पैसों और अन्य तरीको से दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

-पैसा का स्थान हमेशा जेब में ही रहना चाहिए इसे अपने ह्रदय से लगाकर नहीं रखना चाहिए यानि पैसों से ज्यादा प्यार नहीं करना चाहिए।

-गुरु नानक देव पुरुष और स्त्री को हमेशा बराबर मानते थे उनके अनुसार कभी भी महिलाओं का अनादर नहीं करना चाहिए।

-जब भी कोई काम करें तो तनाव के साथ कभी भी नहीं करना चाहिए। तनाव मुक्त रहकर अपने कर्म को निरंतर करते रहना चाहिए और हमेशा खुश रहना चाहिए।

-संसार को जीतने से पहले खुद की बुराइयों और गलत आदतों पर विजय पाने की कोशिश करना चाहिए।

-अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता हैं इसलिए कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए।

-हमेशा अच्छे और विनम्र होकर सेवाभाव से अपना जीवन गुजारना चाहिए।

-लोगों को प्रेम, एकता, समानता और भाईचारा का संदेश देना चाहिए।

-जब मन पाप और लज्जा से अपवित्र हो जाता हैं, तब ईश्वर नाम के प्रेम से वह स्वच्छ हो जाता हैं।

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