छत्तीसगढ़राज्य

कबीर की तरह खरी-खरी कहने का साहस रखते हैं गौतम पारख : डॉ. रमन सिंह

विचार प्रवाह पुस्तक के विमोचन के अवसर पर बोले मुख्यमंत्री

राजनांदगांव: नगर के बुद्धिजीवी, लेखक एवं व्यवसायी गौतम पारख की पुस्तक विचार प्रवाह का विमोचन आज मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के हाथों हुआ. मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर गौतम पारख के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि कबीर अपनी बात खरी-खरी कहने का साहस रखते थे, इतनी सच्चाई विचारों की गहरी पवित्रता से आती है. मैं लंबे समय से पारख से जुड़ा हुआ है. मैंने महसूस किया है कि उनमें गहरी सात्विकता है. सत्य और अहिंसा को लेकर गहरी प्रतिबद्धता है.

उनके व्यक्तित्व की सरलता उनके लेखन में उतरती है. पारख भी कबीर की तरह ही खरी-खरी कहने का साहस रखते हैं. डॉ. सिंह ने कहा कि वे संसार से जुड़े हैं व्यापार भी करते हैं लेकिन भीतर से वे संन्यासी जैसे हैं. उनके भीतर के वैराग्य भाव से ही उनमें सेवाभाव उपजता है और जनसेवा में वे सदैव तत्पर रहते हैं. इस अवसर पर उनके ज्येष्ठ भ्राता एवं 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष खूबचंद पारख ने भी गौतम के व्यक्तिगत गुणों को विमोचन कार्यक्रम के अवसर पर उपस्थित अतिथियों के बीच साझा किया. उन्होंने बताया कि आठ वर्ष की आयु में ही गौतम जैन मुनि नानेश के संपर्क में आए थे लेकिन दादा के आग्रह की वजह से मुनि ने उन्हें दीक्षित नहीं किया.

परिवार में रहते हुए भी वे गहरे वैराग्य भाव से अपना कार्य करते रहे. उनकी पुस्तक विचार प्रवाह में ऐसे अनेक प्रसंग हैं जिनमें उनका सत्य के प्रति गहन आग्रह एवं अहिंसा के प्रति गहरा भाव देखने मिलता है. शिक्षा और स्वास्थ्य की पहुँच सभी तक हो, इसके लिए भी गौतम ने महत्वपूर्ण कार्य किया. चाहे आदिवासी अंचल के प्रतिभाशाली बच्चों को अच्छे स्कूलों में शिक्षा प्रदान करना हो अथवा गरीबों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए मदद करना, वे हमेशा अग्रणी रहे हैं. इस मौके पर अपनी पुस्तक के संबंध में उपस्थित अतिथियों को जानकारी देते हुए गौतम ने बताया कि मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कबीरा रोया विषय पर संबोधन दिया. इस संबोधन को रांका फैमिली फाउंडेशन के संस्थापक और भीलवाड़ा के प्रमुख टैक्सटाइल व्यवसायी हरिसिंह रांका ने सुनाए उनसे परिचय बढ़ा और उन्होंने आग्रह किया कि इस सुंदर विचार श्रृंखला को पुस्तक का रूप दिया जाना चाहिए और इसके प्रकाशन का प्रस्ताव दिया.

पुस्तक की एडिटिंग में सबेरा संकेत के संपादक सुशील कोठारी ने तथा वरिष्ठ शिक्षक एस शर्मा ने मदद की. उन्होंने बताया कि वन के अनुभवों को किताब में जगह देने की कोशिश की गई है. अहिंसा और सत्य के रास्ते पर चलकर वन किस तरह संतोषपूर्ण बनाया जा सकता है इसे मैंने उदाहरणों से बताने की कोशिश की है. उन्होंने पुस्तक के विमोचन के अवसर पर अपने अभिभावकों एवं ज्येष्ठजनों का भी स्मरण किया. किताब के विमोचन के अवसर पर एडिटिंग में विशेष सहयोग के लिए पारख परिवार ने सबेरा संकेत के संपादक सुशील कोठारी को सम्मानित भी किया.

इस अवसर पर उपस्थित सांसद अभिषेक सिंह ने किताब के विमोचन के लिए पारख को शुभकामनाएं दीं. इस अवसर पर महापौर मधुसूदन यादव, राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष नीलू शर्मा, राज्य ऊर्दू अकादमी के अध्यक्ष अकरम कुरैशी, राज्य समाज कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष मती शोभा सोनी, नागरिक आपूर्ति निगम के पूर्व अध्यक्ष लीलाराम भोजवानी, राजगामी संपदा न्यास के अध्यक्ष रमेश पटेल, राजगामी संपदा न्यास के पूर्व अध्यक्ष संतोष अग्रवाल, राज्य अंत्यावसायी निगम के सदस्य पवन मेश्राम, सभापति शिव वर्मा, पूर्व महापौर नरेश डाकलिया, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दिनेश गांधी, कोमल राजपूत, सावन वर्मा, सुरेश डुलानी जेठमल बोहरा, ओजस दास, राजेंद्र गोलछा, शरद वर्मा, अशोक पांडे, राजेंद्र व्यास, पुरुषोत्तम तिवारी, जयदीप शर्मा, प्रेरणा तिवारी, तेंद्र जैन, दामोदर दास मुंदड़ा, राजेश गुप्ता, उत्तम बाफना, उत्तम गिडिया, मती पूर्णिमा साहू, मधु बैद सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे.

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कबीर की तरह खरी-खरी कहने का साहस रखते हैं गौतम पारख : डॉ. रमन सिंह
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