अमरनाथ गुफा से जुड़ी रहस्मयी और हैरान करने वाली कहनियां जानें

भगवान शिव ने इसी गुफा में माता पार्वती को अमृत्व का रहस्य बताया था

अमरनाथ यात्रा की शुरूआत हो चुकी है। अमरनाथ को पवित्र स्थलों में एक माना जाता है। ये पवित्र स्थल खूबसुरत वादियों के बीच स्थित है।

वहीं इस अमरनाथ गुफा के दर्शन के लिए हर साल लाखों भक्त इनके दर्शन को जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है इस धार्मिक स्थल के पीछे कई रहस्मयी कहानियां छिपी हुई है। जानें क्या है इसके पीछे की रोचक कहानियां……………….

बर्फीली बूंदों से बनता है प्राकृतिक हिम शिवलिंग। भगवान शिव ने इसी गुफा में माता पार्वती को अमृत्व का रहस्य बताया था इसलिए इस गुफा को अमरनाथ गुफा कहा जाता है।

इस गुफा में पार्वती शक्तिपीठ स्थित है। यह शक्ति पीठ माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है। धार्मिक मान्यता है कि इस जगह पर माता सती का कंठ गिरा था।

जानकारी के अनुसार, गुफा में कबूतर का एक जोड़ा रहता है। इस जोड़े को अमर बताया जाता है। मान्यता है कि कबूतर का यह जोड़ा जिस किसी भी श्रद्धालु को दिखाई देता है, स्वयं शिव-पार्वती उस भक्त को दर्शन देकर मोक्ष प्रदान करते हैं।

इस गुफा के बारे में हैरान करनेवाली बात यह है कि बर्फ का शिवलिंग बनने के लिए गुफा में पानी का स्त्रोत क्या है, यह अब तक एक अनसुलझी पहेली है।

इस हिमलिंग के आस-पास जो बर्फ फैला रहता है वह कच्चा और मुलायम होता है। जबकि हिमलिंग का बर्फ ठोस होता है।

अमरत्व का रहस्य न जानने के कारण देवी पार्वती का जन्म और मृत्यु चक्र चलता रहता था जबकि शिव अमर हैं।

इस कारण माता पार्वती जन्म और मृत्यु के चक्र से गुजरतीं और शिव को पति रूप में प्राप्त करतीं। जबकि शिव अपनी शक्ति का अपने उसी रूप में वरण करते। इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया।

भगवान शिव मुंड की माला क्यों धारण करते हैं? अमरत्व की कथा सुनाने से पहले भगवान शिव ने माता पार्वती को उनके इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि देवी अब तक आपके जितने जन्म हुए हैं, मैंने उतने ही मुंड धारत कर रखे हैं।

बूटा मलिक नामक एक मुस्लिम गडरिया एक दिन भेड़ चराते-चराते बहुत दूर निकल गया। बूटा स्वभाव से बहुत विनम्र और दयालु था।

ऊपर पहाड़ पर उसकी भेंट एक साधु से हुई। साधु ने बूटा को एक कोयले से भरी एक कांगड़ी ( हाथ सेकनेवाला पात्र ) दिया। बूटा ने जब घर आकर उस कांगड़ी को देखा तो उसमें कोयले की जगह सोना भरा हुआ था।

तब वह उस साधु को धन्यवाद करने पहुंचा। लेकिन वहां साधु नहीं मिले और एक गुफा दिखी।

जब बूटा मलिक ने उस गुफा के अंदर जाकर देखा तो बर्फ से बना सफेद शिवलिंग चमक रहा था।

उसने यह बात गांवालों को बताई और इस घटना के 3 साल बाद अमरनाथ की पहली यात्रा शुरू हुई। तभी से इस यात्रा का क्रम चल रहा है। बूटा मलिक के वंशज आप भी इस गुफा और शिवलिंग की देखरेख करते हैं।

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