इन्हें भी येदियुरप्पा की तरह किस्मत ने दिया धोखा

-जानिए कौन हैं वो लोग

नई दिल्ली। कर्नाटक में भाजपा सरकार गिरने के साथ ही बीएस येदियुरप्पा की बदकिस्मती का किस्सा फिर से आम हो गया। येदियुरप्पा तीसरी बार कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। इस तरह से येदियुरप्पा न चाहते भी देश के सबसे बदकिस्मत मुख्यमंत्री बन गए जिसने एक नहीं दो नहीं बल्कि तीन बार सरकार बनाने के बावजूद कार्यकाल पूरा नहीं किया।

हम आपको बता रहे हैं उन नेताओं के बारे में जिन्हे येदियुरप्पा की तरह किस्मत ने दिया धोखा, जानिए कौन हैं वो लोग

-जगदंबिका पाल (दो दिन)

21 फरवरी 1998 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राह्णयपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त करने के बाद बिना पर्याप्त विधायकों के समर्थन के ही कांग्रेसी विधायक जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी थी। अगले दिन हाईकोर्ट ने राज्यपाल के आदेश पर रोक लगा दिया। सदन में जगदंबिका पाल अपना बहुमत साबित नही कर पाये और उन्हें 48 घंटे के अंदर ही पद से हटना पड़ा।

-सतीश प्रसाद सिंह (सात दिन)

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देश के इतिहास में सबसे कम उम्र में सतीश प्रसाद सिंह ने 27 जनवरी 1968 को बिहार में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उन्हें उस समय कांग्रेसी मुख्यमंत्री महामाया प्रसाद सिन्हा के खिलाफ विधायकों की बगावत के बाद तब तक के लिए मुख्यमंत्री बने रहने का मौका दिया गया जब तक कि बागियों तथा संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के पसंदीदा उम्मीदवार बीपी मंडल संसद से इस्तीपा देकर एमएलसी नहीं चुन लिये जाते। इस तरह एक हफ्ते में उन्हें मंडल के लिए कुर्सी छोडा पड़ा।

-जानकी रामचंद्रन (22 दिन)

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24 दिसंबर 1987 को जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन का निधन हुआ तो यह तय नहीं था कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा। पार्टी विधायकों के एक गुट ने उनकी पत्नी के पक्ष में राज्यपाल को समर्थन पत्र भेज दिया। दूसरी ओर एमजीआर की निकट सहयोगी जयललिता भी उत्तराधिकार के लिए दावेदार थीं। राज्यपाल एसएल खुराना ने 7 जनवरी को जानकी रामचंद्रन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी लेकिन वे सदन में बहुमत साबित नहीं कर पायीं और 28 जनवरी को उन्हें पद से हटना पड़ा। प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा।
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