छत्तीसगढ़

शराब दुकान कर्मियों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी खुले रहे शराब दुकान

हिमालय मुखर्जी ब्यूरो चीफ रायगढ़

रायगढ़ : सरकारी शराब दुकानों में कोविड गाइडलाइन की अनदेखी, शहर के मध्य स्थित दो शराब दुकान के 4 कर्मियों के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद भी शराब दुकानों को बंद नहीं किया गया है। सभी कर्मियों का कोरोना टेस्ट किया गया। इनमें से जिनका नेगेटिव आया उन्हें सेल्फ आइसोलेशन में रहने को कहा गया है लेकिन आबकारी विभाग को सिर्फ पैसे से ही मतलब है फिर चाहे वो जान किसी जान ही दांव पर न लगा हो।

आबकारी विभाग नोवल कोरोना वायरस के गाइडलाइन का खुला उल्लंघन कर रहा है। इसकी जगह कोई और होता तो उस पर तुरंत माहमारी एक्ट के तहत कार्रवाई हो जाती। ठेके के कर्मचारी डरे हुए हैं और नौकरी छोड़ने का मन बना चुके हैं। नाम न बताने की शर्त पर वे एक साथ कहते हैं कि काम के नाम पर उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। शराब से सबसे ज्यादा सरकार को कमाई होती है और उसी को बेचने वालों की हालत बदतर है। इस कोरोना काल में हमारी जान की कोई कीमत नहीं है।

कर्मी बताते हैं कि वायरस का संक्रमण फैला हुआ ऐसे में जब दवाई दुकान तक बंद है फिर शराब दुकान चालू करने का क्या औचित्य है। हम सभी ने कोविड जांच केंद्र में अपना सैंपल दिया और हमें 4 दिन तक होम आइशोलेशन में रहने के निर्देश दिए गए है फिर भी हमसे काम कराया जा रहा है। और तो और अब हमारे दुकान में 4 साथियों के टेस्ट पॉजिटिव आए हैं फिर भी दुकान को बंद नहीं किया गया है।

नेगेटिव पाए गए व्यक्ति तो होम आइसोलेशन में रहना होगा : सीएमएचओ

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एसएन केसरी कहते हैं कि अगर कहीं एक साथ रहने वाले लोगों में कुछ लोग पॉजिटिव पाए जाते हैं और कुछ नेगेटिव, तो नेगेटिव पाए गए लोगों को होम आइसोलेशन में रहना पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह नेगेटिव पाए गए मरीजों की टेस्ट की भी जरूरत नहीं होगी क्योंकि वे पॉजिटिव पाए गए मरीजों के प्राइमरी कॉन्टेक्ट में रहे हैं।

कोविड गाइडलाइन के तहत दुकान हो रही संचालित : आबकारी आयुक्त

इस पूरे मसले पर सहायक आबकारी आयुक्त मंजूश्री कसेर कहती हैं कि शराब दुकान बंद नहीं हो सकती। दोनों दुकानों को सुबह सैनेटाइज करने के बाद हमने प्लेसमेंट एजेंसी को दूसरे कर्मियों द्वारा चलाने के लिए निर्देशित किया है। अगर किसी नेगेटिव रिपोर्ट वाले कर्मी को होम आइसोलेशन के लिए कहा गया है और उसे प्लेसमेंट एजेंसी वाले जबरन बुला रहे हैं तो मैं इस मामले को खुद देखती हूं। कोविड गाइडलाइन के अनुसार ही शराब दुकानों का संचालन किया जा रहा है।

सवालों के घेरे में विभाग और एजेंसी

दो शराब दुकान के 4 कर्मियों के कोरोना पॉजिटिव आने बाद उसे सैनेटाइज कर अन्य कर्मियों द्वारा संचालित करना सवाल के घेरे में है क्योंकि जिन दोनों दुकानों का संचालन बाहर के स्टाफ द्वारा किया जा रहा है वहां कई ऐसे कर्मी है जो इन चार पॉजिटिव कर्मियों से सीधे संपर्क में रहे हैं। इसके बावजदू कोरोना नियमों की दुहाई देते हुए इन कर्मियों को काम पर बुलाया जाना आबकारी महकमे और प्लेसमेंट एजेंसी की कार्यशैली पर प्रश्न खड़े कर रहा है।

कल एक कोरोना पॉजिटिव आने के बाद आज सुबह इन दोनों दुकानों को सैनेटाइज किया गया था। आज दोपहर ढाई बजे 3 पॉजिटिव मिलने के बाद करीब 4 बजे शराब दुकानों को फिर से शुरू कर दिया गया है। कर्मी डरे हुए हैं इनका डर शराब के पैसे के पीछे छिप जा रहा है।

होम डिलिवरी में ज्यादा खतरा

ठेका कर्मी बताते हैं कि उन्हें इस कोरोना काल में होम डिलिवरी का भी अतिरिक्त काम मिला है। वे शहर के कोने-कोने में शराब की होम डिलिवरी करते हैं जिसमें कोरोना संक्रमण फैलने का ज्यादा खतरा है। इस काम के लिए उन्हें कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए हैं। उन्होंने इस बाबत आबकारी विभाग में अपना विरोध भी जताया लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई और बिना अतिरिक्त भुगतान के उनसे विभाग होम डिलिवरी करा रहा है और उससे होने वाली अतिरिक्त आय से अपनी झोली भर रहा है।

हमारा शोषण हो रहा है : प्लेसमेंटकर्मी

सरकारी शराब दुकान में प्लेसमेंट के तहत काम करने वाले कर्मचारी कहते हैं कि सरकार और विभाग दोनों मिलकर उनका शोषण कर रहे हैं। सुबह 11 से रात 10 बजे तक हम कोरोना से पहले काम करते थे। लेकिन कोरोना के इस दौर में जहां कम से कम लोगों से काम लिया जा रहा है ताकि वायरस के संक्रमण को रोका जा सके पर आबकारी महकमा उनसे 13 घंटे सुबह 8 से रात 9 बजे तक काम ले रहा है। इसके अलावा गर्मी-उमस में झुलसते शराब बेचना अलग परेशानी है।

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