​​​​​​​महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लें: राज्यपाल उइके

राज्यपाल एकता परिषद द्वारा आयोजित ‘‘शांति सम्मेलन’’ में हुई शामिल

रायपुर: राज्यपाल अनुसुईया उइके आज एकता परिषद् छत्तीसगढ़ द्वारा गांधी जयंती एवं विश्व शांति दिवस के अवसर पर तिल्दा में आयोजित ‘‘शांति सम्मेलन’’ में शामिल हुई। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन ही एक दर्शन है। उनके जीवन के हर पहलुओं से हमें सीख मिलती है। गांधी जी सत्य और अहिंसा के कठोर पक्षधर थे। गांधी जी ने स्वच्छता अपनाने का आग्रह किया था। वे कहते थे कि यदि कोई व्यक्ति स्वच्छ नहीं है, तो वह स्वस्थ नहीं रह सकता है। उइके ने कहा कि इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बताए हुए शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लें। उन्होने इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री  लालबहादुर शास्त्री को नमन किया।

राज्यपाल ने कहा कि एकता परिषद द्वारा राजगोपाल के नेतृत्व में 12 राज्यों के सौ जिलों में पदयात्रा आयोजित की गई थी, जिसका 21 सितंबर को विश्व अहिंसा दिवस के अवसर पर शुभारंभ हुआ और 02 अक्टूबर को समापन हो रहा है। मैं ऐसी महती पहल के लिए  राजगोपाल जी को शुभकामनाएं देती हूं। उन्होंने एकता परिषद की सराहना करते हुए कहा कि वे एक अच्छे उद्देश्य के लिए यात्रा कर रहे हैं। इनसे उन्हें जो प्रतिफल मिलेगा उससे निश्चित ही इन कार्यों से देश में शांति और न्याय का वातावरण स्थापित करने में मदद मिलेगी।

राज्यपाल ने कहा कि जब मैं सामाजिक जीवन से राजनीति में आई तो समाज के निचले तबके के तकलीफ को करीब से देखा। तभी मेरे मन में संवेदना जागी और उनके दुख-दर्द को दूर करने के लिए पहल करने की सोची। मैं आदिवासी समाज के मध्य गई और यह देखा कि उन तक शासन की योजनाएं पहुंचे और लाभ भी मिले।

राज्यपाल ने कहा 

राज्यपाल ने कहा कि जब मैं राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की उपाध्यक्ष थी तो मैंने पाया कि राउरकेला में वर्षों से आदिवासियों की जमीन को अधिग्रहित कर लिया था और उन्हें पर्याप्त मुआवजा भी नहीं मिला। मैं उन्हें मुआवजा दिलाने में मदद की। मैंने छत्तीसगढ़ के तेंदूपत्ता संग्राहकों को भी उनके लंबित पारिश्रमिक और बोनस राशि देने के लिए शासन को निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश नक्सलवाद की समस्या से जूझ रहा है। मैंने इस समस्या के समाधान के लिए सुझाव दिया है कि आदिवासी समाज के प्रमुखों तथा उस क्षेत्रों के स्थानीय प्रमुखों को विश्वास में लेकर कार्य करें। इस समस्या के समाधान का अवश्य कोई रास्ता निकलेगा।

मुझे आशा है कि जल्द ही इस समस्या से निजात पाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश आदिवासी इलाका है। इसका अधिकतर क्षेत्र पांचवी अनुसूची मे आता हैं। मैंने इस अनुसूची के तहत शासन को नियमावली बनाने को कहा है। इससे आदिवासी समाज को बड़ी राहत मिलेगी। कार्यक्रम में मोर जिम्मेदारी अभियान के पोस्टर का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर पर एकता परिषद के संस्थापक राजगोपाल और चंदन कुमार ने भी अपना उद्बोधन दिया।

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